समय व्यवस्थापन

समय व्यवस्थापन: यंत्र – भार की चरम सीमा, कार्य का वक्र, विश्राम काल एंव कार्य सरलीकरण

समय की संकल्पना

  • समय सभी व्यक्तियों के लिए एक समान है।
  • समय मात्रात्मक संसाधन है। (घण्टे/मिनट/सेंकंड)
  • समय गैर मानव संसाधन है। (ग्रास, क्रैंडल और नोल)
  • समय अमूर्त है।
  • समय भौतिक संसाधन है।
  • समय अर्थिक संसाधन है। (ज्यादातर मामलों में)
  • समय की निश्चित सीमाऐ हैं, जो उसकी उपलब्धता को सीमित करती है। (प्रतिदिन 24 घंटे)


समय व्यवस्थापनः लक्ष्य एवं उद्देश्य


लक्ष्यः
व कार्य को पूर्ण करने में लगने वाले समय को कम करना।

उद्देश्य:
समय का इस प्रकार उपयोग करना जिससे व्यक्तिगत एवं परिवारिक लक्ष्यों को अधिक से अधिक प्राप्त किया जा सके।
समय के उपयोग से सम्बन्धित योग्यता का विकास करना।


समय व्यवस्थापन के यंत्र


समय व्यवस्थापन के चार यंत्र है-

  • अत्यधिक भार (peak load)
  • कार्य का वक्र(work curve)
  • विश्रम काल (rest period)
  • कार्य सरलीकरण (work simplification)


समय व्यवस्थपन के यंत्र


भार की चरम सीमा (peak load)

  • जिस निश्चित समय (दिन, सप्ताह, माह, अथवा मौसम )में अत्यधिक कार्य होता हैं, वह निश्चित अवधि ही भार की चरम सीमा कहलाती है।
  • जैसे गृहणी के लिए सुबह गृह कार्यों के साथ बच्चों एवं पति को नाश्ता करवाकर स्कूल और ऑफिस भेजना होता है, इसी समय गृहणी पर कार्य का भार चरम सीमा पर होता है।


कार्य का वक्र (work curve)

  • कार्य का वक्र एक निर्धारित समय में कार्य का उत्पादन में परिवर्तन को दर्शाता है।
  • कार्य का वक्र भौतिक रूप में उद्योगों द्वारा उपयोग में लाया जाता है।
  • कार्यकत्र्ता द्वारा किये गए कार्य की इकाई की मात्रा दिये हुए समय में गिनी जाती है, जैसे – प्रति घंटे प्रेस की जाने वाली चादरों की संख्या।


विश्राम काल (rest period)

  • विश्राम काल का तात्पर्य कार्य के तनाव से कुछ समय के लिए मुक्ति पाना है लेकिन कार्य पूर्णतः बंद हो जाये इसका यह अर्थ बिल्कुल भी नहीं है।
  • विश्राम काल से कार्यकत्र्ता के स्वास्थ्य और उसकी कार्य क्षमताओं पर अनुकूल प्रभाव पड़ता हैं और साथ ही उत्पादनशीलता भी बढ़ती हैं।
  • विश्राम की अवधि और आवृत्ति कितनी हो और दिन में कितनी बार हो यह कार्यकत्र्ता की व्यक्तिगत स्थिति (शारीरिक क्षमता, कार्य का प्रकार – भारी या हल्का, मानसिक क्षमता आदि)पर निर्भर है।


कार्य सरलीकरण (work simplification)

  • कार्य को सरल तरीके से करने से समय और ऊर्जा दोंनों की ही बचत होती है।
  • समय व्यवस्थापन की प्रक्रिय

योजना – समय की योजना बनाते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए –

  • सबसे पहले महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनानी चाहिए।
  • उपयुक्त कार्य का क्रम निर्धारित करना चाहिए। कार्य को निर्धारित करते समय परिवार की आवश्यकताओं ,सदस्यों की रूचियों और कार्य करने की आदतों आदि का ध्यान रखना चाहिए।
  • कार्य के समय की योजना इस प्रकार बनाई जानी चाहिए ताकि गृहणी के समय की बचत हो सके।
  • कार्य के लिए पर्याप्त समय रखना चाहिए ताकि कार्य तनाव मुक्त होकर किया जा सके।
  • गृहणी के समय और कार्य की योजना इस प्रकार बनाई जानी चाहिए ताकि परिवार के अन्य सदस्यों का भी सहयोग उसे मिल सके।
  • गृहणी को अपने व्यक्तिगत मनोरंजन हेतु भी समय योजना में प्रावधान रखना चाहिए।
  • योजना पर्याप्त रूप से लोचमय (परिवर्तनशील) होनी चाहिए ताकि विशेष आकस्मिक परिस्थियों में योजना में समायोजन किया जा सकें।