उत्तराखंड में जारी रहेगा राष्ट्रपति शासन

  • मामले में अगली सुनवाई तीन मई को होगी
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछे सात सवाल

d_11नई दिल्ली/देहरादून। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सर्चाेच्च अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर वह कौन से कारण थे जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार से इस मामले सात सवाल पूछे गए हैं। कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन जारी रहेगा, 29 अप्रैल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट नहीं होगा। मामले में अगली सुनवाई तीन मई को होगी।

राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट ने सात बिंदुओं पर सवाल पूछकर जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परंपरा के मुताबिक मनी बिल के पारित होने या खारिज होने पर सरकार का भविष्य तय होता है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के अलावा दूसरा कौन है जो ये कहे कि मनी बिल पारित हुआ है या खारिज हो गया है। क्या राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष को मतविभाजन के लिए आदेश कर सकते हैं क्योंकि दोनों ही संवैधानिक पदों पर आसीन हैं। अदालत ने अपने एक सवाल में पूछा कि क्या अनुच्छेद 175 (2) के तहत राज्यपाल ने मौजूदा हालात में सरकार को विश्वासमत हासिल करने के लिए कोई संदेश भेजा।

अदालत ने पूछा कि क्या विश्वासमत हासिल करने में देरी की वजह से ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। अदालत ने यह भी पूछा कि विनियोग विधेयक के पारित होने या खारिज होने के संबंध में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के क्या प्रावधान हैं। क्या विधानसभा में कार्यवाही के आधार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। बागी विधायकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायकों को अयोग्य करने की वजह से क्या अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक टिप्पणी में कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ही विधानसभा का मास्टर है, इस मामले से उत्तराखंड के मुख्य सचिव का कोई लेना देना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन जारी रहेगा, 29 अप्रैल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट नहीं होगा। मामले में अगली सुनवाई तीन मई को होगी।