SSC EXAMS: 1870 युवक-युवतियों की भर्ती के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक लिखित परीक्षाएं

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अलग-अलग सरकारी विभागों में छह पदों पर 1870 युवक-युवतियों की भर्ती के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक लिखित परीक्षाएं आयोजित करने जा रहा है।

  • कोरोना संक्रमण के खौफ को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखंड के दो लाख दस हजार अभ्यर्थी इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
  • अकेले दून के चार बड़े कॉलेजों डीएवी, डीबीएस, एमकेपी व श्री गुरु राम राय के 15 छजार छात्र-छात्राएं इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथि घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं।
  • इन रिक्तियों को भरने के लिए राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण की दस्तक से पहले इसी वर्ष फरवरी में विज्ञप्ति जारी की थी। लेकिन, लिखित परीक्षा की तिथि घोषित होने से पहले कोरोना ने दस्तक दे दी और लॉकडाउन लागू हो गया।
  • इसके बाद कोरोना संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ता रहा और परीक्षा की तिथि घोषित नहीं हो सकी।
  • अब आयोग इन लिखित परीक्षाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कराने पर विचार कर रहा है।

इन पदों पर चयन के लिए दो लाख, नौ हजार, दो सौ चौबीस अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। आयोग को अकेले डाटा एंट्री ऑपरेटर के लिए 1.19 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।

  • आयोग के सचिव संतोष बडोनी के अनुसार दिसंबर तक इन पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • आयोग पहले उन पदों पर परीक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, जिनमें रिक्तियां कम है।
  • इन परीक्षाओं के आयोजन से आयोग को कोरोनाकाल में परीक्षा कराने का अनुभव भी मिल जाएगा।
  • इसके बाद डाटा एंट्री आपरेटर जैसी बड़ी भर्तियों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • कोरोना संक्रमण के कारण एक परीक्षा के खर्च में पहले के मुकाबले 40 फीसद का इजाफा हुआ है।

कई परीक्षाएं हुई हैं कोरोनाकाल में

  • डीएवी पीजी कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष निखिल शर्मा का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बीच भी जेईई मेंस और एडवांस्ड के साथ पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा, श्रीदेव सुमन, गढ़वाल विवि की स्नातक व स्नातकोत्तर अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा, सीबीएसई व सीआइएससीई बोर्ड की कंपार्टमेंट परीक्षा का आयोजन हुआ है।
  • ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन भी होना चाहिए। केवल कोरोना संक्रमण से बचने के उपायों का कड़ाई से पालन करना होगा।
  • दून विवि के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष और रिसर्च स्कॉलर सत्येंद्र चौहान ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन को सही ठहराया है।