मोदी के अवरोधक

शास्त्री के बाद मोदी सख्त प्रशासक

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigamगुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के केवल तीन कामों से मेरी दिली इच्छा थी कि “भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हो या मोदी जैसा साहसिक हो। ” जिस तरह से इस आदमी ने अल्प साधनों के माध्यम से गुजरात दंगों को शांति देकर अपने विरोधियों की रातों की नींद हराम कर दी थी फिर 2012 के विधानसभा चुनावों में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को पाकिस्तान के रहमान मलिक को भारत बुलाए जाने को, जिस तरह से चुनौतीपूर्ण अंदाज़ में ललकारा था, उस दिन से मोदी को प्रधानमंत्री बनते देखने की लालसा थी। जो २०१४ में परवान चढ़ी।

इच्छा 2014 में पूरी हो गयी किन्तु जनता को मोदी होने का अनुभव कुछ समय के बाद होगा। एक दम हथेली पर सरसों नहीं जमती। थोड़ा संयम रखना चाहिए। परन्तु जिस प्रकार से मोदी कदम बढ़ा रहे हैं, यकायक लाल बहादुर शास्त्री स्मरण हो जाते हैं। मेरे पत्रकारिता अनुभव से, भारत इन दो प्रधानमंत्रियों को शायद ही कभी भूल पाएगा। 1965 इंडो-पाक युद्ध में शास्त्री जी ने जो निर्णय लिए, वास्तव में शास्त्रीजी जैसा कोई साहसिक विड़ला ही लेने की हिम्मत कर सकता है, एक तरफ सीमा पर दुश्मन को ईंट का जवाब पत्थर से तो दूसरी तरफ देश में छिपे गद्दारो को ठिकाने लगाना। ठीक वही स्थिति नरेंद्र मोदी की है।

BookCoverशास्त्री सरकार द्वारा लिए एक साहसिक निर्णय को अपनी पुस्तक “भारतीय फिल्मोद्योग –एक विवेचन ” में भी सम्मिलित किया था। स्वतंत्र पत्रकारिता करते लेख लिखा था, जो उस समय तो चर्चित हुआ ही, परन्तु जब उस कलाकार को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला, तब कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों ने भी विरोध प्रकट करते हुए अपने अंदाज़ में उन्ही विषयों को उजागर किया था।

दिली इच्छा थी कि तत्कालीन  राष्ट्रपतिजी डॉ शंकर दयाल शर्मा से विमोचन करवा कर प्रकाशक वर्ग को आइना दिखाया जाये ,परन्तु विधाता को कुछ और ही स्वीकार था। चार बार प्रयास हुआ, लेकिन चारों ही बार एक ही उत्तर मिलता “इस अमुक कलाकार के विरुद्ध प्रकाशित अंश निकल दो, पुस्तक में सामग्री बहुत ही रुचिपूर्ण है ,केवल वही अंश अवरोध किये हुए है।” यह सब बातें इतिहास बन अवश्य गयी, किन्तु समस्या आज भी जीऊं की तिउं बनी हुई है।

मोदी सरकार की सबसे बड़ी समस्या

आइए अब मोदी सरकार की सबसे बड़ी समस्या को समझते है आखिर क्यों कोई फैसला लेने में दिक्कत आ रही है मोदी सरकार को; सब जानते है 2014 में मोदी सरकार ने 282 सीटे जीत ली 543 में से और इतिहास रच दिया। जिससे सरकार तो बन गयी। लेकिन जब भी कोई फैसला लिया जाता है सरकार द्वारा तो पहले लोक सभा में जाता है जहा मोदी सरकार पूर्ण बहुमत में है। वहा से पास होने के बाद राज्य सभा में जाता है।

यही से कांग्रेस का खेल शुरु होता है। जो मोदी सरकार के किसी भी फैसले को पास नही होने देती है और अपनी इस एतिहासिक हार का बदला लिया जाता है जिसकी कीमत देश को चुकानी पड़ रही है। कोई भी जनहित और देश के हित में फैसले नही हो दे रही है कांग्रेस।

आओ समझते है राज्य सभा का गणित-

राज्यसभा की फ़िलहाल की स्थिति 242 सीटे

बीजेपी और सहयोगी दल(NDA)

BJP(45),SHIV SENA(3),अकाली दल(3),TDP(6),RPI-अठावले(1),AINRC(1) और नागालेंड पीपुल्स फ्रंट(1)

टोटल -60 सीटे

विपक्ष /कांग्रेस के सहयोगी

कांग्रेस (69), समाजवादी पार्टी(15), तृणमूल कांग्रेस(12), JDU(12), CPM(9), NCP(6), CPI(2), नेशनल कांफ्रेस(2),RJD (1), JDS(1), JMM (1), केरल कांग्रेस-M (1), INLD(1)

टोटल – 132

अन्य बची 42 सीटे

जो इस प्रकार है…..

AIDMK(11) , BSP(10), BJD (7), DMK(4), निर्दलीय (7), TRS (1), सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट(1) ,बोडोलेंड पीपुल्स फ्रंट(1)

टोटल – 42

जो किसी के भी साथ जा सकते है। अगर ये 42 का भी पूरा समर्थन मिले तो भी 102 सीटे ही मोदी सरकार के समर्थन में होगी जबकि कांग्रेसी सहयोगियों के पास 132 है इसलिए तब भी राज्य सभा में मोदी सरकार अल्प मत में रहेगी।

अब शायद आपको कांग्रेस का खेल समझ आ गया होगा कैसे कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टियों के बल पर मोदी सरकार को काम करने से रोक रखा है ताकि जनता तक ये सन्देश जाये की मोदी सरकार को काम नही कर रही कांग्रेस विपक्ष में दुर्भावना के साथ मोदी सरकार के बिल रोक कर देश की तरक्की को रोक रही है अब केवल आपको ये समझना है ये कौन लोग है जो देश की तरक्की नही चाहते। कांगेस और उसके सहयोगी मोदी विरोध के नाम पर देश के साथ धोखा कर रहे है और पिछले 60 सालो से करते आ रहे है।

दुर्भाग्यवश, यदि मोदी विरोधी किसी कारणवश सत्ता में आ गए, मोदी का  नाम ठीक वैसे ही दब जायेगा जैसे के लाल बहादुर शास्त्री का। देश को विश्व में गौरविंत किये जाने के हर प्रयास को मलियामेट कर दिया जायेगा।

नफरत करने के कारण

१. अगर आप कजरी या राहुल के फैन हैं तो आपका मोदी से नफरत करना बनता है…मरते दम तक करते रहें….

२. अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं तो आपको मोदी से घृणा करनी चाहिए क्योंकि अब आपको समय पर ऑफिस पहुंचना पड़ता है..

३.अगर आप एक भ्रष्ट अधिकारी हैं तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि आपकी हराम की कमाई की आवक में पहले से भारी कमी आई है..

४. अगर आपको सड़क पर कचरा फेंकना पसंद है तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि अब आपके ऐसा करते ही एक बच्चा आकर आपको टोक देता है..

५. अगर आप एक NGO चलाते हैं तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि अब आपको अपने कमाई और खर्चों का हिसाब सरकार को देना पड़ रहा है..

६. अगर आप किसी बड़ी कंपनी के मालिक हैं तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि आप उन्हें रिश्वत नहीं दे सकते…

७. अगर आप भाजपा के MP हैं तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि अब आपको मीटिंग्स में समय पर पहुंचना पड़ता है और देरी के लिए सफाई देनी पड़ती है..

८. अगर आप ISI या पाकिस्तानी सेना में हैं तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि अब बदले की कार्रवाही के लिए भारतीय सेना को केंद्र का मुंह नहीं ताकना पड़ता है..

९. अगर आप नितीश कुमार या आडवाणी हैं तो मोदी से नफरत कीजिये क्योंकि उन्होंने आपके प्रधानमंत्री बनने के सपने को हमेशा के लिए तोड़ के रख दिया है…

१०.अगर आपको ट्रेन में लड़की छेड़ना पसंद है तो आप मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि अब एक ट्वीट पर अगले स्टेशन में रेलवे पुलिस आपकी खबर लेने को तैयार मिल सकती है…

११. अगर आप ज्वेलर्स हैं तो आप मोदी से घृणा कर सकते हैं क्योंकि एक्साइज ड्यूटी के कारण आपकी काली कमाई में कमी आएगी..

१२. अगर आप मीडिया में हैं तो मोदी से घृणा कीजिये क्योंकि वो विदेशी दौरों में मीडिया वालों को अपने साथ हराम का खिलाने नहीं ले कर जाते हैं..

१३. अगर आप मुस्लिम हैं तो २००२ के गुजरात दंगों के लिए मोदी से नफरत कीजिये…

14. अगर आपको पिछले साठ सालों की कांग्रेसी गुलामी और देश को नोच नोच कर खाने वालों से ज्यादा प्यार है, तो आप बेशक मोदी से नफरत कर सकते हैं..

15. अब समय बदल चुका है, जितना मूर्ख बनाया पिछले साठ सालों में अब जनता को उसके पाई पाई का हिसाब चाहिए..