राज्य विधानसभा का सिर्फ एक दिन का होगा, जबकि सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं होगा

  • राज्य विधानसभा का मानसून सत्र सिर्फ एक दिन का होगा, जबकि सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं होगा।
  • विधानसभा में विस उपाध्यक्ष रघुनाथ चौहान की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति एवं सर्वदलीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। दरअसल, सरकार ने विधानसभा सत्र 23 से 25 सितंबर के लिए बुलाया था।
  • लेकिन, राज्य में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देख अब 23 सितंबर को सिर्फ एक दिन ही सत्र आयोजित होगा। चौहान ने बताया कि सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं होगा।
  • इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे मदन कौशिक, नेता प्रतिपक्ष के प्रतिनिधि के तौर पर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, उपनेता-विपक्ष करन माहरा भी शामिल रहे।

दीर्घा और फंक्शन हॉल में भी बैठेंगे विधायक: 

विस उपाध्यक्ष ने बताया कि, विधायकों को 6 फीट की दूरी पर बिठाने की व्यवस्था की है। 31 विधायक सभा मंडप, 10 विधायक दर्शक और पत्रकार दीर्घा में बैठेंगे, जबकि 30 विधायकों के बैठने की व्यवस्था फंक्शन हॉल में होगी। कुछ विधायकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने पर अपनी सहमति दी है। 

विस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नहीं हो पाएंगे शामिल: 

उत्तराखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब विधानसभा सत्र के दौरान न तो विधानसभा अध्यक्ष मौजूद रहेंगे और न नेता प्रतिपक्ष। इसकी वजह है-विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का कोरोना पॉजिटिव होना। फिलहाल 11 विधायक सत्र की कार्यवाही में भाग नहीं ले पाएंगे। सत्र संचालन विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान करेंगे।

वर्चुअल जुड़ेंगे विधायक रामदास:

 भाजपा विधायक चंदन रामदास सत्र से वर्चुअल जुड़ेंगे। जबकि चार विधायकों ने विधानसभा सचिवालय से इस बारे में जानकारी मांगी है। मगर, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये विधायक वर्चुअल जुड़ेंगे या फिर सदन में शामिल होंगे। वर्चुअल जुड़ने के इच्छुक विधायकों को कोरोना जांच भी नहीं करानी होगी और वे बिना जांच, जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी केंद्र से विस सत्र में शामिल हो सकेंगे।

विपक्ष को कार्य स्थगन का भी अवसर मिलेगा

देहरादून। एक दिन के सत्र में कांग्रेस सदन में कार्य स्थगन के रूप में बेरोजगारी, महंगाई, कोरोना संक्रमण और कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाएगी। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से 10 विधेयक और 10 अध्यादेश सदन के पटल पर रखे जाएंगे और शून्यकाल के दौरान विपक्षी दल को कार्य स्थगन का मौका मिलेगा।

कांग्रेस ने उठाई सत्र अवधि बढ़ाने की मांग 

  • देहरादून। कांग्रेस ने सरकार से सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में शामिल होने विधानसभा पहुंचे गोविंद सिंह कुंजवाल और करन माहरा ने कहा कि सरकार ने पहले महज तीन दिन के लिए सत्र बुलाया और अब उसकी अवधि भी कम करके एक दिन कर दी।
  • एक दिन के सत्र में उत्तराखंड से जुड़े अहम मुद्दे कैसे उठाए जा सकेंगे। पत्रकारों से बातचीत में कुंजवाल ने कहा, कोरोना की वजह से हालात असामान्य जरूर हैं, मगर सरकार को सत्र की अवधि बढ़ानी चाहिए। माहरा बोले, सरकार ने समस्याओं से बचने को सत्र की अवधि घटाई।
  • कोरोना महामारी को देखते हुए एक दिनी सत्र का निर्णय लिया गया। इस दौरान प्रश्नकाल भी नहीं होगा। सहयोग के लिए हम कांग्रेस मित्रों का आभार जताते हैं। कोरोना के कारण हालात विपरीत होने की वजह से ही ऐसा निर्णय लेना पड़ा है।