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व्यंग्य : काले धन का नागिन डांस

Lalit Mohan Rathorललित शौर्य

पांच सौ और एक हजार का नोट जो आँखों में चमक पैदा कर देता था, जो लोगों की बाँछें खिला देता था, जिसको देखकर ही मीठी-मीठी गुदगुदी लगना शुरू हो जाती थी और हाँ हाथ में खुजली लगना भी संकेत माना जाता था कि कहीं ना कहीं से आज पक्का 500 या 1000 का नोट टपकने वाला है। इन तमाम मिथको या कहें सच्चाइयों का गला घोंटते हुए अब यही नोट उबकाई का साधन बन गए हैं। आज हर कोई इन्हें देख कर नाक मुंह निचोड़ रहा है। और ये नोट भी मनहूस सी सकल बनाएं एक कोने में अपने बुरे दिनों पर रो रहे हैं। आज गुल्लक में पड़ी चिल्लर, छोटू की जेब में पड़ा दस का नोट, बहन की पर्स में दबे सौ के नोट उचक-उचक कर इन 500 और 1000 के नोटों पर जोर-जोर से ठहाके लगाकर हँस रहे हैं। घर की कामकाजी महिलाओं ने जो रोज रात को पति की जेब पर सर्जिकल स्ट्राइक कर के पैसे जोड़े थे वो आज मजबूरन पति महोदय को एक्सचेंज के लिए देने पड़ रहे हैं। मध्यमवर्गीय पतियों में सरकार के इस निर्णय से खुसी की लहर है।

इसी बहाने पत्नी की ईमानदारी का पर्दाफाश हो रहा है। उधर बच्चे भी परेशान हैं जो रिश्तेदारों के आने पर 500-1000 के नोट से हरे भरे होते थे। जिनके गुल्लक इन नोटों से गुलजार थे वो आज गुल्लक तोड़ कर माँ पिताजी को थमा रहे हैं। और वो बिलकुल भी आस्वस्त नहीं है कि उनको पूरी रकम वापस मिलेगी। पापा या मम्मी द्वारा इस रकम से टैक्स जरूर वसूला जाएगा। घर और बाहर दोनों तरफ अफरा -तफरी मची हुई है। काले धन के काले कारोबारी अब नागिन डांस करते नजर आ रहे हैं। न उनको थूकते बन रहा है न निगलते। कई राजनैतिक पार्टियां अपनी छाती कूट रही हैं।क्योंकि उनके नोटों की माला पहनने का शौक अब शक के दायरे में आ गया है।

500 के नोट के बदले वोट के जुमले पर चोट हो रही है। देश के भीतर मची उथल पुथल को देखकर आज नोटों को माया , महामाया, चंचला जैसे शब्दों से नवाजने वाले विद्वानों को प्रणाम करने का मन कर रहा है। घरों में कुन्तलों के हिसाब से नोटों को दबाये बेचारे बहुतायत  सरकारी कर्मचारी, नौकरशाह, नेता, ठेकेदार, बिल्डर आज डिस्प्रिन की गोलियां खाकर सर दर्द को निपटाने की कोशिश में लगे हुए हैं। लेकिन ये ऐसा सर दर्द है जो गोली से नहीं जाएगा ना ही झंडू बाम घिसने से। इनको बैंकों की शरण में जाना ही होगा। और भविष्य में कालेधन को ना कहना पड़ेगा। खैर इस माहौल में जब नोट बदले जा रहे हैं, तो हमें विचार , आचार, व्यवहार और संस्कार बदलने की भी जरूरत है। बदलाव केवल मुद्रा का नहीं मानसिकता का भी होना चाहिए। भ्रष्टाचार, आर्थिक उन्माद, राजनीतिक उपद्रव को पोछे धकेलने का संकल्प लेना होगा। बदलाव जरुरी है आओ नोट के साथ -साथ आज खुद को भी बदलें…