वनाग्नि की घटनाओं से निपटने में फेल साबित हो रहा वन महकमा

पर्वतीय क्षेत्र में इन दिनों आग लगने से धधक रहे हैं जंगल

fire-in-forestदेहरादून। प्रदेश में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही हैं, इससे वन संपदा को तो नुकसान हो ही रहा है साथ ही पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग कोई ठोस कार्ययोजना बना पाने में हर वर्ष फेल साबित होता है। प्रदेश में हर वर्ष वनाग्नि की घटनाओं से बड़ा नुकसान होता है, लेकिन वन विभाग इन घटनाओं से कोई सबक नहीं ले पाता है।

प्रदेश में इस वर्ष 21 अप्रैल तक वनाग्नि की घटनाओं से 743,990.00 की धनराशि का नुकसान होने का आंकलन वन विभाग द्वारा किया गया है। वन प्रभाग उत्तरकाशी की मुखेम रेंज में फरवरी माह में वनाग्नि से 2 महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है। वन प्रभाग नैनीताल की नैनौरेंज में 14 अप्रैल को वनाग्नि की चपेट में आने से 1 व्यक्ति घायल हो गया था। वन प्रभाग चमोली के केदारनाथ जीव विहार की गोपेश्वर रेंज में 26 मार्च को वनाग्नि से एक व्यक्ति घायल हो चुका है। चमोली वन प्रभाग के केदारनाथ जीव विहार की धनपुर रेंज में 16 अप्रैल को वनाग्नि की चपेट में गौशाला के आ जाने से 7 पशु जलकर मर चुके हैं।

इसके अलावा वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। पहाड़ के जंगल इन दिनों आग से धधक रहे हैं और विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। वन विभाग के अधिकारी फील्ड में कम ही दिखते हैं, जिन कर्मियों को वनाग्नि पर काबू पाने की जिम्मेदारी सौंपी गई उनके पास संसाधनों का अभाव बना हुआ है जिस कारण वे समय रहते कुछ कर नहीं पाते हैं। वन विभाग द्वारा जो क्रू स्टेशन बनाए गए हैं उनमें गिने-चुने कर्मचारी तैनात किए गए हैं।