आखिरकार केजरीवाल ने अपना दर्द झलका ही दिया

RBL Nigamआर.बी.एल.निगम, दिल्ली ब्यूरो चीफ

पंजाब में सरकार बनाने का ख्याब सजाये बैठे आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के ड्रीम प्रोजेक्ट पर पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक की चाबुक चलाकार ग्रहण लगा दिया है. बताया जाता है कि विदेशों से पार्टी के नाम पर जुटाई गयी ब्लैक मनी की इस करोड़ों रुपये की रकम को लेकर केजरीवाल सकते में पड़ गए हैं. और अब वह इस रकम को ब्लैक मनी से वाइट मनी बनाने की योजना तैयार करने में लगे हैं.

kejriwaalसूत्रों के मुताबिक ‘आप’पार्टी ने ये रकम पंजाब चुनाव के लिए कनाडा, अमेरिका और यूरोप से जुटाई थी. बताया जाता है कि इसी के चलते केजरीवाल की बोलती मोदी की इस कार्रवाई के बाद से बंद है. और तो और इसीलिए मीडिया के सवालों से भी केजरीवाल अपने को घिरता देख किनारे निकल लिए. मालूम हो कि मोदी की छोटी सी छोटी योजना के खिलाफ बयान देने वाले ‘आप’ के मुखिया ने शायद इसी वजह से अब तक चुप्पी साध रखी है.

राजनीतिक हलकों में केजरीवाल द्धारा चुप्पी साधने पर बड़ी बैचैनी हो रही थी, कि केजरीवाल ने आखिरकार ममता के ट्वीट पर रोने का आभास तो करवा दिया, लेकिन खुलकर नहीं बोल रहे। जनता से लेकर हर नेता के दर्द को उन्होंने समझते हुए अपने मौन व्रत को तोड़ बोले कि मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000रु. के नोटों को बंद किया जाने को लेकर आखिरकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी चुप्पी तोड़ ही दी। केजरीवाल का कहना है कि मुझे एक बात समझ में नहीं आ रहा कि 1000 रु का नोट बंद करके और 2000 रु. का नोट जारी करके आप भ्रष्टाचार कैसे खत्म कर पाओगे?

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भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिलेगा

केजरीवाल ने पीएम मोदी पर अप्रत्यक्ष रुप से आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने सहयोगियों को एक सप्ताह पहले ही इस बारे में बता दिया था। और उन लोगों ने अपने पैसों को पहले ही निवेश कर लिया है। केजरीवाल का कहना है कि सरकार का ये फैसला भ्रष्टाचार को और बढ़ाएगा।

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हालांकि पीएम मोदी के पुरानी 500 और 1000 रुपये की करेंसी को लेकर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में ममता बनर्जी के ट्वीट का रिट्वीट कर  काफी देर बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपना रोना रोया था। बताया जाता है कि कनाडा और यूरोप के गुरुद्वारों में खालिस्तान समर्थकों के जरिये पार्टी फंड का पैसा हवाला के जरिये लाया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक इस बड़ी रकम को केजरीवाल पंजाब में अपने कुछ भरोसेमंद लोगों के जरिये मैनेज कर रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक ‘आप’ मुखिया केजरीवाल अब अपनी पार्टी के फंड मैनेजरों से इस बात की गोपनीय मीटिंग कर रहे हैं की कितना रूपया पार्टी फंड के नाम से लिया जा सकता है. पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं की इस मीटिंग का खास मकसद ब्लैक मनी को वाइट मनी करना है. यही नहीं पार्टी यह भी योजना बना रही है कि इतना बड़ा बखेड़ा करा दो कि मोदी को अपना फैसला वापस लेना पड़े. बहरहाल अगर ऐसा नहीं होता है तो पंजाब में सरकार बनाने का केजरीवाल का ड्रीम प्रोजेक्ट नींद में देखा जाने वाला ख्याब ही रह जाएगा।

वैसे यही बैचैनी मायावती को भी है। क्योंकि अदालतों से बचकर निकलने में कुछ तो सफल हो गयीं, लेकिन बैंक से बाहर जो माया इकट्ठी कर रखी है, इस पर मंत्रा कर रही हैं कि उसे अब किस तरह घोषित करें।  दलित नेता के नाम पर जमा इतनी धनराशि जब दलितों के सामने आएगी, उस स्थिति में “कौन दलित उन पर विश्वास करेगा?”