Supreme Court : SC ने कानून के दो पहलुओं पर विरोधाभास

नई दिल्ली: आत्महत्या के प्रयास को लेकर कानूनों में विरोधाभास को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल हुई है. SC ने कानून के दो पहलुओं में विरोधाभास पर विचार करने पर सहमति जताई.

अदालत ने कहा कि IPC की धारा 309 आत्महत्या के प्रयास (Attempt to suicide) को अपराध घोषित करती है जबकि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 115 इसे अपराध के दायरे से बाहर करती है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और पूछा है कि कोई कानून IPC से ऊपर कैसे जा सकता है.

दरअसल आत्महत्या करने के प्रयास में एक व्यक्ति के चिड़ियाघर के बाड़े में कूदने के कारण हाथी पर किए गए अत्याचार से संबंधित याचिका में, सीजेआई बोबडे ने भारतीय दंड संहिता की धारा 309 और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 115 के बीच संघर्ष को नोट किया.

पशु अधिकार एक्टिविस्ट संगीता डोगरा ने हाथी की तस्वीर दिखाई जिस पर अत्याचार किया गया और बताया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोई बाड़े में कूद गया था.

CJI ने कहा कि कोर्ट लोगों को जानवरों के डेंस में कूदने से कैसे रोक सकता है? 

एक व्यक्ति द्वारा खुद को जानवर के बाड़े में कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास आईपीसी की धारा 309 के तहत दंडनीय अपराध है. हालांकि, हम पाते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 115 IPC की धारा 309 पर प्रतिकूल प्रभाव डालती  है.

एसजी तुषार मेहता ने बेंच को सूचित किया कि इस संबंध में एक याचिका न्यायालय के समक्ष लंबित है. CJI ने कहा संथारा का उद्देश्य आत्महत्या करना नहीं बल्कि यह खुद को इस दुखी दुनिया से मुक्त करते के लिए  है. 

CJI ने कहा कि हमें दिखाएं कि यह असंवैधानिक क्यों घोषित नहीं किया जाना चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में एमिक्स क्यूरी भी नियुक्त करना चाहता है.