Round of peace talks: शुरू होने जा रहा है अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच

  • अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच अंतत: शांतिवार्ता का दौर शनिवार से कतर की राजधानी दोहा में शुरू होने जा रहा है।
  • 19 साल से हिंसाग्रस्त देश के भीतर शांति की उम्मीद के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इसे देश में रक्तपात खत्म करने का ऐतिहासिक मौका बताते हुए आशंका जताई कि यह अंतर-अफगान वार्ता के विवादास्पद भी हो सकती है।

हालांकि पोम्पियो ने वार्ता में शामिल होने के लिए कतर के रास्ते में संवाददाताओं से यह भी कहा कि दशकों से चले आ रहे संघर्ष के खात्मे के लिए बातचीत ही एकमात्र विकल्प है और इसे किसी भी सूरत में नहीं गंवाना चाहिए।

इससे पूर्व अमेरिका-तालिबान के बीच 29 फरवरी को एक शांति समझौते पर दस्तखत हो चुके हैं। इसके तहत तालिबान को जहां देश के भीतर हिंसा में कमी लानी है वहीं अमेरिका को अफगानिस्तान में तैनात सैनिकों की संख्या चरणबद्ध तरीके से कम करनी है।

उन्होंने शनिवार से शुरू हो रही वार्ता के विवादास्पद रहने की आशंका इसलिए जताई क्योंकि यह उनका ही देश है और उन्हें ही तय करना है कि बातचीत आगे कैसे बढ़ाई जाए।

जबकि सच्चाई यह है कि तालिबानियों की रिहाई के बावजूद स्थानीय स्तर पर कुछ मुद्दों पर अफगान सरकार और तालिबान के बीच सहमति नहीं है।

अफगानिस्तान में घटाएंगे अमेरिकी सैनिक :

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता को रोमांचक बताते हुए कहा है कि वाशिंगटन अफगानिस्तान में मौजूद अपने सैनिकों की संख्या को नवंबर तक 4000 के स्तर पर ले आएगा।

भले ही अंतर अफगान वार्ता देर से शुरू हो रही है, लेकिन 29 फरवरी को हुए समझौते के बाद ही अमेरिका ने सैनिकों की संख्या में कमी लाना शुरू कर दिया है। समझौते से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका के करीब 13,000 सैनिक थे।