Birthday special PM : Narendra Damodar Das Modi, एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने आज देश के हर बच्चा-बच्चा जानता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना आज अपना 70मवां जन्मदिन मना रहे हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी उन्हे इस खास दिन के लिए बधाई दी जा रही है। नरेंद्र दामोदर दास मोदी, एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने आज हर भारतीय के दिल में एक अमिट छाप छोड़ी है जिन्हें आज देश के हर बच्चा-बच्चा जानता है। सिर्फ भारत ही नहीं आज इनकी प्रसिद्धि पूरी दुनिया में फैल गई है।

नरेंद्र दामोदर दास मोदी, एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने आज हर भारतीय के दिल में एक अमिट छाप छोड़ी है जिन्हें आज देश के हर बच्चा-बच्चा जानता है। सिर्फ भारत ही नहीं आज इनकी प्रसिद्धि पूरी दुनिया में फैल गई है। 17 सितंबर 1950 को वड़नगर के एक  साधारण परिवार में जन्मे नरेंद्र मोदी आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। लेकिन इन 70 सालों में नरेंद्र मोदी का सफर एक  चाय बेचने वाले लड़के से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बनने तक रहा है।

अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता,वाक्पटुता और लोकप्रियता के कारण वे पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से भारतीय राजनीति के एक उत्कृष्ट नेता रहे हैं और आज भी भारतीय राजनीति में किसी भी नेता के लिए उनके कद तक पहुचना ही एक बड़ी उपलब्धि होगी।

17 वर्ष में स्वयंसेवक बने

रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले मोदी का सता के शीर्ष पर पहुंचना, इस बात का बहुत बड़ा संकेत है कि जिंदगी में एक व्यक्ति अगर दृढ़ निश्चय कर ले तो उसे कोई भी उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकता। मोदी ने सभी बाधाओं के बावजूद भी अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने वडनगर से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर की डिग्री प्राप्त की। उनके स्कूल के शिक्षकों में से एक ने उन्हें एक साधारण छात्र के रूप में वर्णित किया लेकिन वह एक प्रतिभाशाली बालक थे।

बचपन से ही उनका संघ के प्रति गहरा झुकाव था और इसी का परिणाम था कि वह 17 वर्ष की आयु में 1967 में अहमदाबाद पहुंचे और उसी वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए। फिर 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए। इस प्रकार, सक्रिय राजनीति में आने से पहले, मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे। मोदी ने अपनी पढाई गुजरात विश्वविद्यालय तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की इसके पश्चात नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से 1985 में बीजेपी से जुड़ गए। 1995 में नरेंद्र मोदी को बीजेपी में राष्ट्रीय महामंत्री का पद दिया गया और 2001 तक वे इस पद को बखूबी निभाते रहे।

मुख्य सेवक से प्रधान सेवक तक का सफर

सन् 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद, मोदी को गुजरात की कमान दी गई। उस समय गुजरात में भूकंप आया था और भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का सबसे काला दिन था, जब फरवरी 2002 में गोधरा कांड हुआ था, इसके ठीक बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ़ दंगे भड़क उठे। इन दंगों में सरकार के मुताबिक एक हजार से ज्यादा और ब्रिटिश उच्चायोग की एक स्वतंत्र समिति के अनुसार लगभग 2000 लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर मुसलमान थे।

जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौर किया तो उन्होंनें उन्हें ‘राजधर्म निभाने’ की सलाह दी जिसे वाजपेयी की नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया। हालांकि इस गोधरा कांड के आरोप मोदी सरकार पर लगाए गए थे लेकिन  यह सब कभी साबित नहीं हुआ। नरेंद्र मोदी अपने विकास कार्यों और गुजरात के लिए किए गए अन्य सामाजिक कार्यों के कारण 2002, 2007 और 2012 में लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। आज भी पूरे देश में गुजरात का विकास मॉडल फेमस है।

नरेंद्र मोदी जी के चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के एक साल बाद जून में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया और वह इस सन् 2014 में होने वाले आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में दिखाई दिए। 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधित्व में बीजेपी 282 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। इसी के साथ नरेंद्र मोदी 2014 में भारत के 14 वे प्रधानमंत्री बने। 2019 के लोकसभा इलेक्शन में वाराणसी संसदीय क्षेत्र से मेजोरिटी से जीतते हुए पुनः भारत के प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जो (नेशनल कांग्रेस के अलावा) दो बार लोकसभा चुनाव जीतकर दोबारा देश के प्रधानमंत्री बने।

दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक

वर्ष 2015 की फोर्ब्स पत्रिका ने नरेंद्र मोदी को, दुनिया में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में नौवां स्थान दिया है। मोदी वर्ष 2014 में फोर्ब्स की सूची में 14 वें स्थान पर थे। पत्रिका ने मोदी के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रथम वर्ष में जीडीपी की दर 7.4 प्रतिशत लागू की गई थी और विशेष रूप से शी जिनपिंग, पुतिन, ओबामा और ट्रंप से मिलने के दौरान उन्होंने वैश्विक नेता के रूप में अपनी प्रोफाइल को उजागर किया है।

नरेंद्र मोदी ट्विटर (Twitter) पर दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा फॉलोवर वाले (Followed) राजनेता हैं। पहले नंबर पे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और दूसरे पे अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हैं। मोदी के ट्विटर अकाउंट पे 12 मिलियन से भी ज्यादा फॉलोवर्स हैं।

एक कुशल योजनाकार मोदी ने, रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले से लेकर भारत का एक लोकप्रिय नेता बनने तक का सफर बड़ी सफलता से पूरा किया, हालांकि उनके बहुत से विरोधी उनके इस दावे से सहमत नहीं हैं कि वह कभी चाय भी बेचा करते थे। संघ परिवार की ‘हिंदुत्व की प्रयोगशाला’ माने जाने वाले राज्य में मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी छवि एक कट्टरपंथी की बनाई थी, जो लगातार तीन बार चुनाव दर चुनाव अपनी विजय का परचम लहराता रहा।

युवाओं में काफी लोकप्रिय मोदी स्टाइल

लोकसभा चुनाव में अल्पसख्यकों, खासतौर पर मुसलमानों का समर्थन हासिल करने के लिए उन्होंने जानते बूझते अपनी कट्टर हिंदुत्ववादी छवि को त्याग दिया और अपना पूरा ध्यान विकास के मुद्दे, खासतौर से गरीब मुसलमानों के विकास पर केंद्रित किया। पीएम मोदी आज 70 साल की उम्र में भी काफी एक्टिव रहते हैं। उनके बोलने की एनर्जी से लेकर उनके योगा तक को युवा काफी पंसद करते हैं।

पीएम मोदी कभी बच्चों के कान खींचते देखा जा सकता है तो कभी मन की बात में युवाओं की समस्योओं पर बोलना हो, युवा उन्हे पसंद के साथ-साथ कॉपी भी करते हैं। यहीं नहीं उनके कपडों के स्टाइल और चश्में को लेकर भी का खूब पसंद किया जाता है।

सबका साथ सबका विकास

नरेंद्र मोदी के राजनीतिक दर्शन का मूलमंत्र अंत्योदय है। गरीब, मजदूर, किसान और जन-जन की चिंता करने वाले ‘अन्नदाता सुखी भवः’ की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी, नीति आधारित प्रशासन की संकल्पना, सबको पक्का घर, चौबीस घंटे बिजली, पीने का स्वच्छ पानी, गांव-गांव तक सड़क, इंटरनेट के साथ शिक्षा, स्वस्थ्य, रोजगार के लिए ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सपना साकार करने का काम कर रहे हैं।

मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, फिट इंडिया, स्वच्छ इंडिया, टीम इंडिया जैसी सैकड़ों योजनाओं और अभियानों के माध्यम से सामूहिक प्रयत्नों से न्यू इंडिया का निर्माण कर रहे हैं।