डीयू की किताब में भगत सिंह को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’, बताया गया

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigamदिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही मृदुला मुखर्जी और विपिन चंद्रा की एक पुस्तक में शहीद-ए-आजम भगत सिंह को कथित रूप से ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताए जाने को लेकर लोकसभा में अप्रैल 27  को सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच काफी नोकझोंक हुई।

पिछली सरकारों ने भारत के इतिहास को किस कदर कलंकित किया है, काश यही काम विदेश में हुआ होता ऐसे इतिहासकारो को जेल हो गयी होती। इन छद्दम इतिहासकारों ने देश को ही नहीं वरन समस्त विश्व में भारत को कलंकित किया है।

du-mainवर्तमान सरकार को चाहिए ऐसे इतिहासकारों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही कर इनके द्वारा लिखित समस्त पुस्तकों को जब्त कर अब तक प्राप्त उन पुस्तकों की रॉयल्टी ब्याज़ सहित वसूली जाये।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मानव संसथान मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी ने भारतीय इतिहास को ठीक करने का प्रयास प्रारम्भ ही किया था, तब समस्त छद्दमों ने शोर मचाना शुरू कर दिया था कि इतिहास को भगवा कर रहे हैं।

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने उठाया मुद्दा

anurag-thakurइंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सदन में शून्यकाल के दौरान बीजेपी सदस्य अनुराग ठाकुर ने यह मामला उठाते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल के दौरान देश की शिक्षा को खत्म करने और इतिहास को तोड़ने मरोड़ने का प्रयास किया, जिसके लिए देश उसे कभी माफ नहीं करेगा। कांग्रेस सदस्यों के कड़े विरोध के बीच अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस पुस्तक के लेखकों में से एक मृदुला मुखर्जी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है।

उन्होंने कहा कि मृदुला और विपिन चंद्रा की पुस्तक ‘इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडीपेंडेंस’ में भगत सिंह को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताया जाना बेहद आपत्तिजनक है और उससे भी आपत्तिजनक यह बात है कि कथित दो विचारधाराओं के नाम पर ऐसी पुस्तक दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही है।

किताब में राहुल गांधी को बताया ‘करिश्माई नेता’

rahul-gandhi-new-picबीजेपी सदस्य ने कहा कि इसी पुस्तक में राहुल गांधी को ‘करिश्माई नेता’ बताया गया है, जो अपने आपमें एक मजाक है, क्योंकि उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा और इतिहास में अब तक की सबसे कम 44 सीटें ही उनकी पार्टी को मिली।

ठाकुर की इन टिप्पणियों पर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा प्रतिवाद किया और हंगामे के बीच ही अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की बैठक भोजनावकाश के लिए स्थगित कर दी थी।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही पुस्तक ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ के अध्याय संख्या 20 में दर्ज ‘भगत सिंह, सूर्य सेन और क्रांतिकारी आतंकवादी’ पर देशभर में भारी हंगामा शुरू हो गया है। इस अध्याय में देश के लिए अमर बलिदानी भगत सिंह और उनके साथियों को लेखक ने आतंकवादी बताया है। यह पुस्तक को दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रकाशित की है और इसके लेखक स्वर्गीय प्रोफेसर बिपिन चन्द्र, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, क. न. पनिकर और सुचेता महाजन हैं।

अनुराग ठाकुर ने उठाते हुए काँग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल के दौरान देश की शिक्षा को खत्म करने और इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का कार्य किया है, जिसके लिए देश उसे कभी माफ नहीं करेगा। इसके बाद बुधवार को लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच काफी नोकझोंक हुई।

काँग्रेस के कड़े विरोध के बीच भाजपा सदस्य ने कहा कि इस पुस्तक लेखकों में एक मृदुला मुखर्जी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जाँच चल रही है। उन्होंने कहा कि बिपिन चंद्र और उनके सहयोगी सह-लेखकों की इस पुस्तक में भगति सिंह को आतंकवादी बताया जाना बेहद आपत्तिजनक है।

ठाकुर ने कहा कि इससे भी आपत्तिजनक यह बात है कि कथित दो विचारधाराओं के नाम पर ऐसी पुस्तक दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही है। इस पुस्तक में सभी जगहों पर देश के आजादी के लिए लड़ने वाले क्रांतिकारियों के लिए आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल किया गया है। जैसे कि अध्याय के पहले पारा में लिखा है- 1920 के शूरू में क्रांतिकारी आतंकवादियों को आम माफी के तहत जेल से रिहा कर दिया। बावजूद इसके 1998 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यकारी निदेशक रहे श्याम कश्यप ने पुस्तक के दूसरे संशोधित संस्करण में लिखा है कि यह पुस्तक अकादमिक स्तर पर अपने विषय की सबसे अच्छी कृति मानी जाती है, यह सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक है। श्याम कश्यप ने बेहद चौंकाने वाली टिप्पणी की है कि यह पुस्तक निदेशालय का एक गौरव ग्रंथ है।

ज्ञात हो, पुस्तक के लेखक बिपिन चन्द्र, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, क. न. पनिकर और सुचेता महाजन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े हैं, और वामपंथी विचारधारा से संबंद्ध हैं। हालांकि बिपिन चन्द्र की मृत्यु हो गई है, पर शेष अभी भी कई पुस्तकों के लेखन में लगे हुए जो देश के इतिहास को हानि पहुँचा सकती है। इन सभी पर सरकार को नजर रखनी चाहिए।


अवलोकन करें :–

*चंद सिक्कों की खातिर देश के साथ अन्याय
*वामपंथी इतिहासकारों ने नहीं हल होने दिया अयोध्या विवाद
*उभरता विवाद तथाकथित इतिहासकारों की देन
*एनसीईआरटी के पाठ्यपुस्तकों में महपुरुषों की कमी