स्कूलों के शिक्षक-कार्मिकों के वेतन में रोड़ा बन रहे लापरवाह शिक्षा अधिकारियों का भी वेतन रोका जाएगा

बीते चार माह से अशासकीय स्कूलों के शिक्षक-कार्मिकों के वेतन में रोड़ा बन रहे लापरवाह शिक्षा अधिकारियों का भी वेतन रोका जाएगा। अशासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और खाली पदों का ब्योरा न देने के कारण ही इन स्कूलों के करीब तीन हजार शिक्षक-कार्मिकों का वेतन लटका है।

मंगलवार को शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने सभी सीईओ को कड़ा पत्र जारी करते हुए तत्काल रिपोर्ट देने को कहा है। ऐसा न करने वाले सीईओ का इस महीने का वेतन रोक दिया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की जाएगी।

मालूम हो कि, पिछली सरकार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में अशासकीय स्कूलों को वित्तीय मान्यता दी गई थी। उस दौरान इन स्कूलों के लिए पद मंजूर किए गए थे। पर, विभाग के पास इन पदों का पूरा ब्योरा नहीं है। इस बार शासन से अशासकीय स्कूलों के वेतन को बजट मांगा गया तो वित्त विभाग ने इन पदों की स्थिति रिपोर्ट मांग ली।

पिछले दो महीने से विभाग जिलों से 85 स्कूलों में कार्यरत शिक्षक, रिक्त पदों का ब्योरा मांग रहा है, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं मिली। दो बार वित्त विभाग वेतन बजट की फाइल को लौटा चुका है। 


शिक्षक-कर्मचारी नाराज
वेतन न मिलने से परेशान शिक्षक एवं कर्मचारी आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं। बुधवार से अशासकीय स्कूल शिक्षक देहरादून में सीईओ कार्यालय पर धरना शुरू कर रहे हैं। 25 सितंबर से कर्मचारियों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है।


अशासकीय स्कूलों की समस्याओं को सरकार और विभाग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। शिक्षक और कर्मचारियों को जल्द से जल्द वेतन जारी किया जाए। राजकीय के समान अशासकीय स्कूलों के शिक्षक-कार्मिकों के लिए प्रतिमाह वेतन देने की व्यवस्था की जाए। 

जगमोहन सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री, माध्यमिक शिक्षक संघ

तकनीकी वजह से वेतन जारी होने में समस्या आ रही है। मैंने शासन में सक्षम स्तर पर इस मुद्दे पर बातचीत की है। शिक्षक आश्वस्त रहें। उनका वेतन जल्द से जल्द जारी कराया जाएगा।