देवभूमि में दानवीपन

ऊधमसिंह नगर में बढ़ते अपराध में रोक लगाने की बेहद आवश्यकता है। यदि पुलिस प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठाता तो हर जिला अपराध से जकड़ा हुआ होगा। अंत में बस इतना ही कहा जा सकता है कि देवभूमि को दानवभूमि बनने में भी देर नहीं लगेगी।

C.S.-Bhatt-(1)राज्य स्थापना दिवस को सोलहवां साल लग चुका है। बीते इन सालों में इस नवगठित प्रदेश का कितना विकास हुआ। यह भी किसी से छिपा नहीं है। जितना यहां का विकास हुआ, उससे कही अधिक गति से इस प्रदेश के कदम विनास की बढ़े हैं। राज्य गठन से पहले अपराध की गतिविधियां बहुत कम थीं, लेकिन इन सोलह सालों में तो अपराध का ग्राफ गुणात्मक गति से बढ़ा है। पहले यहां अपराध के नाम पर छोटे-छोटे लड़ाई-झगड़े ही होते थे। जिनमें से अधिकांश या तो पंचायतों में ही सुलझा लिये जाते थे, या पटवारी के दबाव में खत्म हो जाते थे। राज्य में चोरी, बलात्कार, लूट आदि की घटनायें बहुत तेजी से बढ़ी हैं। विशेषकर देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में अपराध की संख्या ज्यादा पायी गयी है। बहरहाल, ताजा आंकड़ों के अनुसार ऊधमसिंह नगर में अपराध का गढ़ बन गया है। जो इस अंक में दिखाया गया है कि ऊधमसिंह नगर में कितने छोटे-बड़े अपराध हुये हैं। हालांकि इस बात से पुलिस प्रशासन भी अंजान नहीं है। अपराध की बढ़ती गति को देखकर डीआईजी ने भी पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। देखना यह है कि पुलिस प्रशासन कितने सख्त कदम उठाता है, कितना इसका प्रभाव पड़ता है। कहीं ऐसा न हो जाय कि हर जिले में दानवीपन होने लगे और देवभूमि का नाम बदलकर दानवभूमि रखना पड़े। बहरहाल, सवाल यह है कि देवभूमि में दानवीपन इसी तरह बढ़ेगा या इस पर लगाम कसी जाएगी।


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