संभल कर करें कंट्रासेप्टिव पिल्स का इस्तेमाल

trail-pillsकंट्रासेप्टिव पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियां। यानी पूरी निश्चिंतता। एक सीमा तक। उसके बाद के परिणाम होते हैं चौंकाने वाले। जो सीधा असर डालता है आपकी सेहत पर। कौन है इसका जिम्मेदार। विज्ञापन द्वारा प्रचारित कांट्रासेप्टिव पिल्स के चक्कर में पड़कर लड़कियां न सिर्फ भटक रही हैं, बल्कि अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी कर रही हैं। दरअसल, कांट्रासेप्टिव पिल्स का प्रचार-प्रसार इस तरह से किया जा रहा है, मानो वह हाजमोला की गोलियां हो। कुछ ज्यादा खा लिया तो कोई बात नहीं, हाजमोला है न। ठीक ऐसे ही एहतिहात नहीं बरती, कोई बात नहीं, कांट्रासेप्टिव पिल्स है न। बस। 72 घंटों के भीतर लीजिए और ऐश कीजिए।

सच तो यह है कि कांट्रासेप्टिव पिल्स अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए बनाई गई है। लेकिन इसके विज्ञापन के जो तरीके हैं वे लोगों को कुछ अधिक ही जागरूक कर रहे हैं। विज्ञापन के डायलॉग, आस-पास के दृश्य और कामुकता भरे अंदाज ने लोगों को इस कदर आकर्षित किया है कि वे इस विज्ञापन के मूल उद्देश्य को ही गौण कर देते हैं और इस तथ्य को हाईलाइट कर रहे हैं जैसे ये गोलियां इमरजेंसी में नहीं बल्कि रूटीन में लेनी है। आज टीनएजर्स सेक्सयुअली एक्टिव हैं, तो इसकी वजह इमरजेंसी गोलियां भी हैं। वे सोचते हैं कि कुछ भी कर लो और फिर गोली खा लो। इसमें दोष उनका नहीं, बल्कि खुले माहौल का है। जहां ऐसी चीजों को उत्तेजक संवाद और दृश्य के साथ प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे में उस चीज को अपनाने का जो एक्सपेरिमेंट है, उसे करने में शादीशुदा और कुंवारी लड़कियां भी पीछे नहीं हटती हैं। इसकी वजह से स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियां भी इन इमरजेंसी गोलियों के आड़ में सेक्स को न सिर्फ मनोरंजन समझती है, बल्कि शारीरिक रूप से कई रोगों को आमंत्रित भी करती हैं। बढ़ती उम्र के लड़के-लड़कियां कच्ची उम्र में ही एक्सपेरिमेंट करना चाहते हैं।

उस पर मीडिया द्वारा पहले की अपेक्षा ज्यादा जानकारी मिलने की वजह से उनकी उत्सुकता बढ़ रही है और वे छोटी उम्र में ही बड़े होने का अनुभव करना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से गर्भनिरोधक गोलियों का प्रचार-प्रसार हो रहा है, उससे सिर्फ विवाहित ही नहीं, बल्कि अविवाहित भी इन पर कुछ ज्यादा ही भरोसा करने लगे हैं। पर जरूरी नहीं कि हर बार ये गोलियां आपका साथ दे जाएं। नतीजतन अनचाहा गर्भ। इतना ही नहीं, इन गोलियों की आड़ में लड़के-लड़कियां असुरक्षित यौन संबंध भी बनाते हैं, इससे एड्स जैसी बीमारी के होने का खतरा भी रहता है। क्योंकि ऐसी गोलियां एचआईवी या यौन संचारित रोगों से रक्षा नहीं करतीं, इसके बावजूद लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं। इन गोलियों को खाने के बाद उबकाई, उल्टी, सिरदर्द, मरोड़, थकान और छाती में दर्द हो सकता है। कभी-कभी इसके कारण अनियमित रक्तस्त्राव या माहवारी में विलंब भी हो सकता है।