व्यंग्य: इन्वेस्टमेंट

ललित शौर्य

Lalit Mohan Rathorआज का दौर इन्वेस्टमेंट का दौर है। बिना इन्वेस्ट किये यहाँ ठुल्लु भी हासिल नहीं किया जा सकता। यानिकी कुछ पाने के लिए कुछ न कुछ इन्वेस्ट तो करना ही पड़ेगा। अपनी नेतानगरी को ही देख लीजिये, हम नहाये धोये ,सफ़ेद कुर्ता-पैजामा पहने , चमकदार चेहरे-मुहरे वाले नेताओं को देख-देख चिढ़ते -कुढ़ते रहते हैं। लेकिन इस अवस्था को प्राप्त करने का उनका इन्वेस्टमेंट नहीं देखते। नेता बेवजह नेता नहीं बनता। उसके अंदर की आवाज उसे नेता बनाती है। (नेता का तात्पर्य अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस सरीखे महापुरुषों से नहीं है। बल्कि अब कोई भी सफेद कुर्ता -पैजामा पहने धरना-प्रदर्शन कर, रोड जाम करके स्वयं को नेता घोषित कर सकता है। ) उनकी अंदर की आवाज उन्हें खूब धन कमाने को कहती है, पीढ़ियों तक के लिए रोकड़ा जमा करने को कहती है।

बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमने को कहती है। घोटाले करने को कहती है। कोयले की दलाली करने को कहती है। हैलीकॉप्टर खाने की ,स्टाम्प पेपर चबाने को कहती है। जब ये सब उनकी अंतरआत्मा कहती है तो उनसे रहा नहीं जाता और वो नेता के रूप में अवतरित होकर भारत भूमि को खोखला करने के लिए स्वयं को इन्वेस्ट कर डालते हैं। एक (ना) लायक बन्दा जब धोखाधड़ी, सूदखोरी, चोरी डकैती, लूट, झूठ-फरेब , सपनों, दलाली, कामचोरी , अय्याशी का इन्वेस्टमेंट करता है , तब वो कहीं जाकर नेता बन पाता है। नेता बनने के लिए इन्वेस्टमेंट बहुत तगड़ा चाहिए। आजकल कोई ईमानदार व्यक्ति नेता बनने के सपने तक नहीं देख सकता । क्योंकि उसके पास इतना तगड़ा इन्वेस्टमेंट है ही नहीं।

अपने -अपने इन्वेस्टमेंट की बात है। देशवाशियों ने वोट का इन्वेस्टमेंट किया तो पांच साल के लिये अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा वाले मोदी जी मिले, दिल्ली वालों ने इन्वेस्टमेंट किया तो पांच साल के लिये रायता (सॉरी आदरणीय केजरीवाल जी मिले) मिला। छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट बड़ी पूंजी में तब्दील हो जाती हैं। बचपन में छोटी-मोटी चोरियां करने वाला बड़ा होकर तगड़ा अपराधी बन बैठता है। साल भर मस्ती करने वाला छात्र रिजल्ट में बड़ा सा अंडा पाता है। मतलब की जैसी करनी वैसी भरनी। जैसा इन्वेस्टमेंट वैसा रिजल्ट। देश को डुबोने का इन्वेस्टमेंट नेतालोग बहुत पहले कर चुके हैं, नाव में  छेद हो चुका है। पता नहीं कब डूबे। खैर हमें अपने सत्कर्मों का इन्वेस्टमेंट जरूर करना चाहिए ताकि नरक की आग से बच सकें और स्वर्ग में आराम से रह सकें। अभ्यास का इन्वेस्टमेंट कर के जड़मति भी सुजान हो सकता है। जिम के चक्कर लगाकर लल्लू भी जॉन हो सकता है। तो बुद्धिमानी के साथ खुद को इन्वेस्ट कीजिये और फायदा पाइए।