खानाबदोश जिंदगी जीने को मजबूर हैं वन गुर्जर

बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है मयस्सर

Van-Gurzar-(2) देहरादून। राज्य में वन गुर्जर बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। इनके हालात देखकर ही इन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिशों का अंदाजा लगाया जा सकता है। वन गुर्जर वन कानूनों के जाल में उलझ कर रह गए।

राजाजी नेशनल पार्क बाघ और हाथी समेत कई वन्य जीवों का बसेरा है। वन्य जीवन के संरक्षण की कोशिशें भी इस पार्क में पिछले कुछ सालों में सफल साबित हुई हैं। साथ ही वन गुर्जरों के तौर पर इंसानी जीवन भी इन जंगलों में सदियों से सांसें लेता रहा है, लेकिन जब से वन्य जीवन को बचाने के लिए पार्क प्रशासन के कायदे कानूनों का शिकंजा कसना तेज हुआ, तब से वन गुर्जरों के सामने परेशानियां खड़ी हो गई। हालांकि इन लोगों की जंगल पर निर्भरता कम करने के लिए 1991 में ईको डेवलपमेंट प्लान योजना भी बनी थी। यह योजना वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने के साथ ही शुरू की गई थी, ताकि वन कानूनों के साथ वन गुर्जर समाज का विकास हो सके लेकिन शुरुआती कुछ सालों में ही यह योजना दम तोड़ गई।

Van-Gurzarआज इस योजना के तहत बनाई गई एक भी ईको डेवलपमेंट समिति अस्तित्व में नहीं है। इस योजना का एक उद्देश्य वन गुर्जरों को सुविधाएं देकर विकास की मुख्यधारा से भी जोड़ना था, लेकिन अब ना तो वन गुर्जरों के हाथ में जंगल हैं और ना ही उन्हें सुविधाएं मिल सकी हैं। वन गुर्जर आज भी खानाबदोश जिंदगी जीने को मजबूर हैं। राजाजी नेशनल पार्क के आस-पास बफर जोन में करीब वन गुर्जरों की करीब 20 हजार की बसावट है, जिनमें मोहंड रेंज, मोतीचूर और चीला रेंज प्रमुख हैं। इन सभी इलाकों में 90 फीसदी वन गुर्जर आज भी खानाबदोश जीवनयापन कर रहे हैं।

मुख्यतौर पर पशुपालन के जरिए अपनी आजीविका चलाने वाले इन लोगों के सर्दियों के छह महीने राजाजी पार्क के इन्हीं इलाकों में गुजरते हैं, जबकि गर्मी शुरू होते ही वे पहाड़ों का रुख करते हैं। ऐसे में इस समाज के बच्चे प्राईमरी शिक्षा से भी वंचित रह जाते हैं। पार्क प्रशासन के अधिकारी भी मानते हैं कि वन गुर्जरों की जंगलों पर निर्भरता कम करने की योजना ठीक से आगे नहीं बढ़ सकी। राजाजी नेशनल पार्क के अधिकारियों का कहना है कि अब पार्क क्षेत्र में वन्य जीव संरक्षण की योजनाओं की सफलता को देखते हुए इस ओर भी ध्यान दिया जा रहा है। यही वजह है कि इस योजना को दोबारा शुरू करने की तैयारी हो रही है, जिसके तहत वन गुर्जरों को रसोई गैस, केरोसीन उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।