अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति माइक पेंस को उनके पदों से हटाने के लिए अभियान चलाया गया ‘फासीवाद खारिज करो’ अभियान

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से करीब दो माह पूर्व देश में राष्ट्रपति और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के विरुद्ध रिफ्यूज फासिज्म (फासीवाद खारिज करो) अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत कई जगह प्रदर्शन शुरू किए गए हैं, जिनमें न्यूयॉर्क और वाशिंगटन समेत देश के बड़ी आबादी वाले 25 शहर शामिल हैं। ये प्रदर्शन ट्रंप के लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

तीन नवंबर को मतदान वाले दिन तक लगातार चलने वाले इन प्रदर्शनों में राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति माइक पेंस को उनके पदों से हटाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप फासिस्ट अमेरिका तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पद से हटाना जरूरी है।
चुनाव पूर्व शुरू हुए इस आंदोलन का मकसद अमेरिका में नस्लवाद के बढ़ते कदमों को रोकना भी है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से कुछ अमेरिकी अश्वेतों को पुलिस द्वारा प्रताड़ित करने या गोली मारे जाने की घटनाओं के बीच लोगों में भारी आक्रोश है। माना जा रहा है कि इस आंदोलन से जुड़े लोग भी ट्रंप के विरुद्ध शुरू हुए ‘रिफ्यूज फासिज्म’ प्रदर्शनों में शामिल होंगे। जबकि लोगों में कोरोना से लड़ाई को लेकर ट्रंप की नीतियों के विरुद्ध पहले से नाराजगी है।

डेमोक्रेटों मानते हैं कि महामारी की वजह से देश में डोर टू डोर कैम्पेन आसान नहीं है। जबकि चुनावी दौरे जरूरी हैं। ट्रंप समर्थक टीवी प्रचार पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इस पर सवाल भी उठ रहे हैं। ऐसे में पिछले चुनावों की रणनीति इस बार कारगर साबित नहीं हो सकती है। इसे देखते हुए अश्वेत आंदोलन और कोरोना पर ट्रंप विरोधी भावना को चुनाव तक मजबूत बनाने के लिए ‘रिफ्यूज फासिज्म’ अभियान चलाया गया है।