सिग्नोरा गांधी के नाम पर संग्राम, जानें- आखिर कौन हैं सिग्नोरा?

Sonia-Gandhiनई दिल्ली। सियासत में सभी मुद्दों का महत्व होता है। ये समय-समय की बात है कि राजनीतिक दल या राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कब और कैसे मुद्दों को हथियार बनाकर एक दूसरे पर हमला कर दें। अगस्ता वेस्टलैंड का मुद्दा वैसे तो कई साल पुराना है। लेकिन इटली की मिलान कोर्ट के फैसले के बाद भारत की राजनीति में बवंडर खड़ा हो गया है। करीब 130 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी और उसकी मुखिया गंभीर संकट में है।

मिलान की कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इसमें शक नहीं है कि अगस्ता वेस्टलैंड के मामले में घूस नहीं दी गयी है। इसके अलावा जिस नाम का फैसले में उल्लेख किया गया है वो चैंकाने वाला है। अदालत ने अपने फैसले में सिग्नोरा गांधी का तीन बार इस्तेमाल किया है। जिसका मतलब कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से निकाला गया है। यूपीए-2 के दौरान अगस्ता वेस्टलैंड सौदे पर बातचीत चल रही थी। कई राउंड की बातचीत के बाद अगस्ता वेस्टलैंड बनाने वाली कंपनी फिनमैनिका को टेंडर दिया गया। हालांकि वीवीआईपी हेलीकॉप्टर के तकनीकी खामियों की खबरें भी आती रहीं।

भारतीय वायुसेना ने पहले अगस्ता वेस्टलैंड की खरीद पर रजामंदी नहीं दी। लेकिन राजनीतिक स्तर पर दबाव के बाद हेलीकॉप्टरों की खरीद पर सहमति बनी। बताया जा रहा है कि इस डील में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने व्यक्तिगत स्तर पर रुचि ली। मिलान कोर्ट के फैसले में कांग्रेस के एक और शख्स के नाम का जिक्र किया है जिसे एपी से संबोधित किया गया है। बताया जा रहा है कि एपी कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस के कद्दावर नेता और सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल हैं। इस मामले में भारतीय वायु सेना के पूर्व चीफ एस पी त्यागी ने कहा कि वो अकेले दोषी नहीं है। बल्कि तत्कालीन भारत सरकार भी दोषी है। अदालत के फैसले के बाद भाजपा, कांग्रेस पर हमलावर हो गयी है। भाजपा का कहना है कि अगर घूस देने वालों पर कार्रवाई हुई है तो घूस लेने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।