राज्य की दशा बदलने के लिए एक बार फिर नयी दिशा की जरूरत : लाखीराम जोशी

उत्तराखंड राज्य की पहली मांग 1897 में उठी थी । 1994 के बाद एक अलग राज्य की मांग ने जन आंदोलन का रूप ले लिया था। उत्तराखंड आंदोलन तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के उत्तराखंड विरोधी बयान से क्षेत्र में और तेज हो गया, जिसके परिणामस्वरूप 2000 तक भारत का 27 वां राज्य बन गया।

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड पूर्व सैनिक अर्ध सैनिक संयुक्त संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी आयोजित की गयी । इस अवसर पर श्री लाखी राम जोशी (पूर्व मंत्री), श्री सुरेंद्र पांगती (पूर्व कमिशनर गढ़वाल ), श्रीमती रंजना रावत , ब्रिगेडियर विनोद पासबोला, श्री प्रकाश थपलियाल और श्री रघुबीर बिष्ट मौजूद रहे ।

लाखीराम जोशी ने कहा, उत्तराखंड आज 20  साल का एक युवा है, जहाँ पलायन और विकास मुख्य समस्या है। 2000 गाऊँ भूतिया हो गए हैं और लगभग 1 लाख हेक्टेयर ज़मीन बंजर हो गयी है । जो आंकड़े हमारे सामने हैं ये उत्तराखंड के स्थपना विचार के  विपरीत है । उत्तराखंड बनाने का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी विकास तथा वोकल फॉर लोकल (vocal for local) था ।

आज पहाड़ की स्थिति विचार करने योग्य है । हेल्थ , इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, एजुकेशन,रूरल इकॉनमी ज्यों की त्यों है । रूरल इकॉनमी के ऊपर बात करते हुए उन्होंने कहा की हमने एक बहुत सुनहरा मौका गंवाया है ।  कोरोना काल में जो प्रतिभावान लोग वापस अपने गांव आये थे, वो पहाड़ की दयनीय स्थिति तथा अवसर न मिलने के कारण वापस चले गए हैं ।

एक अंश को याद करते हुए उन्होंने कहा ” 8 जिलों के उत्तराँचल को  पूर्ण स्वरुप  देने के  लिए अटल जी के अध्यक्षता में लिए विधायकों की एक बैठक बुलाई गयी। कुछ विधायक ‘वृहद उत्तराँचल’ का प्रस्ताव ले कर गए थे जिसमे मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, पीलीभीत ,बिजनौर , रामपुर और हरिद्वार को मिला कर वृहद उत्तराँचल बनाने की मांग रखी गयी। इस बात का हमने पूरा विरोध किया, यह बात अटल जी के भी समझ में नहीं आयी और बैठक स्थगित हो गयी। 

आखरी फैसला अब ठाकरे जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष) को लेना था | उन्होंने वृहद उत्तराँचल की मांग कर रहे विधायक को कहा : ‘अगर तुम रामपुर और पीलीभीत की बात कर रहे हो तो क्या लखनऊ ख़राब है ?’  “

इस प्रकरण के बाद लखिराम जोशी ने इस्तीफा दे दिया और एक जन आंदोलन के तहत 17 और विधायकों ने इस्तीफा दे दिया |  इस पर कल्याण सिंह (तत्कालीन मुख्यमंत्री) और राजनाथ सिंह (प्रदेश अध्यक्ष) ने उत्तराँचल बनाने का आश्वासन दिया, सभी विधायकों के इस्तीफे वापस लिए और 15 दिन के अंदर एक विशेष सत्र बुलाकर उत्तराँचल राज्य बनाने की मांग को पूरा किया गया |