कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटाया

राष्ट्रपति शासन की घोषणा को चुनौती देने वाली अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत की याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए जिन तथ्यों पर विचार किया गया उनका कोई आधार नहीं है। पीठ में न्यायमूर्ति वीके बिष्ट भी हैं। कांग्रेस के नौ असंतुष्ट विधायकों की सदस्यता समाप्त किये जाने को बरकरार रखते हुए अदालत ने कहा कि उन्हें अयोग्य होकर दलबदल करने के ‘संवैधानिक गुनाह’ की कीमत अदा करनी होगी।

UK0003देहरादून। मोदी सरकार को बड़ा झटका देते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा को आज निरस्त कर दिया और हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया जिन्हें 29 अप्रैल को अपना बहुमत साबित करने को कहा गया है। अनुच्छेद 356 के तहत 27 मार्च को की गयी घोषणा के लिए केंद्र से नाराजगी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाना उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत है।

रावत सरकार की बहाली का आदेश देते हुए अदालत ने अपदस्थ मुख्यमंत्री को 29 अप्रैल को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले में जो 18 मार्च को शुरू हुआ और दस दिन से कम समय के भीतर घोषणा की गयी जिससे ऐसे हालात बने जिसमें अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत किया गया है।’’ अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि यह नहीं समझा जाना चाहिए कि हमने कहा है कि कोई अकेली घटना अनुच्छेद 356 लगाने के लिए जिम्मेदार नहीं होगी।’’ पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति शासन की घोषणा से पहले की यथास्थिति बनाई जाएगी, जिसका अर्थ हुआ कि याचिकाकर्ता (रावत) के नेतृत्व वाली सरकार बहाल होगी।

UK0002हालांकि अदालत ने कहा कि स्थिति बहाल की जा रही है और याचिकाकर्ता को 29 अप्रैल को शक्ति परीक्षण करके विश्वास मत हासिल करना चाहिए। अदालत ने अपने फैसले पर स्थगन लगाने की केंद्र के वकील की मौखिक अर्जी को भी खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि हम अपने ही फैसले को स्थगित नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आप उच्चतम न्यायालय जा सकते हैं और स्थगन आदेश प्राप्त कर सकते हैं।’’ इस मुद्दे के खंडपीठ के सामने आने से पहले एकल न्यायाधीश ने 18 मार्च को विनियोग विधेयक के पारित होने पर उठे विवाद के बाद 28 मार्च को बहुमत साबित करने का आदेश दिया था। भाजपा और असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों का दावा था कि उक्त धन विधेयक सदन में गिर चुका है और सरकार बहुमत खो चुकी है। सदन में बहुमत साबित करने से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने संवैधानिक व्यवस्था के चरमराने का हवाला देते हुए 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगा दिया। हरीश रावत ने खंडपीठ में राष्ट्रपति शासन को लागू करने की घोषणा को चुनौती दी थी। सुनवाई के आखिरी तीन दिन के दौरान अदालत ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ कई कड़ी टिप्पणियां कीं। अदालत ने सोमवार को कहा था कि शक्ति परीक्षण से महज एक दिन पहले अनुच्छेद 356 के तहत घोषणा करना लोकतंत्र की जड़ों को काटने के समान है। अदालत ने इसके बाद कहा कि सरकार अव्यवस्था फैला रही है और एक निर्वाचित सरकार की अनदेखी कर रही है।

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए हरीश रावत ने कहा, ‘पूरा देश जानता है कि उत्तराखंड की राजनीतिक अस्थिरता के पीछे कौन है, राज्य में भाजपा अप्रासंगिक हो गई है।’ इस बीच, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने आज उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाये जाने के उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि शक्ति के बल पर प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या करने वालों को अदालत ने सबक सिखा दिया है। प्रदेश पार्टी अध्यक्ष उपाध्याय ने कहा, ‘हम उच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हैं। जिन लोगों ने शक्ति के बल पर उत्तराखंड में लोकतंत्र की हत्या की थी, उन्हें उच्च न्यायालय ने अपने फैसले से सबक सिखा दिया है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि इस फैसले से जनता का न्यायपालिका में विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी फिलहाल उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले की प्रति मिलने का इंतजार कर रही है और उसका अध्ययन करने के बाद ही पार्टी अपने अगले कदम के बारे में विचार करेगी।

दूसरी ओर, भाजपा ने कहा है कि उत्तराखंड में हरीश रावत के पास बहुमत नहीं है और यह 29 अप्रैल को साबित हो जाएगा। पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य उच्च न्यायालय गत तीन दिनों से जिस तरह की टिप्पणी कर रहा था, उसके चलते हमें आदेश से हैरानी नहीं हुई है।

उधर, उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाये जाने के उच्च न्यायालय के निर्णय को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने आज कहा कि यह फैसला भविष्य में देश के लिये एक नजीर साबित होगा। यहां कुंजवाल ने कहा, ‘‘उत्तराखंड उच्च न्यायालय का यह फैसला केंद्र सरकार के मुंह पर एक तमाचा है जिसने तानाशाही से एक चुनी हुई सरकार को भंग करने का प्रयास किया। अदालत का यह निर्णय बिल्कुल सही है और मैं उसका स्वागत करता हूं।’’ उन्होंने कहा कि न्यायालय का यह फैसला भविष्य में देश के लिये एक नजीर साबित होगा।

नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 27 मार्च को प्रदेश में लागू किये गये राष्ट्रपति शासन को हटाये जाने, विधानसभा में 18 मार्च की स्थिति बहाल करने और 29 अप्रैल को सदन में शक्ति परीक्षण करने का आदेश दिया है। पिछले सप्ताह प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के निर्णय को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुखिया हरीश रावत ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। यह पूछे जाने पर कि क्या बहुमत परीक्षण में उनके द्वारा विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किये गये कांग्रेस के नौ बागी विधायक भी हिस्सा लेंगे, कुंजवाल ने कहा कि इसके बारे में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।


उच्च न्यायालय का आदेश उत्तराखंड के लोगों की विजय: रावत

UK0001  देहरादून। उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने को रद्द करने और कांग्रेस की सरकार बहाल करने के राज्य के उच्च न्यायालय के फैसले को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश के लोगों की विजय करार दिया है। उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रावत ने कहा, ”यह उत्तराखंड के लोगों की विजय है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। पूरा देश जानता है कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के पीछे कौन था।’’

केंद्र सरकार द्वारा राज्य में 27 मार्च को अनुच्छेद 356 लागू किये जाने पर तीखा प्रहार करते हुए उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू करना उच्चतम न्यायालय की ओर से निर्धारित कायदे के उलट है। रावत ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।