क्या केजरीवाल का नाम भारत के काले इतिहास में दर्ज होगा?

RBL Nigamआर.बी.एल.निगम, दिल्ली ब्यूरो चीफ

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल किसी पर भी आरोप लगा देते हैं, बस कागज़ में किसी का नाम लिखकर दे दो तो वे आरोप लगा देते हैं, उन्होंने कागज में गुजरात CM लिखा देखकर मोदी पर रिश्वत कर आरोप लगा दिया और अब राज्य सभा सांसद सुभाष चंद्रा पर भी कालाधन रखने का आरोप लगा दिया, मोदी तो प्रधानमंत्री हैं और केजरीवाल के आरोपों पर कोई ध्यान देते नहीं हैं, लेकिन सुभाष चंद्रा ने केजरीवाल को उनकी औकात दिखाने का फैसला किया है और उनके ऊपर आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करवा दिया है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुभाष चंद्रा ने केजरीवाल पर मानहानि का मामला दर्ज करवाया, जानकारी के अनुसार जल्द ही  इस मामले की सुनवाई हो सकती है और केजरीवाल की फजीहत हो सकती है क्योंकि इससे पहले भी केजरीवाल पर कई मानहानि के मामले दर्ज हुए हैं और उनकी फजीहत हुई है।

arwind-kejriwal-newsयहाँ पर केजरीवाल की इसलिए भी मुश्किल बढ़ सकती है क्योंकि शिकायत में कहा गया है कि केजरीवाल बार बार सभी लोगों पर झूठे आरोप लगाते रहते हैं और दूसरों की छवि खराब करने का प्रयास करते हैं, उन्होंने आरोप लगाने का धंधा अपना लिया है। कोर्ट से कहा गया है कि इस बार केजरीवाल पर ऐसी कड़ी कार्यवाही की जाय कि वे आरोप लगाने की आदत छोड़ दें। डॉ चंद्रा किसी भी तरह की माफ़ी देने के मूड में दिखते हैं। और यदि कोर्ट ने भी इस बार सख्ती दिखाई इसमें दो राय नहीं कि  केजरीवाल को दो वर्षों की जेल भी हो सकती है।

केवल दिल्ली नहीं, बल्कि भारत के इतिहास में यह मुख्यमंत्री जितना अपमानित हुआ है, शायद ही कोई अन्य हुआ हो। अगर डॉ चंद्रा अपने उद्देश्य में सफल हो गए, भारत के काले इतिहास में केजरीवाल का नाम लिखा जाएगा।

गौर हो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों का चलन बंद किए जाने के बाद अपने बयान में कालेधन के नाम पर देश में एक बड़े ‘घोटाले’ का आरोप लगाया था।

इस दौरान दिल्‍ली के मुख्यमंत्री ने कालेधन के मामले में देश के कई शीर्ष उद्योगपतियों का नाम लिया था,जिसमें अन्‍य के अलावा डा. सुभाष चंद्रा का नाम भी शामिल था।

हरियाणा के रहने वाले सुभाष चंद्रा को हाल में ही राज्य सभा का निर्दलीय सांसद चुना गया है।उन्हें भाजपा ने अपना समर्थन दिया था। उनके खिलाफ एक दूसरे की घोर विरोधी होने के बावजूद कांग्रेस और इनेलो ने हाथ मिला लिए थे।