न खाऊंगा न खाने दूँगा

मोदी सरकार ने हजारों करोड़ रुपये लुटने से बचाए

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigamनरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनावों से पहले कहा था कि ‘मै ना तो खाऊंगा और ना ही किसी को खाने दूंगा’। आज सरकार चलाते हुए प्रधानमंत्री मोदी को दो साल हो गए हैं और उन्होंने अपने वादे को सच साबित करते हुए एक ही साल में हजारों करोड़ रुपये लुटने से बचा लिए हैं। मोदी सरकार जिस प्रकार से सिस्टम को पारदर्शी और मजबूत बना रहे हैं उससे लग रहा है कि वे खजाने पर किसी का पंजा नही पड़ने देंगे। मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर के जरिये दलालों और बिचौलियों के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं।

DBT योजना से प्रति वर्ष बच रहे हैं हजारों करोड़

मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (DBT) योजना शुरू कर दी थी जिसमें गरीबों को सब्सिडी, छात्रों को छात्रवृत्ति, और वृद्धों को पेंशन उनके बैंक खाते में देनी शुरू कर दी थी, यद्यपि इन कामों की शुरुआत में जनता को काफी परेशानी हुई लेकिन अंततः यह काम बहुत जल्द समाप्त हो गया और सरकारी खजाने से हजारों करोड़ रुपये लुटने से बचने लगे।

  • मोदी सरकार ने केवल पहल योजना के जरिये जिसमें रसोई गैस कनेक्शन को आधार नंबर से और बैंक खाते से जोड़कर उपभोक्ताओं को सब्सिडी उनके बैंक खाते में देनी शुरू कर दी, इस योजना के बाद फर्जी गैस कनेक्शन हटा दिए गए और सरकारी खजाने से 14,672 करोड़ रुपये प्रति वर्ष लुटने से बचने लगे।
  • इस योजना का एक लाभ यह भी हुआ कि जो गैस सिलेंडर 1200-1300 रुपये में मिलता था वह करीब 500-600 रुपये में मिलने लगा, सब्सिडी के साथ यह सिलेंडर केवल 420 रुपये में मिलता है।
  • इससे एक और लाभ यह हुआ कि सिलेंडर का मार्किट प्राइस 1200-1300 रुपये से घटकर केवल 530 रुपये हो गया।
  • इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पैसे वाले लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील कर दी जिसे करीब 3 करोड़ लोगों ने मान लिया, लोगों से सोचा कि 100 रुपये की सब्सिडी छोड़ने में क्या हर्ज है, अगर 1200-1300 रुपये में सिलेंडर मिल रहा होता तो लोग सब्सिडी छोड़ने से पहले हजार बार सोचते लेकिन जब सिलेंडर का दाम 520 हो गया तो मोदी की अपील पर लोगों ने सब्सिडी लेना छोड़ दिया। इस योजना से भी देश के करीब 20 हजार करोड़ रुपये बच गए।
  • इसके अलावा केरोसिन योजना में सिर्फ हरियाणा से 6 लाख नकली लाभार्थी हटाये गए, दलालों ने नकली नामों से कॉपी बना रखी थी जिसकी पहचान DBT योजना से जुड़ने के बाद कर ली गयी और उन्हें हटा दिया गया।
  • इसके अलावा भोजन का कानून के अंतर्गत करीब 1.62 करोड़ नकली राशन कार्ड बनाये गए थे जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं था, इस योजना के जरिये भी सरकारी खजाने से 10 हजार करोड़ रुपये लुटने से बच गए।
  • मनरेगा योजना में भी फर्जी मजदूर बनाकर सरकारी रुपये की लूट की जाती थी, केवल 2015-16 में 3 हजार करोड़ की बचत की गयी है, आने वाले समय में और पैसा बचने वाला है।
  • बुढ़ापा पेंशन योजना में भी करीब 1.5 लाख नकली लाभार्थी बनाये गए थे, DBT योजना के जरिये जब वृद्धों की पेंशन उनके खातों में पहुँचने लगी तो ये 1.5 लाख नाम अपने आप कट गए क्योंकि ये लोग या तो पेंशन के हक़दार नहीं थी या इनका नाम ही फर्जी था।
  • इसके अलावा छात्रों की छात्रवृत्ति के पैसे लूटने के लिए भी नकली छात्रों के नाम जोड़े गए थे, केवल हरियाणा में 4.5 लाख नकली छात्रों के नाम काटकर हजारों करोड़ रुपये की बचत की गयी।

कुल मिलाकर मोदी सरकार ने केवल एक वर्ष में 40 से 50 हजार करोड़ रुपये की बचत की है, अगर मोदी सरकार ने ऐसा ना किया होता तो सरकारी खजाना लूटा जाता रहता और सरकारी खजाने को भरने के लिए मंहगाई बढ़ाई जाती, टैक्स का बोझ बढाया जाता, हर चीज मंहगी हो चुकी होती।

मोदी ने सच कहा था कि ‘ना खाऊंगा और ना ही खाने दूंगा’। हालाँकि मोदी सरकार की वजह से लाखों दलाल और बिचौलिए परेशान हैं, सिलेंडर ब्लैक करने वाले परेशान हैं, मनरेगा में नकली मजदूर बनकर पैसे खाने वाले दलाल और ठेकेदार परेशान हैं, फर्जी पेंशन लेने वाले परेशान हैं, फर्जी राशन लूटने वाले परेशान हैं, फर्जी छात्रवृत्ति लेने वाले परेशान हैं, यूरिया लूटने वाले परेशान हैं, ठेकेदार परेशान हैं, फर्जी NGO परेशान हैं। कुल मिलकर लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।