शिशु सुरक्षा दिवस 2020

हर साल 7 नवंबर को “शिशु सुरक्षा दिवस” मनाया जाता है। दुनियाभर में नवजात शिशु को उचित देखभाल ना मिलने व स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की कमी के कारण,उनकी जन्म लेने के तुरंत बाद ही मृत्यु हो जाती है।

  • एक छोटी सी लापरवाही व अनदेखी और जागरूकता में कमी, उस नवजात शिशु की जान ले लेती है। इसी कारणवश शिशु मृत्यु दर में वृद्धि होती है।
  • यह समस्या आमतौर पर शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में अधिक है। इसका एक ही कारण है कि ग्रामीण लोगों में जागरूकता की कमी, शिक्षित लोगों का अभाव, बुनियादी स्वास्थ्य सेवा का अभाव।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में हालात काफी खराब है। वहां तो लड़की के जन्म लेते ही उसकी हत्या कर दी जाती है। वहां लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रूण हत्याएं आम समस्या है।
  • कई घटनाएं ऐसी भी सामने आती है जिसमें माता-पिता बच्चे के पालन पोषण में सक्षम नहीं होने पर वे नवजात शिशु को झाड़ियों में फेंक देते हैं। या उन्हें हॉस्पिटल में ही छोड़ कर चले जाते हैं। ऐसी घटनाएं मनुष्य को शर्मसार करती है।

शिशु सुरक्षा दिवस क्यों मनाया जाता है

  • किसी भी दिवस को मनाने के पीछे विशेष कारण या उद्देश्य होते हैं।
  • शिशु सुरक्षा दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि लोगों को नवजात शिशुओं की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना तथा उनकी उचित देखभाल करना।
  • खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में यह हर साल होने वाली शिशु मृत्यु दर में वृद्धि को कम करने का एक प्रयास है।

सरकार द्वारा शिशु सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम

  • भारत में शिशु मृत्यु दर अन्य किसी विकासशील देशों की तुलना में अधिक है।
  • शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर कई कदम उठाए गए हैं। कई योजनाएं चलाई गई है, और चलाई जा रही हैं।
  • इनका एक ही मकसद है कि ग्रामीण क्षेत्रों शहरी क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं नाम मात्र शुल्क में उपलब्ध कराना।

ऐसी कौन-कौन सी योजनाएं है, जानिए

  1. सुकन्या समृद्धि योजना सर्वप्रथम यह योजना 22 जनवरी 2015 को हरियाणा में शुरू की गई इस योजना के तहत 0 से 10 वर्ष की आयु तक की कन्याओं के खाते सरकारी बैंक या डाकघर में न्यूनतम हजार रुपए से खोले जाते हैं। इस पर 9.1 प्रतिशत का सालाना ब्याज मिलेगा। इसके तहत अभिभावकों को हजार रुपया प्रत्येक माह 14 वर्ष तक जमा कराना होगा। यह खाता 21 साल में परिपक्व होगा।
  2. राजीव गांधी राष्ट्रीय शिशु पालन गृह योजना-इस योजना में कामकाजी माताओं के 6 माह की आयु से लेकर 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों की देखभाल की अवस्था प्रेत के माध्यम से की जाती है। प्रत्येक यूनिट में 25 बच्चों को रखा जाता है।
  3. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनायह योजना -1 जनवरी 2017 को केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा उनके शिशुओं के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार करने के लिए,गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव और स्तनपान की अवधि के दौरान देख-रेख एवं सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना है।
  4. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम- यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार द्वारा 14 नवंबर 2014 से प्रारंभ किया गया है। इस योजना का उद्देश्य है कि जन्म से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 4 विकार(4D-Birth detect,Deficiency,Disease,Development delays,Disabilities)व 12 गंभीर बीमारियों की समय से पहले पहचान कर उनका उपचार करना।
  5. मिशन इंद्रधनुष अभियान– इस अभियान के तहत शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में 2 साल तक के छूटे और प्रतिरक्षी बच्चों को 7 बीमारियों की रोकथाम करने वाले टीके लगाना। 7 अप्रैल 2015 को जयपुर में मिशन इंद्रधनुष का शुभारंभ किया गया।
  6. जननी सुरक्षा योजनायह योजना सितंबर 2005 में राजस्थान सरकार द्वारा लागू की गई है। इसका उद्देश्य राज्य में मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना। इस योजना का लाभ सभी गर्भवती महिलाओं जो सरकारी चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों में प्रसव कराती है।
  7. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन – इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना। स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में गुणवत्तापूर्ण बढ़ावा करना। यह योजना भारत सरकार द्वारा 2005 में शुरू की गई इसके तहत शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है।
  8. चिरायु-नन्ही जान हमारी शान’ कार्यक्रम – नवजात शिशु को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना। नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई है।
  9. किलकारी मोबाइल ऐप – यह एक ऐसा एप्लीकेशन है जो गर्भावस्था की दूसरी तिमाही से शिशु की 1 वर्ष की आयु तक शिशु जन्म व शिशु की देखभाल से संबंधित मुफ्त में 72 ऑडियो संदेश मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराता है।
    •बर्थ कंपेनिअन मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा यह योजना शुरू की है
  10. मां-बच्चा सुरक्षा कार्ड – यह योजना भारत सरकार द्वारा w.h.o. के सहयोग से की गई है। इस योजना के तहत बच्चों के विकास के लिए उसने स्थिति टीकाकरण सारणी एवं बच्चे की वृद्धि संबंधी उल्लेख नियम बातों की निगरानी रखने माताओं के लिए मां-बच्चा सुरक्षा कार्ड जारी किया गया है।

शिशु सुरक्षा दिवस(Infant Protection Day) पर आपके लये एक सन्देश. . .

  • कहीं ना कहीं देखा जाए तो यह समस्या का एक ही मूल उपाय है।
  • वह है, लोगों में जागरूकता लाना। यदि माता-पिता जागरूक रहें! हॉस्पिटल के कर्मचारी जागरूक रहें! किसी भी प्रकार की लापरवाही ना बरतें तो कई नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।
  • हमें “शिशु सुरक्षा दिवस” पर होने वाले विभिन्न कार्यक्रम में भाग लेना चाहिए। इसके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाई जानी चाहिए।
  • सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्न योजना में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना ताकि, वे लाभान्वित हो सके।