राष्ट्रपति ने मोदी के कदम को सहराया तो विरोधियों के तोते उठे

RBL Nigamआर.बी.एल.निगम, दिल्ली ब्यूरो चीफ

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नवम्बर 8  मध्यरात्रि से पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को साहसिक कदम बताकर इसका स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि मोदी ने आज शाम उन्हें फोन किया और सरकार के इस फैसले की घोषणा के बारे में बताया कि पांच सौ और एक हजार रूपये के सभी नोट आज रात मध्यरात्रि से नहीं चलेंगे।

राष्ट्रपति भवन ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति मुखर्जी ने सरकार द्वारा उठाए गए साहसिक कदम का स्वागत किया जो काले धन और जाली नोट को खोज निकालने में मदद करेगा।

मुखर्जी ने लोगों से नहीं हड़बड़ाने और उनके पास मौजूद पांच सौ और एक हजार रूपये के नोटों को बदलने में सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए कहा।

उन्होंने याद दिलाया कि पांच सौ रूपये से कम के सभी नोट पहले की तरह की चलेंगे।

विरोधियों  ने किया उपहास

कांग्रेस  ने मंगलवार रात पांच सौ और एक हजार रूपये के नोटों का चलन बंद करने के सरकार के ‘अचानक’ किये गये फैसले पर कई सवाल खड़े किये और चिंता जताई कि यह कारोबारियों, छोटे व्यापारियों और गृहणियों के लिए बहुत समस्याएं पैदा करेगा।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने हालांकि स्पष्ट किया कि पार्टी हमेशा काले धन के मुद्दे पर ‘अर्थपूर्ण, स्पष्ट और सटीक’ कदमों का समर्थन करेगी।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री विदेश में जमा 80 लाख करोड़ रूपये काला धन लाने में उनकी ‘नाकामी’ को ढकने के लिए ही इस योजना को लाए हैं।

उधर, कोलकाता से मिली खबर के अनुसार, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस और माकपा ने कहा कि इस फैसले का मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर होगा।

माकपा पोलितब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम ने कहा कि हम हमेशा काले धन के मुद्दे के समर्थन में हैं। लेकिन इस मुद्दे पर ढाई साल की चुप्पी के बाद केन्द्र ने अचानक पांच सौ और एक हजार रूपये के नोट हटाने का अचानक फैसला किया। यह बेहूदा है। यह फैसला छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग पर बड़ा असर डालेगा।

बंगाल  की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  ने मंगलवार को पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को हटाने के केन्द्र के फैसले को ‘निर्मम एवं बिना सोच समझकर’ किया गया फैसला बताया जिससे ‘वित्तीय दिक्कतें’ होंगी।

ममता ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। ममता ने मोदी सरकार पर ‘विदेश से काला धन वापस लाने में नाकामी से ध्यान हटाने के लिए नाटक करने’ का आरोप लगाया।

उन्होंने कई ट्वीट करके कहा कि इस कठोर फैसले को वापस लिया जाए। मैं कालेधन, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त हूं, लेकिन आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों के बारे में गहराई से चितिंत हूं। वे कल सामान कैसे खरीदेंगे? यह वित्तीय अव्यवस्था और आपदा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अमीरों से विदेश में जमा कालाधन वसूलने का वादा नहीं पूरा कर पाए इसलिए इस नाकामी से ध्यान हटाने के लिए नाटक किया गया।