पोषण जन आंदोलन और भागीदारी

राष्ट्रीय पोषण माह

पोषण अभियान कार्यक्रम न होकर एक जन आंदोलन और भागीदारी है। इस कार्यक्रम की सफलता में जहां जन-जन का सहयोग आवश्यक है वहीं स्थानीय नेताओं, पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों, सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, तमाम सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की समावेशी भागीदारी भी अपेक्षित है। इस भागीदारी को निभाने का एक खूबसूरत अवसर राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में सबको प्राप्त हुआ है।  इस माह में हर व्यक्ति, संस्थान और प्रतिनिधि से यह आशा की जा रही है कि वे अपनी ज़िम्मेदारी भारत को कुपोषण मुक्त बनाने में निभायेंगे।

आप हर घर में पोषण का त्योहार मनाइये। आप हर बच्चे, किशोर-किशोरी, गर्भवती एवं धात्री महिला को निर्धारित पोषण सेवा दिलवाइये। आपका गांव तभी कुपोषण मुक्त होगा जब आप चाहेंगे।

पोषण अभियान किस लिये देश में नाटेपन, अल्पपोषण, खून की कमी (अनीमिया) तथा जन्म के वक्त कम वज़न वाले शिशुओं की संख्या में कमी लाने के लिये विभिन्न मंत्रालय और विभाग विगत वर्षों से सक्रिय हैं। इस दिशा में अपेक्षित परिणाम हासिल होना अभी शेष है। पोषण अभियान टेक्नोलोजी की मदद से जन-जन के बेहतर आहार और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लायेगा। इस योजना में विभिन्न मंत्रालय एवं विभाग तालमेल बैठाते हुए अपना भरपूर सहयोग प्रदान करेंगे। इस अभियान को सफल बनाने के लिये पंचायत स्तर तक एक मजबूत साझेदारी की आवश्यकता है। इस दिशा में पंचायत प्रतिनिधि अपनी अहम भूमिका निभायें तथा कुपोषण को दूर करते हुए एक मज़बूत देश की नींव रखें।

पोषण अभियान किन के लिये है

  • गर्भवती महिलाएं
  • धात्री महिलाएं तथा नवजात शिशु
  • किशोरियां
  • बच्चे

पंचायत प्रतिनिधि की भूमिका

पंचायत प्रतिनिधि, एक जनप्रतिनिधि के नाते, निम्न लाभार्थियों को सही पोषण और सकारात्मक व्यवहारों को अपनाने के लिये प्रोत्साहित करें।

गर्भवती महिलाएं

  • रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पोषक आहार लें।
  • पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें ।
  • आई.एफ.ए. की एक लाल गोली रोज़ाना, चौथे महीने से 180 दिन तक लें।
  • कैल्शियम की निर्धारित खुराक लें।
  • एक एल्बेण्डाजोल की गोली दूसरी तिमाही में लें ।
  • ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पीयें।
  • प्रसव से पहले कम से कम चार ए.एन.सी. जांच ए.एन.एम. दीदी या डॉक्टर से ज़रूर करवायें।
  • नज़दीकी अस्पताल या चिकित्सा केन्द्र पर ही अपना प्रसव करायें।
  • व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
  • शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
  • हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें।

धात्री महिलाएं

  • रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पोषक आहार लें।
  • पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें।
  • प्रसव से लेकर 6 महीने तक (180 दिन) रोज़ाना आई.एफ.ए. की एक लाल गोली लें।
  • कैल्शियम की निर्धारित खुराक लें ।
  • ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पीयें।
  • नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू करायें तथा शिशु को अपना पहला पीला गाढ़ा दूध पिलायें। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे का पहला टीका होता है।
  • शिशु को शुरुआती 6 महीने सिर्फ अपना दूध ही पिलायें और ऊपर से कुछ न दें।
  • व्यक्तिगत और अपने बच्चे की स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • खाना बनाने तथा खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
  • बच्चे का शौच निपटाने के बाद और अपने शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
  • बच्चे का शौच निपटान और अपने शौच के लिए हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें।

बच्चे

  • महीने पूरे होने पर मां के दूध के साथ ऊपरी आहार शुरू करें।
  • रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पोषक आहार दें।
  • मसला हुआ और गाढ़ा पौष्टिक ऊपरी आहार दें।
  • पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें।
  • आई.एफ.ए. और विटामिन-ए की निर्धारित खुराक दिलवायें।
  • पेट के कीड़ों से बचने के लिये 12 से 24 महीने के बच्चे को एल्बेण्डाज़ोल की आधी गोली तथा 24 से 59 महीने के बच्चे को एक गोली साल में दो बार आंगनवाड़ी केन्द्र पर दिलवायें ।
  • आंगनवाड़ी केन्द्र पर नियमित रूप से लेकर जायें तथा उसका वज़न अवश्य करवायें।
  • बौद्धिक विकास के लिये पौष्टिक आहार उसकी उम्र के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, ए.एन.एम. या डॉक्टर द्वारा बतायी गयी मात्रा के अनुसार दें।
  • 5 साल की उम्र तक सूची अनुसार सभी टीके नियमित रूप से ज़रूर लगवायें।
  • व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वच्छता की आदत डलवायें।
  • ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पिलायें।
  • खाना खाने और खिलाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
  • शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
  • उम्र अनुसार बच्चे के साथ खेलें एवं बातचीत करें।
  • बच्चे के शौच का निपटान हमेशा शौचालय में करें।

किशोरियां

  • किशोरियों को रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पौष्टिक आहार ज़रूर खिलायें जिससे माहवारी के दौरान रक्त स्राव से होने वाली आयरन की कमी पूरी कर उसका संपूर्ण विकास हो।
  • पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें।
  • आई.एफ.ए. की एक नीली गोली हफ्ते में एक बार लें।
  • व्यक्तिगत साफ-सफाई और माहवारी स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • पेट के कीड़ों से बचने के लिये एल्बेण्डाजोल की एक गोली साल में दो बार लें।
  • ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पीयें।
  • खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
  • शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
  • हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें।

इस दिशा में जिम्मेदारी

पंचायत प्रतिनिधि

  • गांव स्तर पर लोगों को सही पोषण के बारे में जागरूक करें।
  • सुनिश्चित करें कि गांव की हर लड़की का विवाह 18 वर्ष की आयु से कम में न हो।
  • सुनिश्चित करें कि गांव की हर गर्भवती महिला का प्रसव अस्पताल या चिकित्सा केन्द्र पर हो।
  • सुनिश्चित करें कि गांव का कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न करे तथा गांव का प्रत्येक व्यक्ति शौच के लिये शौचालय का इस्तेमाल करे ।
  • गांव के लोगों को घरों में पेड़ और साग-सब्ज़ियां लगाने के लिये प्रोत्साहित करें ताकि परिवार को हरी साग-सब्जियां मिल सकें।
  • सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें।
  • ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की बैठक का नियमित आयोजन करें।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

  • देखभालकर्ता को समुचित पोषण संबंधी परामर्श नियमित रूप से देती रहें।
  • बच्चों का नियमित और पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।
  • बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास की निगरानी करें।
  • गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की निगरानी हेतु नियमित गृह भ्रमण करें।
  • बच्चों का नियमित रूप से वज़न करें तथा एम.सी.पी. कार्ड में दर्ज करें। लाल घेरे में होते ही निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर रेफर करें।

आशा कार्यकर्ता

  • गर्भवती महिला को संस्थान में प्रसव कराने के लिये प्रोत्साहित करें तथा ए.एन.सी. जांच सुनिश्चित करें।
  • नवजात शिशु की देखभाल और धात्री महिला की निगरानी हेतु 8-9 बार गृह भ्रमण करें।
  • अतिकुपोषित बच्चों और कम वजन के बच्चों की निगरानी हेतु हर महीने गृह भ्रमण करें।
  • बच्चों का नियमित और पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।

स्कूल प्रबंधन समिति

  • किशोर–किशोरियों को अनीमिया से बचाव के प्रति सचेत करें।
  • बच्चों को साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरूक और जवाबदेह बनायें।

सामुदायिक रेडियो स्टेशन

  • पोषण के विभिन्न पहलुओं से संबंधित कार्यक्रमों को तैयार कर उसे प्रसारित करें।
  • साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरुकता फैलायें।
  • कृषि से उपलब्ध स्थानीय पोषक आहारों के बारे में जागरुकता फैलायें।
  • खाना बनाने की स्थानीय विधि, भोजन की कैलोरी में वृद्धि तथा पौष्टिक आहार पर कार्यक्रम आयोजित करें।