वित्त वर्ष 2020-21 के शुरुआती पांच महीनों में मनरेगा कार्ड जारी किए गए बीते सात सालों में 83.02 लाख नए कार्ड वार्षिक बढ़ोतरी से अधिक है

  • मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के शुरुआती पांच महीनों (अप्रैल से सितंबर) के दौरान 83 लाख से अधिक नए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कार्ड जारी किए गए हैं.
  • एक अप्रैल से तीन सितंबर तक की यह संख्या (83.02 लाख नए कार्ड) बीते सात सालों में हुई वार्षिक बढ़ोतरी से अधिक है, जिसके आंकड़े मनरेगा पोर्टल पर उपलब्ध है.

रिपोर्ट के अनुसार, इन 83.02 लाख नए रोजगार कार्डों में से सबसे अधिक 21.09 लाख कार्ड उत्तर प्रदेश में जारी किए गए हैं. इसके बाद बिहार में 11.22 लाख, पश्चिम बंगाल में 6.82 लाख, राजस्थान में 6.58 लाख और मध्य प्रदेश में 5.56 लाख कार्ड जारी किए गए हैं. इन्हीं राज्यों में सबसे अधिक संख्या में प्रवासी मजदूर लौटे हैं.

प्रतिशत के लिहाज से देखें तो उत्तर प्रदेश में नए रोजगार कार्ड में सबसे अधिक 172 फीसदी की वृद्धि हुई है. पिछले साल 7.72 लाख की तुलना में इस बार 21.09 लाख नए कार्ड जारी किए गए हैं. इसके बाद आंध्र प्रदेश में 154 फीसदी और राजस्थान में 69 फीसदी की वृद्धि हुई है.

इससे पहले हाल ही में जारी एक रिपोर्ट से पता चला था कि कोरोना महामारी के बीच मनरेगा योजना में महिलाओं की भागीदारी आठ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों के दौरान मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी 52.46 फीसदी तक रह गई.

मनरेगा योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी ग्रामीण परिवार को एक जॉब कार्ड दिया जाता है, जिसमें घर के सभी सदस्यों के नाम और फोटो होते हैं, जो काम कर सकते हैं.

मनरेगा नियमों के अनुसार, अगर कोई परिवार स्थायी तौर पर शहरी इलाके में बस गया है या किसी और ग्राम पंचायत में चला गया है या फिर उनका कार्ड डुप्लीकेट पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में जॉब कार्ड को रद्द किया जा सकता है.

आंकड़ों से पता चला है कि इस वित्त वर्ष में अब तक 10.39 लाख मनरेगा जॉब कार्ड रद्द किए गए हैं. 2019-2020 में 13.97 लाख कार्ड रद्द किए गए थे.

मालूम हो कि तीन सितंबर 2020 तक कुल जॉब कार्डों की संख्या 14.36 करोड़ है