चार दिवसीय यात्रा शुरू करेंगे भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवाणे

रविवार को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी चार दिवसीय यात्रा शुरू

  • भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवाणे रविवार को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी चार दिवसीय यात्रा शुरू करेंगे।
  • जनरल नरवणे के दौरे को भारत के साथ सऊदी और यूएई के बीच गहराते रक्षा संबंध के तौर पर देखा जा रहा है।
  • खबर है कि नरवणे सऊदी अरब और यूएई में दो-दो दिन रहेंगे और दोनों देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
  • आर्मी चीफ नरवणे सऊदी में ‘नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी’ में एक कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। इससे पहले, भारतीय विदेश मंत्री एस.
  • जयशंकर भी 24 नवंबर को बहरीन और यूएई के तीन दिवसीय दौरे पर गए थे।

बता दें कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों का सऊदी अरब आना-जाना होता रहा है लेकिन ये पहली बार है जब कोई भारतीय सेना प्रमुख सऊदी अरब का दौरा करेगा। यह इस वर्ष नरवाणे की तीसरी विदेश यात्रा होगी, जिसके दौरान वह इन देशों में अपने समकक्षों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।  

नाराज होकर सऊदी ने पाकिस्तान से तीन अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए कह दिया

  • एक समय में पाकिस्तान सऊदी के बेहद करीब हुआ करता था लेकिन अब कश्मीर को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ गई है।
  • हाल ही में, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सऊदी को धमकी दी थी कि अगर वो कश्मीर पर नेतृत्व नहीं करेगा तो वो अपने साथ खड़े मुस्लिम देशों के साथ अलग से बैठक बुलाने पर मजबूर हो जाएंगे।
  • पाकिस्तान के इस तेवर से नाराज होकर सऊदी ने पाकिस्तान से तीन अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए कह दिया था।
  • इसके बाद सऊदी को मनाने के लिए पाकिस्तान ने अपने सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को भेजकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की लेकिन ये कोशिश असफल रही।
  • ऐसे में कहा जा रहा है कि इस दौरे से भारतीय सेना के लिए सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के रास्ते खुल जाएंगे जो अब तक पाकिस्तान से सऊदी की करीबी के कारण रुके हुए थे।
  • गौरतलब है कि भारत के बाद सऊदी सबसे दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है, ऐसे में दोनों देश मिलकर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी एक-दूसरे को सहयोग कर सकते हैं। 

आतंकवाद-रोधी गतिविधियों का विस्तार

नौ मिलियन भारतीय प्रवासियों में से अधिकांश लोग इन दोनों पश्चिम एशियाई देशों में रहते  हैं। ऐसे मं इस यात्रा को भारत के पश्चिम एशिया के बाहरी हिस्से में पहुंच के रूप में देखा जा रहा है। इस पहुंचे ने हाल के वर्षों में नाटकीय रूप से रक्षा और सुरक्षा सहयोग, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी गतिविधियों का विस्तार किया है।भारत ने अरब राज्यों के बीच संबंधों के सामान्यीकरण का स्वागत करते हुए कहा है कि इस तरह के कदम पश्चिम एशिया में शांति और विकास को वापस लाने के प्रयासों के अनुरूप हैं।