देवभूमि समाचार - Devbhoomi Samachar

हरियाणा में भाजपा सरकार को अस्थिर करने का कांग्रेस का घिनौना खेल

RBL Nigamआर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर भारतीय जनता पार्टी पर एक आदमी को दूसरे से लड़ाने वाली पार्टी बताते हैं, वे अपनी सभी रैलियों में यह बात कहते हैं लेकिन पिछली दो घटनाओं से साबित हो गया है कि दरअसल कांग्रेस ही एक आदमी को दूसरे से लड़ाने का काम करती है, यही हाल कर्नाटक में देखा गया जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने तमिल नाडू को कावेरी नदी का पानी देने से मना कर दिया और यही काम पंजाब में करने जा रही है।

वर्ष 2004 में उस समय की कांग्रेस सरकार ने एकतरफा बिल पारित किया था जिसमें हरियाणा को SYL नहर का एक भी बूँद पानी ना देने की बात कही गयी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब को हरियाणा को भी पानी देना चाहिए वरना यहाँ के लोग कैसे जियेंगे।

q1ewls3dअब कांग्रेस की बेरहमी देखिये, वह अभी भी हरियाणा के लोगों को एक भी बूँद पानी ना देने पर अड़ी है और लोगों को प्यासा मार देने चाहती है, इसी मुद्दे पर कांग्रेसी सांसद अमरिंदर सिंह ने लोकसभा से भी इस्तीफ़ा दे दिया और अब पंजाब में अपने सभी 42 विधायकों से इस्तीफ़ा दिलवा दिया। यह घिनौना खेल इस लिए खेला जा रहा है क्योंकि हरियाणा में भाजपा की सरकार है और उसे किस तरह अस्थिर किया जाए।

अब कांग्रेसी नेता पंजाब में धरना प्रदर्शन करेंगे और वहां के लोगों में गुस्सा पैदा करेंगे, हो सकता है कि कर्नाटक और तमिलनाडु की तरह पंजाब और हरियाणा में भी तोड़ फोड़ और दंगे फसाद शुरू हो जाएं और अगर ऐसा होता है तो इसकी जिम्मेदार कांग्रेस ही होगी।

अच्छा होता कि कांग्रेस कहती, पंजाब और हरियाणा को आपस में मिलकर पानी का इस्तेमाल करना चाहिए, दोनों भारत के ही राज्य हैं तो दोनों राज्यों के निवासी आपस में भाई-भाई हैं लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं कर रही है और दोनों राज्यों के लोगों को बांटने और दंगा-फसाद करवाने का इंतजाम कर रही है।
पंजाब में विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सभी 42 विधायकों ने शुक्रवार को सतलज-यमुना नदी के जल बंटवारे पर 2004 के एक कानून के संबंध में राष्ट्रपति के संदर्भ पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लेकर अपना-अपना इस्तीफा सौंप दिया। कांग्रेस ने 13 नवम्बर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में पंजाब का पक्ष मजबूती से प्रस्तुत नहीं किया। पार्टी का कहना है कि इसी वजह से सर्वोच्च न्यायालय ने सतलज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर में हरियाणा को पानी देने से मना करने वाले पंजाब विधानसभा में पारित 2004 के एक कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया।

सत्ताधारी अकाली दल ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 16 नवम्बर को पंजाब विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है।

विपक्ष के नेता चरणजीत सिंह चन्नी समेत कांग्रेस के सभी 42 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष चरणजीत सिंह अटवाल की अनुपस्थिति में विधानसभा के सचिव शशि लखनपाल मिश्रा को अपने इस्तीफे सौंप दिए।

लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह, राज्यसभा की सदस्यता से त्याग पत्र देने वाले प्रताप सिंह बाजवा और अम्बिका सोनी पार्टी विधायकों के साथ थे।

अमरिंदर सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, “मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पंजाब के लोगों के हितों की रक्षा करने में विफल हुए हैं। इस मुद्दे पर हम राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।”

उन्होंने कहा, “मैं संसद में नहीं हूं और हमारे विधायक विधानसभा में नहीं हैं। हम लोगों के पास जाएंगे।”

उधर, मुख्यमंत्री बादल ने कहा, “राज्य के बाहर कोई जल प्रवाह नहीं होने देने का हमारा निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन नहीं है। पंजाब के लिए उसकी नदियों के जल को बचाना सबसे महत्वपूर्ण बात है। हम भागने की जगह राज्य के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेंगे।”

एक वरिष्ठ अकाली नेता ने आईएएनएस से कहा कि सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल ने 8 दिसंबर से राज्यव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया है और एसवाईएल मुद्दे पर शीर्ष अदालत की सलाह स्वीकार नहीं करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की जाएगी।