Navratri 2020: मां दुर्गा को शक्ति की देवी नौ स्वरूपों में पूजी जाती है

शक्ति का यह महापर्व 25 अक्टूबर तक चलेगा। इन 9 दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। शैलपुत्री, ब्रम्हचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री रुपों की आराधना कर मां को खुश करने का प्रयास किया जाता है।

  •  नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित है. नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है.
  • मान्यता है कि नवरात्रि के पर्व में मां दुर्गा पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करती है.
  • मां दुर्गा को शक्ति की देवी कहा गया है.
  • नवरात्रि में मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है.
  • ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के पर्व में मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों का जाप करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. नवरात्रि के दिनों में इन मंत्रों का जाप करने मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं.

रोग से बचने के लिए मंत्र

  • मां दुर्गा का यह मंत्र रोग से दूर रखने में मदद करता है वहीं सौभाग्य भी प्रदान करता है.
  • पूजा के दौरान इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए.

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् ।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

धन की कमी को दूर करने वाला मंत्र

  • मां दुर्गा का यह मंत्र धन संबंधी दिक्कतों को दूर करने में मदद करता है.
  • इस मंत्र का जाप नित्य करने से कर्ज आदि से छुटकार मिलता है.

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाअद्र्रचित्ता॥

मनपंसद जीवन साथी के लिए

  • इस मंत्र का जाप करने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है.

पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥
सब प्रकार के कल्याण के लिए
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

धन प्राप्ति के लिए मंत्र

  • जीवन में यदि धन की कमी बनी हुई है तो इस मंत्र का जाप करना चाहिए.

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:॥

संकट दूर करने का मंत्र

  • जिन लोगों के जीवन में लगातार समस्याएं बनी हुई हैं उन्हें इस मंत्र का जाप करना चाहिए.

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।।