जाग उठा लोकतंत्र, सरकार की टांय-टांय फिस

18wb2qn0जैसा कि मैंने इससे पूर्व की खबर में मैंने कहा था कि ‘‘केन्द्र सरकार की सोचने की क्षमता समाप्त हो गयी है। इस बात की पुष्टि एनडीटीवी पर लगे बैन से स्पष्ट होती है। सभी को अवगत है कि हमारे देश में लोकतंत्र स्थापित है, जो कि चार स्तंभों पर खड़ा है। उन्हीं चार स्तंभों में से मीडिया एक है। जाहिर सी बात है कि उन चार स्तंभों में से एक स्तंभ भी हट जाता है, हटा दिया जाता है या खत्म हो जाता है तो कहने में कोई गलत नहीं है कि लोकतंत्र नीचे गिर जायेगा। अर्थात लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा। सरकार अपनी शक्ति का दुरूपयोग कर रही है। कहने का तात्पर्य है कि सरकार का यह कदम बेहद ही निंदनीय है, जिसकी आलोचना करना सही है। सरकार के इस फैसले का विरोध करना बिल्कुल सही होगा। क्योंकि एनडीटीवी पर बैन लगना, पत्रकारिता को समाप्त करना है। सभी को पता है कि समाचार सबसे ज्यादा सोशल मीडिया में वायरल होते हैं, तो क्या सरकार सोशल मीडिया को भी बंद करवा देगी। मीडिया को बैन करना या मीडिया को बंद करना, इससे स्पष्ट होता है कि यदि आने वाले समय में मीडिया न होगा तो आम जन को कैसे पता चलेगा कि सरकार क्या कर रही है। यूं भी कहा जा सकता है कि मीडिया के न होने से सरकार अपने मंत्रियों द्वारा किये गये घोटालों को छुपाने में भी सफल हो जाएगी। मीडिया को चुप करना अर्थात लोकतंत्र की समाप्ति करना, एक समान है। क्या सरकार भारत के लोकतंत्र को खत्म करके तानाशाही करने का फैसला कर चुकी है।’’

बहरहाल, आज वही हुआ, जिसका हमें अंदेशा था। जनता और मीडिया के सामने केन्द्र सरकार की टांय-टांय फिस हो गयी। या यूं कहें कि आज केन्द्र सरकार घुटनों के बल रेंग रही है। सामान्य अर्थ में कहें तो आज एनडी टीवी में लगा हुआ बैन हट चुका है। इस हार को सरकार की नाकामी कहा जाएगा। मीडिया से लड़ने चली थी केन्द्र सरकार तो इसे उसका निकम्मापन कहा जाएगा। दूसरी सटीक भाषा में हम साफ कह सकते हैं कि अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के गाल पर जोरदार तमाचा भी लगा है। खैर होना तो यही था, कुयें का मेंढ़क, कुयें में ही तो जाएगा। कहने का तात्पर्य है कि केन्द्र सरकार की हार होनी थी, जो हो गयी। एक बात अपने दिमाग में रख ले मोदी सरकार कि मीडिया से लड़ने से पहले स्वयं को उस काबिल तो बनाले। यहां हम इस बात को भी शामिल कर सकते हैं कि एनडी टीवी सुप्रीम कोर्ट में जाने के कारण भी सरकार के दिल में हाय-हाय मच गयी थी। क्योंकि जाहिर सी बात है, यदि सरकार के पास सुबूत होते, एनडी टीवी गलत होता तो सरकार ही जीतती। मगर ऐसा हुआ नहीं। क्योंकि सच्चाई को थोड़ा समय लगता है, लेकिन जीतती सच्चाई ही है, जो कि आज हुआ।

खैर बस अन्त में इतना कहा जा सकता है कि मोदी जी को शर्म का आंचल ओढ़ लेना चाहिए, जो कि सरकार ऐसे नासमझ फैसले करती हो। ऐसे फैसले जो गांव-घरों में छोटे बच्चे गलियों में खेला करते हैं। क्योंकि जब तक जनता है, मीडिया है और सत्य है, तब तक बुराई अपना कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकती।