खुला एक राज जिसे सुनकर कांग्रेस के हाथों तोते उड़ गए

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigamरक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अप्रैल 4 को देश के सामने ऐसा राज खोला जिसके बारे में लोग अनजान थे और जिसे सुनकर पूर्व कांग्रेस पार्टी की मुसीबत बढ़ गयी है शायद इसीलिए कांग्रेस पार्टी रक्षा मंत्री की बात सुनकर आपा खो बैठी और कांग्रेस पार्टी के सभी सांसद राज्य सभा से बाहर चले गए।  राज्य सभा में अगस्ता वेस्टलैंड मामले पर चर्चा हुई, कांग्रेस के सांसद भी इस मामले से अपने नेताओं को बचाने की पूरी तयारी करके आये थे लेकिन मनोहर पर्रिकर के हाथ में एक ऐसी फ़ाइल आ गयी थी जिसके बारे में कांग्रेस संसद अनजान थे।

n2-01मनोहर पर्रिकर ने बताया कि मेरे हाथ में जो फाइल है वह अगस्ता वेस्टलैंडडील से जुडी महत्वपूर्ण फाइल है। उन्होंने बताया कि यह देश का सौभाग्य है  कि कांग्रेस सरकार का कार्यकाल ख़त्म होने के आखिरी महीने में एक कमरे में आग लग गयी थी और कई महत्वपूर्ण फाइलें जलकर ख़ाक हो गयीं थी, उसी कमरे में यह फ़ाइल भी रखी हुई थी लेकिन मेज की एक ड्रावर में रखी होने के कारण यह फ़ाइल ख़ाक होने से बच गयी और आज यह अगस्ता वेस्टलैंड मामले का खुलासा करने में काम आ रही है।

उनके कहने का मतलब था कि कांग्रेस सरकार जाते जाते उस कमरे में आग लगाकर गयी थी जिसमें घोटालों से जुडी सभी फाइलें रखी गयी थीं और सौभाग्य से अगस्ता वेस्टलैंड की फाइल जलने से बच गयी। बता दें कि उस कमरे में आग लग गयी थी जिसमें कोयले घोटाले की फाइलें रखी गयी थीं, उसी वजह से कई आरोप बच गए।

इसके बाद मनोहर पर्रिकर ने अगस्ता वेस्टलैंड के बारे में बताना शुरू किया तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं की साँसें थमने लगीं और वे मनोहर पर्रिकर को चुप कराने के लिए हंगामा करने लगे। कांग्रेस सांसद चाहते थे कि मनोहर पर्रिकर आगे ना बोल पाएं लेकिन उप-सभापति की सख्ती के कारण कांग्रेस सांसदों की चाल कामयाब नहीं हो सकी और मनोहर पर्रिकर ने कांग्रेस को धो डाला।

n2-02रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर रिश्वतखोरी मामले में जांच के केंद्र में वे नाम रहेंगे जिनका उल्लेख इटली की अदालत के फैसले में किया गया है। इस मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए राज्यसभा में पर्रिकर ने कहा, “इस बात पर सहमति है कि अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद में भ्रष्टाचार हुआ है। इससे पहले की सरकार ने इसे माना और इस समूह पर वर्ष 2014 में रोक लगाई। इस मौजूदा सरकार ने आदेश जारी किया।

मंत्री ने कहा, “भ्रष्ट कार्यप्रणाली केंद्रीय मुद्दा है और जांच के जरिए इसे बेनकाब किया जाएगा।”

पर्रिकर ने कहा, “उपरोक्त पृष्ठभूमि के बीच ये जांच निश्चित रूप से उन लोगों की भूमिका पर केंद्रित रहेगी जिनका नाम इटली की अदालत के फैसले में आया है। इसकी व्यापक छानबीन सुनिश्चित करने के लिए भी यह जरूरी है।”

उस फैसले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एस.पी. त्यागी, कांग्रेस नेता अहमद पटेल व अन्य लोगों के नाम हैं।

हालांकि, कांग्रेस ने जोर देकर कहा है कि फैसले में किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है।

मंत्री ने करीब 45 मिनट लंबे जवाब में पूरा बयान पढ़ा और एक सूची दी कि सौदे में क्या-क्या गलत था।

विपक्षी दल कांग्रेस ने तथ्यों पर आपत्ति दर्ज कराई कि वह सदन की टेबल पर उसकी प्रति रखे बगैर ही लिखित बयान पढ़ रहे हैं। उनके भाषण के बाद पार्टी ने सदन का बहिष्कार किया।राज्य सभा में विपक्षी नेता गुलाम नबी आज़ाद ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री घर से लिखकर लाए बयान को पढ़ रहे हैं जो सदन का अपमान है। उत्तर घर लिखा जाये या कार्यालय में, जब तक तथ्य नहीं होंगे कोई क्या उत्तर देगा। रक्षा मंत्री तो अपना पूरा होमवर्क करके ही सदन में पहुंचे थे, जिससे विपक्ष इतना अधिक भयभीत हो गया जो देखते ही बनता था।

n2-03पर्रिकर ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो पैसे के लेने से जुड़े मामले की तहकीकात कर रही है। पहले लगता था कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)की कार्रवाई को कुछ अदृश्य हाथ मार्गदर्शित कर रहे थे।

पर्रिकर ने कहा, “सीबीआई ने मार्च 2013 में प्राथमिकी दर्ज की थी। उसने प्राथमिकी की प्रति ईडी को उपलब्ध कराने की नौ महीने तक जहमत नहीं उठाई। यह और हैरत की बात है कि ईडी ने उस प्राथमिकी पर जुलाई 2014 तक कोई काम नहीं किया।”

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि कुछ अदृश्य हाथ सीबीआई की सक्रियता और निष्क्रियता का मार्गदर्शन कर रहे थे। मौजूदा सरकार ने जब सत्ता संभाली तब से सीबीआई और ईडी इसके सभी पहलुओं की जोर लगाकर जांच कर रही हैं।”

मौजूदा स्थिति के बारे में मंत्री ने कहा, सीबीआई रिश्वत के पैसे की सुनवाई कर रही है लेकिन मैं उसका ब्यौरा नहीं दे सकता। पैसा कहां गया, हम लोग उसका पता लगा रहे हैं।

सौदे का ब्योरा देते हुए मंत्री ने कहा कि अगस्तावेस्टलैंड की निविदा को शामिल करने के लिए हेलीकॉप्टर की जरूरतों में बदलाव किया गया।

उन्होंने कहा कि आरपीएफ (प्रस्ताव का आग्रह) अगस्तावेस्टलैंड, इटली को जारी किया गया और आरपीएफ का जवाब अगस्तावेस्टलैंड इंटरनेशनल लिमिटेड, यूके से लिया गया, जबकि वह कंपनी ही नहीं थी जिसे आरपीएफ जारी किया गया था। वह निविदा तत्काल खारिज की जानी चाहिए थी क्योंकि ये वो कंपनी ही नहीं थी जिसे आरपीएफ जारी किया गया था।

मंत्री ने यह भी कहा कि क्षेत्र परीक्षण एडब्ल्यू101 हेलीकॉप्टर पर नहीं किया गया जिसे खरीदा जाना था।

उन्होंने इसका परीक्षण देश के बाहर करने पर भी सवाल उठाया।

अगस्ता वेस्टलैंड में सोनिया गाँधी को पहले पकड़ो: सुब्रमनियम स्वामी

भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड सौदे के पीछे जिस ‘संचालक शक्ति’ (ड्राइविंग फोर्स) का उल्लेख किया गया है, सीबीआई कानून के तहत उससे पूछताछ कर सकती है। स्वामी ने राज्यसभा में कहा, “सीबीआई को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 156 के तहत उससे सवाल पूछने का अधिकार है जिसका नाम इटली की अदालत के फैसले में इस सौदे के पीछे ड्राइविंग फोर्स के रूप में आया है।”

स्वामी ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2004 में कहा था कि सुरक्षा कारणों से वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों को हर हाल में छह हजार मीटर तक उड़ने में सक्षम होना चाहिए, जबकि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर 4500 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर नहीं उड़ सकते।

स्वामी ने आरोप लगाया कि शर्तो में फेरबदल कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार ने उसके मुकाबले के अन्य प्रतिभागियों को हटाने के लिए किया।

उन्होंने कहा, “हेलीकॉप्टर के केबिन की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत ऊंचाई 1.45 मीटर है लेकिन इस मामले में केबिन की ऊंचाई का ब्यौरा 1.80 मीटर तय किया गया। इस तरह केवल अगस्ता वेस्टलैंड ही इस शर्त को पूरा कर सकती थी, शेष कंपनियां इस निविदा से ऐसे ही बाहर हो गईं।”

स्वामी ने कहा, “दूसरी बात यह कि जो हेलीकॉप्टर खरीदे गए उनसे नहीं बल्कि दूसरे मॉडल से क्षेत्र परीक्षण किया और उन परीक्षणों के आधार पर एडब्ल्यू-101 की खरीद की गई। क्या यह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत का मामला नहीं है?”

भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मूल प्रस्ताव आठ हेलीकॉप्टर खरीदने का था। लेकिन, जब अगस्ता वेस्टलैंड को आपूर्ति का ठेका मिल गया तो खरीदे जाने वाले हेलीकॉप्टरों की संख्या बढ़ाकर 12 कर दी गई।


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