विश्व शौचालय दिवस 2020‘सस्टेनेबल सैनिटेशन एंड क्लाइमेट चेंज’

हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस (World Toilet Day) मनाया जाता है. वर्ष 2001 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत विश्व शौचालय संगठन द्वारा की गई थी.

  • वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसे अधिकारिक तौर पर विश्व शौचालय दिवस घोषित कर दिया गया था.
  • यह दिन लोगों को विश्व स्तर पर स्वच्छता के संकट से निपटने के लिए प्रेरित करता है. 
  • खुले में शौच करना मतलब बीमारियों को न्योता देना है. खुले में शौच करने का सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है.
  • ऐसे में हमें इन सारी चीजों का बेहद खास ध्यान देना चाहिए.
  • संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक विश्व में आज भी आधी से अधिक आबादी खासतौर पर भारत में लोग बिना शौचालय के जीवनयापन करने को मजबूर है.

ऐसे में चलिए जानते हैं इसके बारे में कुछ खास बातें. 

साल 2001 में हुई थी शुरूआत

  • ‘विश्व शौचालय दिवस’ का इतिहास बहुत ज्यादा पुराना नहीं है. साल 2001 में पहली बार इसकी शुरूआत विश्व शौचालय संगठन ने की थी.
  • साल 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ‘वर्ल्ड टॉयलेट डे’ मनाने के प्रस्ताव को पास कर दिया गया था.
  • बता दें कि विश्व शौचालय संगठन एक गैर लाभकारी संस्था है और यह दुनिया भर में स्वच्छता और शौचालय की स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रयासरत है.

विश्व शौचालय दिवस 2020 थीम

  • इस बार इसकी थीम है ‘सस्टेनेबल सैनिटेशन एंड क्लाइमेट चेंज’ है और साल 2019 में “लीविंग नो वन बिहाइंड” थी.
  • जैला की आप भी जानते हैं कि शौचालय हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण है और साथ ही हमें कई सारी बीमारियों से दूर रखता है.
  • भारत में पिछले कुछ सालों से शौचालय की अहमियत बहुत बढ़ गई है. शौचालय का इस्तेमाल से हमारा जीवन सुरक्षित रहता है. शौचालय का इस्तेमाल करने से हम विभिन्न बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं.

‘विश्व शौचालय दिवस’ मनाने का उद्देश्य

  • आज भी विश्व में कई करोड़ लोग शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या उनके पास इसकी सुविधा नहीं है.
  • ऐसे में इस दिवस को मनाने के पीछे यही उद्देश्य और संदेश है कि विश्व के तमाम लोगों को 2030 तक शौचालय की सुविधा मुहैया करा दी जाए.
  • गौरतलब है कि सयुक्त राष्ट्र के 6 सतत विकास लक्ष्यों में से एक यह भी है.