महिला ने डीजीपी पर लगाया यौन शोषण का आरोप

कहा, 12 वर्षों से बीएस सिद्धू के दबाव में दर्ज नहीं हो पाई उसकी एफआईआर
महिला ने बीएस सिद्धू से अपने और अपने परिवार को खतरा भी बताया

d_14देहरादून। रेलवे की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि वह इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पिछले 12 वर्षों से कोशिश कर रही है लेकिन बीएस सिद्धू के दबाव में उसकी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। उसने अपने को बीएस सिद्धू से खतरा भी बताया।

उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में यशोवन टावर टीएच कटारिया मार्ग माहिम वेस्ट मुंबई निवासी एक महिला ने बताया कि वह 2004 में रेवले मुंबई में तैनात थी। उसने बताया कि उस समय उत्तराखंड के मौजूदा डीजीपी बीएस सिद्धू डेप्यूटेशन पर आरपीएफ में मुम्बई आए थे। उसने आरोप लगाया कि एक दिन उन्होंने उसे अपने केबिन में बुलावाया, जब वह उनके कमरे में गई तो बीएस सिद्धू कंप्यूटर पर अश्लील फिल्म देख रहे थे और उन्होंने मुझे भी इस फिल्म देखने का इशारा करते हुए अपने करीब आने और डीनर पर साथ चलने को कहा।

महिला ने कहा कि वह यह सब देख और सुनकर भौंचकी रह गई और उन्हें लताड़ते हुए उस कमरे से बाहर जाने लगी तो उसे रोक लिया और कहा कि किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा। महिला का कहना है कि वह हिम्मत कर सिद्धू को धकियाते हुए कमरे से बाहर आ गई, आफिस के लोग बाहर खड़े होकर सब तमाशा देख रहे थे। उसका कहना है कि बीएस सिद्धू के डिनर के प्रस्ताव को जब ठुकरा दिया और साथ जाने से मना कर दिया तो उसी दिन से उसका मानसिक उत्पीड़न शुरु हो गया। उसका मुंबई से पूना तबादला कर दिया गया, इस दौरान उसने बीएस सिद्धू के द्वारा किए गए यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न के विरुद्ध जगह-जगह उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र प्रेषित किए।

उसका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन विशाखा बनाम भारत सरकार के निर्देशानुसार बीएस सिद्धू ने अपने पद से जूनियर अधिकारियों की एक जांच कमेटी को आधार बनाकर सर्विस से उसे बर्खास्त कर दिया। उसका कहना है कि जांच कमेटी बीएस सिद्धू से उच्चाधिकारियों की बननी चाहिए थी, लेकिन सिद्धू द्वारा अपने से कनिष्ठ अधिकारियों की जांच कमेटी बनाई गई। उसका कहना है कि बीएस सिद्धू उच्च पद पर आसिन थे, इसलिए उनके दबाव में उसकी रिपोर्ट भी थाने में नहीं लिखी गई। महिला ने बताया कि तब से वह अपनी हक की लड़ाई लड़ रही है। उसने कहा कि उत्तराखंड शासन में भी इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।

इस अप्रैल माह में उसे उत्तराखंड शासन से फोन आया कि दून आकर बयान दर्ज कराएं। इसके लिए बकायदा नौ अप्रैल को रेल का टिकट भी कराया गया, लेकिन बाद में वह टिकट रद कर दिया गया। उसका कहना है कि वह बीएस सिद्धू को किसी भी कीमत पर माफ करने वाली नहीं है। सिद्धू को किए अपराध की सजा दिनाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ूंगी, उल्लेखनीय है कि बीएस सिद्धू 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उसने अपने को बीएस सिद्धू से खतरा भी बताया। उसका कहना है कि यदि उसे और उसके परिवार के किसी भी सदस्य के साथ कुछ भी होता है तो उसके लिए बीएस सिद्धू और उनके गुर्गे पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे।