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ग्लोबल हंगर इंडेक्स लिस्ट में भारत 101वें स्थान पर

जीएचआई स्कोर की गणना चार पैमानों पर

  • जीएचआई स्कोर की गणना चार पैमानों पर की जाती है, जिसमें अल्पपोषण, चाइल्ड वेस्टिंग (पांच साल से कम उम्र के बच्चे जिनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से कम है), चाइल्ड स्टंटिंग (पांच साल से कम उम्र के बच्चे जिनकी उम्र के मुताबिक लंबाई कम है) और बाल मृत्यु दर (पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर)।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों में वेस्टिंग की हिस्सेदारी 1998-2002 के बीच 17.1 प्रतिशत से बढ़कर 2016-2020 के बीच 17.3 प्रतिशत हो गई।
  • रिपोर्ट में कहा गया है, “लोग कोविड-19 और भारत में महामारी संबंधी प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, दुनिया भर में सबसे अधिक बाल बर्बादी दर वाला देश है।”
  • रिपोर्ट के अनुसार पड़ोसी देश जैसे नेपाल (76), बांग्लादेश (76), म्यांमार (71) और पाकिस्तान (92) भी ‘खतरनाक’ भूख श्रेणी में हैं, लेकिन भारत की तुलना में अपने नागरिकों को खिलाने में बेहतर प्रदर्शन किया है।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल ने भारत से बेहतर प्रदर्शन किया 2021 की रैंकिंग के अनुसार

  • वैश्विक भुखमरी सूचकांक यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) 2021 भारत 116 देशों की लिस्ट में भारत 101वें स्थान पर खिसक गया है। भारत उन 31 देशों में भी शामिल है जहां पर भुखमरी की समस्या काफी गंभीर मानी गई है। 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था। 2021 की रैंकिंग के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल ने भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है।
  • भूख और कुपोषण पर नज़र रखने वाली ग्लोबल हंगर इंडेक्स की वेबसाइट ने गुरुवार को कहा कि चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया है।
  • आयरिश सहायता एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ़ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को “खतरनाक” बताया गया है। 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था। अब 116 देशों के साथ यह 101वें स्थान पर आ गया है।
  • भारत का जीएचआई स्कोर भी गिर गया है। यह साल 2000 में 38.8 था, जो 2012 और 2021 के बीच 28.8-27.5 के बीच रहा।