विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां चार महीने के न्यूनतम स्तर पर

business-newsविनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां अप्रैल में चार महीने के न्यूनतम स्तर पर आ गयी। एक सर्वे के अनुसार इसका कारण अप्रैल में नये आर्डर का स्थिर होना है। इससे पहले मार्च महीने में इसमें मजबूती दर्ज की गयी थी। इससे रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों को नीचे रखने का दबाव बनेगा। विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन का समग्र संकेत देने वाला निक्की इंडिया मैनुफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल में घटकर 50.5 पर आ गया जो मार्च महीने में 52.4 था। यह पिछले चार महीने में व्यापार स्थिति में सबसे कमजोर सुधार का संकेत देता है। पीएमआई का 50 से उपर होना विस्तार का संकेत है जबकि इससे नीचे यह गिरावट को बताता है।

रिपोर्ट के लेखक और मार्किट के अर्थशास्त्री पॉलीयाना डी लीमा ने कहा, ‘‘भारत के लिये पीएमआई आंकड़ा उत्पादन विस्तार में नरमी को बताता है। मार्च महीने में मजबूत वृद्धि के बाद यह गिरावट दर्ज की गयी है जो यह संकेत देता है कि नये कार्यों के मामले में वृद्धि थम सी गयी है। लगातार तीन महीने अच्छी वृद्धि के बाद अप्रैल महीने में घरेलू विनिर्माताओं ने नये आर्डर में लगभग स्थिरता देखी। हालांकि विदेशी बाजारों से नये आर्डर में लगातार वृद्धि देखी गयी लेकिन नये निर्यात आर्डरों के विस्तार में गति अक्तूबर से धीमी देखी जा रही है।

रोजगार के संदर्भ में सर्वे में कहा गया है कि विनिर्माण क्षेत्र में नियुक्ति लगभग स्थिर बनी हुई है और पिछले दो साल से लगभग यही प्रवृत्ति है। कीमत मोर्चे पर कच्चे माल की लागत में 11 महीने में तीव्र गति से वृद्धि हुई जबकि मुद्रास्फीति मार्च से नरम हुई है। लीमा ने कहा, ‘‘उत्पादन के मूल्य में कुल मिलाकर हल्की वृद्धि मजबूत प्रतिस्पर्धी माहौल को बताती है क्योंकि लागत मुद्रास्फीति में वास्तव में मई 2015 से तेज वृद्धि हुई है।’’ वित्त वर्ष 2016-17 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने प्रमुख नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की और नकदी बढ़ाने के लिये कई अन्य उपाय किये। हालांकि उद्योग निवेश में वृद्धि के लिये केंद्रीय बैंक से नीतिगत दर में और कटौती चाहता है।