कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को बड़ा झटका

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने उनसे भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी वापस ले ली है।

  • उनके स्थान पर श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल को अतिरिक्त दायित्व दिया गया है।
  • सचिव श्रम हरबंस सिंह चुघ की ओर से मंगलवार देर शाम इसके आदेश जारी किए गए। ये आदेश ऐसे समय में हुआ है, जब भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड लगातार विवादों में है।
  • हरक सिंह रावत बतौर श्रम मंत्री बोर्ड अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाले हुए थे।
  • उन्होंने श्रम मंत्री बनने के कुछ समय बाद ही बोर्ड की कमान अपने हाथ में ली थी। इसके साथ ही सचिव पद पर  दमयंती रावत को जिम्मेदारी मिली थी।
  • दमयंती के  शिक्षा विभाग से बिना एनओसी प्रतिनियुक्ति पर बोर्ड सचिव का पद संभालने को लेकर विवाद भी हुआ था।
  • शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे और श्रम मंत्री के बीच विवाद की स्थिति भी बनी थी। अब श्रम मंत्री से बोर्ड अध्यक्ष की जिम्मेदारी वापस लेने के सरकार के फैसले को चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है। 

पद संभालते समय हुआ था विवाद

  • बोर्ड अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी श्रम मंत्री हरक सिंह ने 2017 में संभाली। उस समय भी विवाद खड़ा हुआ।
  • क्योंकि 2005 में गठित हुए बोर्ड में पहले अध्यक्ष पद का दायित्व सचिव श्रम ही संभालते थे। बोर्ड में सचिव का दायित्व श्रमायुक्त के पास रहता था।
  •  2017 में बोर्ड में बड़ा बदलाव हुआ। इसे एक्ट का उल्लंघन तक करार दिया गया।  

साइकिल बांटने को लेकर भी विवाद

  • 2017 के बाद से ही बोर्ड का कामकाज लगातार विवादों में रहा। पिछले दिनों देहरादून के गांधी ग्राम में आम आदमी पार्टी की टोपी पहने हुए लोगों के साइकिल बांटने पर भी विवाद खड़ा हुआ।
  • जो साइकिलें बांटी गईं, उनमें बोर्ड का लोगो लगा हुआ था।
  • शिकायत सीएम त्रिवेंद्र रावत तक पहुंची, तो उन्होंने जांच के निर्देश दिए। 

एनजीओ को लाभ पहुंचाने का लगा आरोप  

  • बोर्ड के अध्यक्ष श्रम मंत्री हरक सिंह रावत की पुत्रवधू के एनजीओ को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी जून 2020 में दायर हुई।
  • इस मामले में श्रम मंत्री हरक सिंह रावत, पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं, सचिव श्रम और केंद्र सरकार के श्रम विभाग को भी नोटिस जारी हुए।
  • यह मामला अभी उत्तराखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

वित्तीय रूप से बेहद मजबूत है बोर्ड

  • राज्य में भवन निर्माण मानचित्र पास कराने का एक प्रतिशत लेबर सेस बोर्ड के खाते में ही आता है। बोर्ड के खाते में अभी 100 करोड़ से ज्यादा का बजट है।
  • भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों को उपकरण, साइकिल, सिलाई मशीन और उनके बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाती है।
  • लॉकडाउन में बड़े पैमाने पर राशन किट और एक एक हजार रुपये की आर्थिक मदद भी बोर्ड की ओर से ही दी गई।