भगवा आतंकवाद पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigampyf2ud8lभाजपा ने संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में कामकाज ठप्प होने का जोखिम उठा कर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है। भाजपा सांसदों ने संसद के भीतर और बाहर इशरत जहां मुठभेड़ कांड से लेकर भगवा आतंकवाद से जुड़े तमाम मुद्दे उठाए हैं और कांग्रेस को बैकफुट पर लाने की कोशिश की है। भाजपा के आक्रामक रुख से कांग्रेस रक्षात्मक हुई है। भाजपा ने जिस अंदाज में सोनिया और राहुल गांधी को इशरत मामले में घेरा, उससे चिंतित कांग्रेस ने दिग्गज नेताओं और कानूनी जानकारों से प्रेस कांफ्रेंस करा कर सफाई दी।

9czhkqed 0012458संदेह नहीं कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पी चिदंबरम आदि कांग्रेस आलाकमान इसरत जहां, भगवा आतंक के मामले में घिरे हैं। कांग्रेस कितनी ही सफाई दे, यह आम चर्चा है कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह को फंसाने के लिए आला स्तर और पैमाने पर साजिश रची गई थी। आतंकी आरोपी इसरत जहां को ले कर खुफिया एजेंसियों आदि के पास  इधर-उधर से तमाम इनपुट थे। बावजूद इसके भारत के गृहमंत्री चिदंबरम ने सियासी मकसद से गुड़गोबर किया। खेल  यदि सियासी था तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी या कांग्रेस कोर कमेटी का रोल बनेगा ही। कांग्रेस ने प्रतिवाद कर कहा कि सोनिया व राहुल गांधी का सरकार में दखल नहीं था।

lokmbzbxइससे दो बातें साफ हैं। एक चिदंबरम से नेतृत्व ने दूरी बनाई है। दूसरे हिंदू प्रतिक्रिया की चिंता है। कांग्रेस में अब यह चिंता है कि 2004 से लेकर 2014 के बीच हिंदुओं में आंतकवादी यानि  भगवा आंतक की राहुल गांधी से ले कर दिग्विजयसिंह ने जो राजनीति की उसके हिंदुओं में घाव ताजा न हो। हां, मनमोहनसिंह सरकार ने एनआईए की जांच के जरिए समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव मामलों में कर्नल पुरोहित से लेकर असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा आदि को जैसे आरोपी बनवाया और इतने सालों के बाद भी यदि प्रमाण नहीं निकले तो हिंदुओं की भगवा आंतकी की बदनामी का ठीकरा अंततः कांग्रेस पर फूटेगा। कांग्रेस ने अपने राज में वह हर काम किया जिससे मुस्लिम आतंकवाद के आगे हिंदू आंतकवाद का हल्ला बने। हिंदुओं की वैश्विक बदनामी कराई। पर अपने राज में भी कांग्रेस इन कथित हिंदू आंतकियों के खिलाफ पुष्ट प्रमाण, गवाह नहीं बना सकी, यह अब जाहिर है। एनआईए एजेंसी खुद प्रमाण न होने की बात कह रही है। सो सोनिया गांधी, राहुल गांधी के लिए आगे इसकी सफाई देना भारी होगा कि उन्होने क्यों कर हिंदुओं की भगवा आंतक के जुमले में बदनामी करवाई?

kwdreb4wस्मरण आता है कि वर्ष 2011/12 में Organiser साप्ताहिक के किसी अंक के पृष्ठ 18 या 19 पर स्वामी असीमानंद का अपने वकील के माध्यम से तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को जेल में उनके साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के विषय पर पत्र लिखा था, जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी साप्ताहिक में साध्वी प्रज्ञा की सात्विकता को धूमिल आदि करने के विषय में समाचार प्रकाशित हुआ था। यूपीए के कार्यकाल में कम्युनल वायलेंस बिल पास करवाने की मंशा ही हिंदुत्व पर कठोर प्रहार करने का था।

hwrctsbxसन 2004 से 2014 के बीच में मनमोहन सरकार ने भगवा आंतकवाद के नाम पर हिंदुओं को बदनाम करने की जो राजनीति की उसका सबसे खराब पहलू यह है कि मई 2014 तक सरकार रहते हुए भी अदालत में मकोका में बंदी किए लोगों के खिलाफ एक्ट अनुसार प्रमाण, चार्जशीट नहीं दी जा सकी। उससे क्या भगवा आतंक का झूठ एक्सपोज नहीं होता है? क्या कोई भरोसा करेगा कि चिदंबरम ने यदि इसरत जहां मामले पर हलफनामा बदला तो कांग्रेस कोर कमेटी को पता नहीं था या भगवा आतंक की बात कर हिंदुओं को बदनाम करने की रणनीति बनी तो उसमें कांग्रेस की सियासी रणनीति नहीं थी?

gse7b9poयह तथ्य है कि जिन मामलों की जांच अदालत की निगरानी में हो रही है या जिन मामलों की जांच एनआईए कर रही है, उन मामलों में भी आरोपी जमानत पर छूट रहे हैं या आरोप मुक्त हो रहे हैं। इन मामलों में जो नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उनसे पिछली सरकार के समय किए गए फैसलों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पी चिदंबरम ने गृह मंत्री रहते एनआईए बनाई थी, जिसने आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच की। एक मिसाल मालेगांव धमाकों की है, जिसमें शुरुआती जांच महाराष्ट्र की एटीएस ने की थी और नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में जब एटीएस ने जांच शुरू की तो स्वामी असीमानंद सहित कई हिंदू गिरफ्तार किए गए। इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी मुस्लिम आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है और जो हिंदू आरोपी गिरफ्तार हैं, उनके मामले में भी गवाहों ने कहा है कि उनसे जोर-जबरदस्ती गवाही दिलाई गई थी।

पिछली सरकार के समय जिस हिंदू या भगवा आतंकवाद का जुमला गढ़ा गया, उसे स्थापित करने के लिए मुकदमे भी गढ़े गए, गवाहों से जोर-जबरदस्ती बयान दिलाए गए और बिना किसी ठोस सबूत के दर्जनों लोगों को जेल में डाला गया। चाहे कर्नल प्रसाद पुरोहित हों या साध्वी प्रज्ञा हों या स्वामी असीमानंद हों, किसी के खिलाफ यूपीए सरकार के समय हुई जांच में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले थे और तभी आरोप पत्र दायर करने में देरी हुई।

इसी तरह इशरत जहां के मामले में हुआ। गुजरात पुलिस इस बात पर कायम रही कि उसने आईबी की सूचना के आधार पर मुठभेड़ को अंजाम दिया। इसे लेकर पिछली सरकार के समय आईबी बनाम सीबीआई का बड़ा विवाद खड़ा हुआ। सीबीआई जांच में आईबी के कई अधिकारियों पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने इस फर्जी मुठभेड़ में किसी न किसी तरह की भूमिका निभाई। भाजपा ने फिर यह मुद्दा उठाया है। उसका कहना है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फंसाने के लिए यूपीए सरकार ने आईबी बनाम सीबीआई का झगड़ा बना दिया।

चाहे मालेगांव का मामला हो या इशरत जहां कांड, दोनों के बारे में जितना सोचें उतना परेशान करने वाले तथ्य सामने आएंगे। भारत जिस आतंकवाद को लेकर दुनिया के किसी दूसरे देश के मुकाबले ज्यादा पीड़ित है, उस देश की सरकार आतंकवाद की घटना पर लीपापोती कर रही थी। उस समय की सरकार मुस्लिम आतंकवाद बनाम हिंदू आतंकवाद की बहस चला रही थी। यह साबित करने की कोशिश हो रही थी कि हिंदुओं में भी आतंकवादी पनप रहे हैं। वोट बैंक की राजनीति में पूरे हिंदू समुदाय को बदनाम करने का संगठित प्रयास हो रहा था।कोई चैनल ऐसा नहीं था, जो केसरिया,भगवा एवं हिंदुत्व को न कोस रहा हो ?सब अपनी-अपनी TRP बढ़ाने के चक्कर में हिंदुत्व को पानी पी-पी कर कोस रहे थे। सत्ता पलटी तो कुछ ने तो गिरगिट की तरह रंग बदल लिया, परन्तु अभी भी कुछ पत्रकार एवं चैनल अपनी सोंच बदल पाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस और आरएसएस का विरोध होना स्वाभाविक हैं। क्योंकि कांग्रेस का कांग्रेस सेवा दल संघ की तर्ज़ पर अपनी पहचान बनाने में पूर्णरूप से असफल रहा।जबकि दोनों के गणवेश में कोई अंतर नहीं था।

और अब कांग्रेस कह रही है कि इसमें सोनिया और राहुल गांधी की कोई भूमिका नहीं थी। क्या इस बात पर यकीन किया जा सकता है? खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब में लिखा है कि सोनिया गांधी सत्ता का असली केंद्र थीं।

001245 Home Secretary RK Singh today claimed that Rashtriya Swayamsewak Sangh (RSS) associates were involved in terror activities in the country.

“The government has names of at least 10 persons associated with the RSS in bomb blast cases,” he said. Singh said that RSS was involved in Samjhauta Express, Mecca Masjid and Dargah Sharif blasts. His statement comes soon after Congress spokesperson Janardhan Dwivedi distanced the Congress from Home Minister Sushilkumar Shinde’s earlier comment on “saffron terrorism”.

Dwivedi said, “As far as terms like ‘Hindu terrorism’ or ‘saffron terrorism’ go, the party is not in agreement with such terms. Shinde must have unintentionally made the comment.”

wspmacj1The BJP has demanded an apology from the Congress for Shinde’s remark. “Training camps of both the BJP and the RSS are promoting Hindu terrorism. Whether it is Samjhauta blast or Mecca Masjid blast or Malegaon blast, they plant bombs and blame it on the minorities,” he had said on the last day of the Congress Chintan Shivir in Jaipur. His comments were backed by External Affairs Minister Salman Khurshid. “Our stated position is fully shared by the Home Minister. His statements are based on facts,” Khurshid told reporters.

Addressing a press conference in the national capital, BJP spokesman Ravi Shankar Prasad said, “The BJP has taken strong objection to the remarks made by Home Minister Sushilkumar Shinde on ‘Hindu terrorism’ and the endorsement of the same by the External Affairs Minister.”

“BJP is deeply pained with the repeated irresponsible utterances of the top UPA government ministers who have blamed the BJP and its parent organization, the RSS, for encouraging Hindu terrorism,’’ he said. In a separate press conference in Mumbai, the RSS also strongly condemned the remarks made by Shinde.

“The Home Minister must apologise to the Hindus for his highly regrettable and offending remarks. He owes an explanation to the majority Hindus of this country,” a top RSS leader said.