प्रभावशाली योजनाओं को प्राथमिकता दी जाय : मुख्यमंत्री हरीश रावत

cm-photo-11-dtदेहरादून। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में आईएएस वीक के अपराह्न सत्र को सम्बोधित करते हुए योजना एवं आयोजनागत मदों में व्यय की प्राथमिकतायें निर्धारित करने पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि इस संम्बध में उत्पादकता के पक्ष को भी ध्यान में रखना होगा। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि, बागवानी आदि के क्षेत्र में समेकित प्रयासों की जरूरत बताते हुए उन्होंने इस दिशा में प्रभावी पहल की भी अपेक्षा की।

उन्होंने कहा कि राज्य के सर्वागींण विकास में जिलाधिकारियों की अहम भूमिका होती है, इसलिये जिलाधिकारियों को महत्व दिया जाना जरूरी है। उनके सुझावों पर अमल होना चाहिए, उनका आत्मबल बढ़ाने के लिये जिलाधिकारियों से शासन के उच्चाधिकारियों को निरन्तर समन्वय बनाये रखना चाहिए। जिलाधिकारियों को और अधिक अधिकार दिये जाने पर उन्हांेने बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्यहित में यह जरूरी है कि कम व्यय की अधिक प्रभावशाली योजनाओं को प्राथमिकता दी जाय। बड़े भवनों के निर्माण के बजाय राज्य की आवश्यकता के अनुरूप छोटे भवनों के निर्माण पर ध्यान दिया जाय। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी खेती के प्रति भी जागरूक हो, इसके लिये विद्यालयों में कृषि की शिक्षा पर भी ध्यान देना होगा, यह भी प्रयास हो कि छात्रों को उनकी दक्षता के अनुसार इण्टर के बाद से ही तकनीकि शिक्षा उपलब्ध करायी जाय।

उन्होंने कहा कि विभिन्न अधिकारियों द्वारा अपने विचार विमर्श में जो भी आइडिया दिये गये है, उनका एप्रोच पेपर तैयार किया जाय। आम आदमी की समस्याओं के समाधान में ह्यूमन टच की भी उन्होंने जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि महिलाओं व बच्चों में आयरन की कमी को दूर करने के लिये एक जिले को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लोहे की कड़ाई, पालक पाउडर व काले भट्ट वितरण की योजना प्रारम्भ की जायेगी, इसके लिये धनराशि भी उपलब्ध करायी जायेगी। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी, ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, डा.मनीषा पंवार, सचिव आनंदवर्धन सहित अन्य आईएएस अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में पश्चात पत्रकारों से अनौपचारिक वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य को विकास की राह पर ले जाने के लिये बजट की कोई कमी नहीं है। हमारा आय व्ययक आरबीआई व राष्ट्रीय मानको के अनुसार सही दिशा में है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के दौरान हमारी जीडीपी दर 0.035 प्रतिशत थी, जो आज 1.73 प्रतिशत है, इससे स्पष्ट है कि विभिन्न क्षेत्रों में हमारी हिस्सेदारी 10 गुना बढ़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग आदि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि कर्ज धारिता का बढ़ना राज्य के विकास का द्योतक है। हमारा प्रयास वहां ज्यादा खर्च करने का है, जहां रोजगार व आमदनी बढ़ने की संम्भावना है।