मसाला

भोजन को सुवास बनाने, रंगने या संरक्षित करने के उद्देश्य से उसमें मिलाए जाने वाले सूखे बीज, फल, जड़, छाल, या सब्जियों को ‘मसाला (spice) कहते हैं। कभी-कभी मसाले का प्रयोग दूसरे फ्लेवर को छुपाने के लिए भी किया जाता है।

मसाले, जड़ी-बूटियों से अलग हैं। पत्तेदार हरे पौधों के विभिन्न भागों को जड़ी-बूटी (हर्ब) कहते हैं। इनका भी उपयोग फ्लेवर देने या अलंकृत करने (garnish) के लिए किया जाता है।

बहुत से मसालों में सूक्ष्मजीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है।

भारतीय मसाले देश और दुनिया सभी जगह अपनी खुशबू और रंग के लिए मशहूर हैं। भारतीय किचन की इन बेसिक जरूरत पर आप भी जीरा, इलायची, बड़ी इलायची, दालचीनी, हल्दी, मिर्च, धनिया जैसी मसाला व्यापार कर अपना कारोबार खड़ा खड़ा कर सकते हैं।

खारी बावली न केवल एशिया का सबसे बड़ा थोक मसाला बाजार बन गया है बल्कि इसे उत्तरी भारत का एक सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र भी माना जाता है। यहाँ पर व्यापारी और दुकानदार, मसालों (स्थानीय और विदेशी दोनों), सूखे मेवों और अन्य वस्तुओं को सबसे सस्ते दामों व अच्छे सौदे के रूप में खरीदने के लिए आ सकते हैं।

काली मिर्च है ‘ब्लैक गोल्ड’चौथी सदी के समय काली मिर्च को काफी अहम मसाला माना जाता था और पूरी दुनिया में यह बेहद लोकप्रिय था। ग्रीस के लोग इसे ‘ब्लैक गोल्ड’ कहा करते थे। उस समय तकरीबन एक साल में 120 पानी के जहाजों पर रोम से आए लोग काली मिर्च लादकर भारत से रोम ले जाते थे।

भारत से मसालों का निर्यातज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि पुर्तगाल पहला ऐसा देश था जिसने भारत की खोज की थी। ऐसा माना जाता है कि वास्को-डि-गामा 1492 में भारत आया था। वास्को-डि-गामा ने यहां से मसालों का निर्यात करना शुरू कर दिया। वह पानी की जहाजों पर मसाले लादकर पुर्तगाल ले जाता था लेकिन इसमें कई बार समुद्री लुटेरे बीच में ही मसाले लूट लेते थे। उस समय मसाले सोने से भी ज्यादा कीमती माने जाते थे।

सैलरी के रूप में नमकभारत में तकरीबन 5 हजार सालों से नमक का उत्पादन होता आ रहा है। स्पाइस रूट के दौरान रोमन सैनिकों को सैलरी के तौर पर ‘नमक’ दिया जाता था। इससे सैलरी जैसा टर्म इजात हुआ। एक कहावत ‘worth his salt’ भी यहीं से आया है।

अमेरिका भी भारत से मसाले मंगवाता था18वीं सदी के समय जब अमेरिका ने खुद को स्वतंत्र देश के तौर पर स्थापित कर लिया था उस समय से ही अमेरिका के नागरिकों ने भारत के किसानों से मसालों का आयात शुरू कर दिया। इस तरह से मसाले पश्चिमी सभ्यता का भी हिस्सा बन पाए।

मलेशिया और इंडोनेशिया में भी इंडियन मसालेमलेशिया और इंडिनेशिया के खाने का स्वाद काफी हद तक हमारे देश जैसा ही होता है। इसीलिए मसालों के व्यापार के दौरान कई भारतीय मसाला व्यापारियों ने इन देशों में जाकर इंडियन मसालों के बारे में लोगों को बताया। इसीलिए दक्षिणी-पूर्व एशियन देशों की डिशेज का स्वाद काफी हद तक एक जैसा ही होता है।

अरब के लोगों ने मसाले को अपनी खोज कह लोगों को गुमराह कियाछठी सदी ईसा पूर्व के समय जब अरबों ने केरल को अपने कंट्रोल में ले लिया था उस समय उन्होंने ज्यादातर मसालों के व्यापार को भी हथिया लिया। अरबों ने मसालों को अपने ही लोगों को बेचते समय हाई प्रॉफिट मार्जिन रखा। कुछ पुरानी कहानियों की मानें तो अरबों ने मसाले की खोज को लेकर अपने नागरिकों के बीच झूठी अफवाह फैलाई और कहा कि मसालों की खोज में उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा