CBI के चंगुल में तीस्ता का मददगार अफसर

 छिपा ली थीं विदेशी फंडिंग की फाइल

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigamसीबीआइ ने भ्रष्टाचार मामले में गृह मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी आनंद जोशी को मई 15 को हिरासत में ले लिया। जांच एजेंसी ने उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया था, जिसके बाद से वह घर पर एक चिट्ठी छोड़कर कहीं चले गए थे। मई 15 को उनके लोकेशन को ट्रेस कर लिया गया।

आनंद जोशी गुजरात की गुलबर्ग सोसायटी में म्यूजियम बनाने के नाम पर इकट्ठा की गई राशि में कथित हेराफेरी मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के साथ जांच के दायरे में हैं। आनंद जोशी के खिलाफ मंत्रालय से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों को गायब करने का आरोप है। मई 11 को उन्हें सीबीआई के सवालों का सामना करना था। लेकिन वो घर से गायब हो गए।

तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सबरंग के विदेशी चंदों से जुड़ी फाइलों को गायब करने का इल्जाम 

अंडर सेक्रेट्री आनंद जोशी ने घर छोड़ने से पहले एक चिठ्ठी अपने कमरे में छोड़ी। पत्नी का कहना है कि चिट्ठी बेड पर पड़ी थी और घर का दरवाजा खुला था। आनंद ने चिठ्ठी में लिखा, ‘पिछले कुछ महीनों से मैं बहुत ही ज्यादा मेंटल हैरासमेंट से गुजर रहा हूं। लेकिन अब तो शायद पानी सर से गुजर गया है। मुझे बहुत-बहुत शांति की जरूरत है जो शायद यहां संभव नहीं। मैं घर छोड़कर जा रहा हूं। मुझे ढूंढने की कोशिश न करना।’

इन पर NGO चलाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ के NGO सबरंग से जुड़ी फाइलों को छुपाने का आरोप है. सबरंग ट्रस्ट की इन फाइलों में विदेशों से मिलने वाले फंड का मामला था.

यह मुद्दा उस वक्त सामने आया जब तीस्ता सीतलवाड़ के दो संगठनों के खिलाफ कथित एफसीआरए उल्लंघन से जुड़ी फाइलें गृह मंत्रालय से गुम हो गईं. ये फाइलें खोज ली गईं और एफसीआरए प्रखंड में रख दी गईं, लेकिन सीबीआई से मामले की जांच करने को कहा गया.

सूत्रों ने बताया कि तीस्ता के एक एनजीओ सबरंग ट्रस्ट की फाइलें उस वक्त गुम हो गईं जब गृह मंत्रालय ने उसका पंजीकरण रद्द करने का फैसला किया. गृह मंत्रालय ने 09 सितंबर 2015 को सबरंग ट्रस्ट का लाइसेंस निलंबित कर दिया था और फर्म से जवाब मांगा था.

गृहमंत्रालय के अवर सचिव आनंद जोशी पर आरोप है कि उसने एफसीआरए के तहत पंजीकृत कई गैर सरकारी संगठनों को कथित रूप से मनमाने ढंग से नोटिस जारी किया था. गैर सरकारी संगठन विदेशों से चंदा ले रहे थे.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आरोपी ने उनमें से कुछ गैर सरकारी संगठनों से अचल संपत्तियों और कुछ निजी कंपनियों की मार्फत कथित रूप से रिश्वत ली थी. आरोपित अधिकारी के चार परिसरों में छापेमारी की गई.

आनंद जोशी पर कुछ एनजीओ को फायदा पहुंचाने के लिए फाइलों में हेराफेरी और अपने पद के दुरुपयोग का आरोप है. सीबीआई ने प्राथमिक जांच के लिए सूचना दर्ज कर ली है.

जोशी पर आरोप है कि जो एनजीओ एफसीआरए की मंजूरी चाहती हैं उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए फाइलों में हेराफेरी करने का भी उस पर आरोप है. इसके अलावा वो विदेशी चंदा नियमन कानून यानी एफसीआरए के मामलों से मिली जानकारियों का इस्तेमाल एनजीओ को ब्लैकमेल करने में करता था.

मंत्रालय के फॉरनर्स डिवीजन में तैनात इस अफसर के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश गृह मंत्रालय ने दिए हैं. उसके घर और दफ्तर पर सीबीआई ने छापे मारे.

ऐसे न जाने कितने जोशी केवल गृह मंत्रालय ही नहीं दूसरे मंत्रालयों में छुपकर बैठे होंगे। यदि सरकार गम्भीरता से समस्त एनजीओस की जाँच करे, न जाने कितने एनजीओ के दफ्तर बंद हो जाएंगे। छोटे-छोटे कमरों में इनके दफ्तर खुले हुए हैं। एक को सहायता कर दस के नाम पर वसूली होती है। कुछ एनजीओस तो गरीब बच्चों को पाठ्यकर्म की पुस्तकें वितरित करने के नाम पर ही चांदी काट रहे हैं।


अवलोकन करें :-

→ एन.जी.ओ का मतलब ही भ्रष्टाचार है…!

→अन्ना के प्रायोजित आंदोलन