1962 के युद्ध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान

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आर.बी.एल.निगम

RBL Nigam1960 में जब नेहरू और चो-एन-लाई के जोड़ी देश का दौरा करते हुए “हिंदी-चीनी भाई-भाई ” का लोरी सुना रही थी,तब प. पू गुरू जी ने दो-टुक शब्दो में कहा था -“इस लुभावने नारे के पीछे भयंकर दैत्य छिपा हुआ है|” दो वर्ष बाद ही गुरू जी की बात अक्षरक्षः सही साबित हुई ,चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया |तब संघ के स्वयंसेवक भी इस मैदान में तुरंत कुद पड़ें | रातो- रात सैनिको के सहायता के लिये 45000 स्वयंसेवक सीमा पर भेज दिया गया |सीमा पर जाकर स्वयंसेवको ने अपने विविध प्रकार से सेवा दी | दिल्ली की ट्राफिक ब्यवस्था स्वयंसेवको द्वारा सम्भल  ली गई |

nn02चीन युद्ध में देश भर में जनजागरण अभियान छेड़ा गया ,क्योंकि यह वह दौर था जब कम्युनिस्टो ने यह झुठ फैला रखा था कि भारत ने ही चीन पर हमला कर रखा है | इस बीच  चीन ने नेपाल को भड़का रखा था की तुम्हारे गरीबी का कारण भारत है तो प. पू. गुरू जी ने नेपाल की यात्रा की और वहां के नरेश का मन जितने में भी सफल रहे वहां से आकर उन्होने सारी Report लालबहादुर शास्त्री को सौंप दी |तब तुरंत ही लालबहादुर शास्त्री नेपाल यात्रा पर गयें | नेहरू युद्धकाल में संघ के इन कार्यो से इतने प्रसन्न हुए की उन्होने गणतंत्र दिवस में शामिल होने के लिये संघ के एक टुकड़ी को आमंत्रित किया था जिसमें 3500 स्वयंसेवको ने भाग लिया था |गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति भवन से लेकर लालकिला तक परेड में सम्मिलित होना किसी भी संगठन के लिए गर्व की बात है.

भारतीय मज़दूर संघ का योगदान

nn03हालाँकि  ’62 में संघ द्वारा किये कार्यो से अधिकतर लोग भली भांति परिचीत होगें ही लेकिन संघ के सहयोगी ईकाई “भारतीय मजदुर संघ ” ने जो कार्य किया था उसका भी उल्लेख करना आवश्यक है , क्योंकि युद्धकाल में श्रमिक दृष्टिकोण बहुत महत्व रखता है | जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो कम्युनिस्टो के एक वर्ग ने घोषणा की “चीनी सैनिको का उद्देश्य तो भारत को पुंजीवादी पंजे से विमुक्त करना है”|वासव पुनय्या जैसे अनेक नेताओ ने तो यहाँ तक कह डाला की” भारतअक्रामक था और उसने चीन के राज्यक्षेत्र को हड़प लिया था |” कम्युनिस्टो ने श्रमिक युनियनो को भारत के रक्षा प्रयास विफल करने और उनमें बाधा डालने का साधन बनाया गया |

मोर्चे पर खाद्य सामाग्री आदि  भेजने में भी बाधा डाली गयी | किंतु भारतीय मजदुर संघ ने इसके विपरीत निर्णय लिया और उसकी यूनियनो ने अपने सभी आंदोलन तुरंत वापस ले लिया | सभी मांगे अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई |श्रमिको से कहा गया कि वे रक्षा उत्पादो को सर्वोच्च प्राथमिकता दे और रक्षा के सभी प्रयासो में सहयोग करे| इतना ही नही भारतीय मजदुर संघ ने निश्चय किया कि ऐसे प्रयास किया जाये कि भविष्य में छिपे ऐसे गद्दार शरारत ही ना कर सकें |रक्षा उत्पादन,परिवहन ,विद्युत उत्पादन एवं संचारण प्रसारण आदि जैसे सामरिक महत्व के क्षेत्रो में विशेष प्रयास किये गयें |यह दो दशक के अनवरत प्रयास का फल है कि भारतीय मजदुर संघ की एक शाखा ‘भारतीय प्रतिरक्षा मजदुर संघ’ को प्रतिरक्षा क्षेत्र में उच्च प्रतिष्ठा मिली है |

भारतीय मजदुर संघ को भी विश्वास हो चला है कि भविष्य में वामपंथी श्रमिक संगठन 1962 के चालो को दोहराने का साहस नही कर सकेंगे, क्योंकी भारतीय मजदुर संघ औरो से बहुत आगे निकल चूका है |

राष्ट्र परिपेक्ष में आरएसएस

भाजपा पर विरोधी अक्सर आरोप लगाते हैं कि  “संघ भाजपा को चलाता है?”  क्या समस्या है चलाए। भाजपा को क्या कांग्रेस , सपा, बसपा चलाएँगे ?एक अच्छा चालक हो तो गाड़ी दुर्घटना से औसतन बची रहेगी. ये बात भी ठीक है  कि सवर्ण नेतृत्व है संघ का ,ये बात भी ठीक है की संघ पारम्परिक हिंदुत्व का झंडाबरदार बनना चाहता है । परन्तु समाज अथवा देश पर आई विपत्ति के समय संघ ही अग्रिम पंक्ति में खड़ा होता है।

ये भी ठीक  है कि संघ मुस्लिम और ईसाई गतिविधियों पर नजर रखता है.

ये भी ठीक कि संघ का उपयोग कर कुछ नेता निजी स्वार्थ पूर्ति करते होंगे.

ये भी ठीक  है की संघ अनुशासन के आधार पर जीवन को अपने मनचाहा गढ़ रहा हो ।लेकिन देश का अनादर किसी भी कीमत पर बरदाशत नहीं।

संघ में राष्ट्रभक्ति का जो संस्कार है जो राष्ट्रसेवा ऑक्सीजन स्वयंसेवक के प्राण पोषित करती है दुनिया के अंदर उसका कोई मुकाबला अथवा उसकी कोई तुलना नही हो सकती । एक बार जो संघ के इन संस्कारो में आ गया वो जीवन में महाराणा प्रताप की तरह घास की रोटी खा लेगा लेकिन कुछ स्वर्ण टुकड़ो में देश को नही बेचेगा । अपने घर को आग लगा कर समाज को उजाला देना ये हिम्मत मात्र संघ के स्वयंसेवक करते है और किया है ।

nn04हजारो मेधावी विद्यार्थी जो विद्यार्थी जीवन में संघ के प्रचारक हुए तो जीवन के समस्त बसन्त समस्त यौवन समस्त ओज तेज वीर्य राष्ट्र के हेतु होम कर दिया । आज हमको एक अन्ना हजारे दिखता है, लेकिन संघ में हजारों ऐसे अन्ना रोज निर्मित होते हैं जो कभी भी अपने त्याग को मंच माला माइक में नही बेचते । बस मौन साधक बनकर राष्ट्र अर्चन  तो संस्कार है उनका।

2004 में हल्द्वानी एक कार्यकर्ता शिविर में   सुदर्शन जी ने एकस्वयंसेवक के हाथ में  संघ द्वारा  प्रकाशित एक पुस्तक “एक कर्म योगी का गांव” जो अन्ना के कर्मयोग से रालेगण सिद्धि के कायापलट पर शेषाद्रि जी की लिखी हुई थी उस पुस्तक को देखते ही उन्होंने कहा “यह  पुस्तक सामान्य जनो के लिए है जो संघ में नही है जो संघ को पसंद नही करते उन सब लोगो को भी अच्छी बातें जाए कुछ प्रेरक लोगो का जीवन पढ़ने को मिले इसलिए ये किताब गैर स्वयंसेवक के जीवन पर प्रकाशित की है । देख कितने अन्ना हजारे समूह में साक्षात् उपस्थित है उनको पढ़ ।

जो लोग ये महत्व की बात को भूल कर उपेक्षित कर केवल भाजपा से संघ को जोड़कर देखते है उनको संज्ञान हो कि संघ के लगभग 70 अनुषांगिक और विविध संगठनो में भाजपा मात्र एक संगठन है इस से ज्यादा उसका कोई महत्व नही संघ के लिए ।

अगर आप संघ की विवेचना भाजपा के आधार पर करोगे तो भाजपा के कमल की राजनीतिक कीचड़ में उलझ जाओगे संघ के कमल की सुगन्ध से वंचित रह जाओगे

nn05ये सुंगंध तब मिलेगी जब आप संघ की विवेचना कम से कम 10%संघठन यानि 7 संघठन,,,
वनवासी कल्याण परिषद
सहकार भारती
विद्याभारती
सेवा भारती
ग्राम भारती
संस्कार भारती
भारत विकास परिषद

जैसे संगठनो का कार्य प्रत्यक्ष देख कर आपको बोध होगा कि किस तरह मौन साधना से समाज निर्माण और राष्ट्र सेवा का अनथक आयोजन हो रहा है।

सारा संघ केवल भाजपा ,विद्यार्थी परिषद , बजरंग दल एवं विश्व हिन्दू परिषद  तक न समेटिये ये मन्त्रमोहिनी  के बैनर है जहां सम्भव है कुछ अतिवादी अपना स्वार्थ पूर्ति एजेंडा ले कर संघ को नुकसान ही पहुचां रहे हो, और कुछ नही; संघ को इन अतिवादियों पर अंकुश लगाना ही पढ़ेगा और अतिशीघ्र ऑपरेशन कर शुद्ध विचार को अशुद्ध तत्वों से अलग करना होगा।अगर वास्तव में आपकी मंशा संघ को जानने और समझने की है तो इनके अंदर जाकर संघ का कार्य देखिये।

संघ पर साम्प्रदायिक दंगावादी आरोप लगाना बीमार और संकुचित प्रयास

nn06लेकिन संघ के ऊपर साम्प्रदायिक दंगावादी आरोप लगा देना ये बीमार और संकुचित प्रयास है इस से ज्यादा कुछ नही।

बाला साहब देवरस ने जो दो बात कहने का साहस किया था, वो किसी ने आज तक नही किया न  संघ से बाहर और न ही  संघ के अंदर:–

1= अगर अश्पृश्यता पाप नही तो दुनिया में कुछ भी पाप नही ।
2=  मैं चाहता हूँ संघ समाज में विलीन हो जाए ।

इतना महान दृष्टिकोण रखने वाले पूर्वज जिस संघठन के हों वो कभी संकीर्ण और अतिवादी नही हो सकता ।

संघ की असफलता

कई विषय ऐसे हैं जिन पर संघ  पूर्णरूप से असफल रहा है :–

nn071.  अपने इस राष्ट्र भाव  प्रयास में कि 9 दशकों में भी वो ये बात अपने हिन्दू समाज को तक नही समझा पाया भरोसा नही दिला सका कि हम संघ को मात्र राष्ट्र सेवा के लिए चला रहे हैं जबकि उसको केवल हिन्दू ही नही तो इस देश में रहने वाले हर पन्थ को उसकी सहमति से यह भरोसा प्रदान कर देना चाहिए था।

2.  भारत के दक्षिण विशेषकर केरल में इतने स्वयंसेवकों का क़त्ल हुआ, केवल संघ समर्पित पत्रिकाओं में समाचार प्रकाशित होने पर ही संतोष कर बैठ जाना, उन हुतात्माओं का अपमान है। जितना अधिक स्वयंसेवकों को मृत्यु के गाल में समाया गया है, यदि इसकी आधी संख्या किसी अन्य संगठन के कार्यकर्ताओं की हुई होती उस राज्य  सरकार का जीना हराम कर दिया होता ;

nn083. दंगा ग्रहस्त क्षेत्रों में हिन्दुओं की कभी सुध नहीं लेना ;

4. राजनीतिक दलों की भांति संघ द्वारा मुस्लिम मंच बनाना, फिर भी संघ मुसलमानों की दुश्मन। दूसरे अर्थों में यही भी कहा जा सकता है कि मुसलमान संघ और भाजपा दोनों को ही मुर्ख बना अपनी रोटियाँ सेक रहे हैं। क्योंकि मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवार की ज़मानत ही ज़ब्त होती देखी गयी है, चाहे उम्मीदवार मुस्लिम ही क्यों न हो । कोई क्षेत्र अपवाद हो सकता है।

तथाकथित फोर्ड के टुकड़ो पर लार टपकाने वाले नेता चर्च के रुपयों की बैशाखी से चलने वाली लंगड़ी मीडिया घर बैठकर समाज का चिंतन करने वाले शुष्क बुद्धिविलासि लोग संघ को सर्टिफिकेट देने का कुत्सित रोग न पाल कर रखें। बल्कि उसके राष्ट्रभक्ति के कार्यो को सहयोग करें ।

nn09मुझसे वरिष्ठ पत्रकारों एवं नेताओं को 1947 में बटवारे उपरांत पाकिस्तान के चर्चित समाचारपत्र “डॉन” ने लिखा था कि “यदि संघ दस वर्ष पूर्व बन गया होता, पाकिस्तान न बनता।” यानि संघ की देशभक्ति को जिन्ना का पाकिस्तान भी सराहना करे बगैर नहीं रह पाया। लेकिन भारत के छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता वोट-बैंक के आगे नतमस्तक होकर संघ को पानी पी-पीकर कोसते हैं।

संघ की ही तर्ज़ पर कांग्रेस ने कांग्रेस सेवा दल बनाया, लेकिन किस खोली में चला गया किसी को नहीं मालूम। गणतन्त्र दिवस में संघ सम्मिलित हो सकता है, कांग्रेस सेवा दल नहीं ,क्यों? और इस क्यों का उत्तर शायद कांग्रेस से लेकर छद्दम धर्म-निरपेक्षता का स्वांग रचने वाले किसी भी नेता अथवा पार्टी के पास नहीं। यह शोथ का विषय हो सकता है। इस विषय पर किसी चैनल पर न चर्चा होगी और न ही कोई डीएनए।

(लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार है )