फसल बीमा योजना के तहत 80 फीसदी भुगतान नहीं हुआ देरी के चलते किसानों को चुकाना पड़ा खामियाजा

रबी सीज़न के लिए फसल बीमा योजना के तहत कुल 3,750 करोड़ रुपये के दावे कृषि मंत्रालय से आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ 2019-20 में किए गए थे, जिसमें समय सीमा बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 775 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है.

कृषि जगत को कोरोना महामारी के चलते भारी खामियाजा चुकाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को फसल बीमा योजना के कुल 20 फीसदी राशि का भुगतान किया गया है.

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि 17 अगस्त तक किसानों को इसमें से सिर्फ 775 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है.

करीब डेढ़ महीने से ज्यादा का समय हो चुका है बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को दावा भुगतान करने की समयसीमा को खत्म हुए.

पिछले कई सालों से किसान, खासकर छोटे एवं सीमांत किसान कह रहे हैं कि दावा भुगतान में देरी के कारण अगले सीजन की बुवाई काफी प्रभावित होती है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते 15 मई को तथाकथित ’20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज’ की तीसरी किस्त की घोषणा करते हुए दावा किया था कि पिछले दो महीनों में 6,400 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का भुगतान किया गया है.

हालांकि सीतारमण ने अपने आंकड़ों में ये स्पष्ट नहीं किया कि जिन भुगतान की वो बात कर रही हैं वे रबी 2019-20 सीजन के हैं या इस योजना के तहत पिछले बकायों का भुगतान.

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, केंद्र के इन दो फसल बीमा योजनाओं के तहत रबी 2019-20 सीजन में कुल 1.8 किसानों का बीमा किया गया था और कुल बीमित राशि 70,000 करोड़ रुपये थी.

इस दौरान बीमा कंपनियों ने कुल 7,764 करोड़ रुपये का बीमा वसूला, जिसमें से 1,317 करोड़ रुपये यानी 17 फीसदी बीमा राशि का भुगतान किसानों ने किया. बाकी राशि को केंद्र एवं राज्य सरकारों ने करीब 50:50 फीसदी के अनुपात में अदा किया.

केंद्र की बहुप्रचारित और महत्वाकांक्षी पीएमएफबीवाई के तहत देश के अधिकतर भू-भाग पर किसानों का फसल बीमा किया जाता है.

रबी 2019-20 के दौरान देश भर में कुल बीमित राशि में 93 फीसदी हिस्सा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का था. परिणामस्वरूप, कुल बीमा दावों में 83 फीसदी हिस्सेदारी इस योजना की थी.

पीएमएफबीवाई की गाइडलाइन के मुताबिक किसी सीजन की अंतिम कटाई पूरी हो जाने के दो महीने के भीतर दावों का निपटारा कर दिया जाना चाहिए.

नियम के मुताबिक यदि बीमा कंपनियां इस समयसीमा के भीतर किसानों को भुगतान नहीं करती हैं, तो उन्हें 12 फीसदी की दर से ब्याज भरना होगा.

हालांकि पिछले कुछ सालों में ये देखने में आया है कि इस नियम का पालन नहीं हो रहा है और आमतौर पर काफी देरी से ही किसानों को उनके दावों का भुगतान किया गया है.

रबी 2019-20 सीजन में फसलों की कटाई अप्रैल-मई 2020 तक समाप्त हो जाती है. इसका मतलब है कि बीमा कंपनियों को जून-जुलाई 2020 तक दावों का भुगतान कर देना चाहिए था.

हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 17 अगस्त तक पीएमएफबीवाई के तहत इस सीजन में कुल प्राप्त दावों का करीब 75 फीसदी यानी 2,371 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया गया है.

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि ‘दावों की गणना और उसके भुगतान का लेखा-जोखा तैयार करने की प्रक्रिया अभी अपने प्रारंभिक दौर में है और ये आंकड़े 17 अगस्त 2020 तक बीमा कंपनियों द्वारा भारत सरकार को दी गई जानकारी पर आधारित हैं.’

मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर द वायर को बताया कि कोरोना महामारी के कारण इस बार फसल कटाई प्रयोगों (क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट या सीसीई) कराने में काफी देरी हुई है. फसलों की क्षति का आकलन करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा सीसीई कराया जाता है.

अधिकारी ने कहा, ‘देश भर में विभिन्न जगहों पर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके कारण सीसीई कराने में मुश्किल हो रही है. इसी कारण से देर हुई है.’

इस बार जो देरी हुई है वो आमतौर पर राज्य सरकारों द्वारा की जाने वाली देरी के अतिरिक्त है, जहां केंद्र एवं बीमा कंपनियों ने कई बार आरोप लगाया है कि राज्य सरकारें प्रीमियम भुगतान तथा सीसीई डेटा देने में देरी करती हैं.

अधिकारी ने कहा, कुछ राज्यों ने अपने सिस्टम में सुधार नहीं किया है.’तीन साल बीत जाने के बाद भी ‘फसल बीमा योजना के साथ ये समस्या लंबे समय से बनी हुई है.

पिछले साल केंद्र सरकार ने इस मांग को स्वीकार किया और योजना में कई बदलाव करते हुए बीमा कराने की प्रक्रिया को स्वैच्छिक बनाया.