मिड डे मील के हिसाब-किताब में बड़ी गड़बड़ी सामने आई

मिड डे मील के अनाज की ढुलाई में पांच साल के हिसाब-किताब में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार से जारी धन व खाद्य विभाग द्वारा भुगतान में फिलहाल करीब ढाई करोड़ रुपये का अंतर मिला है। इस संबंध में नौ जिलों से रिकार्ड तलब किया गया है।  

एपीडी-समग्र शिक्षा अभियान डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार, देहरादून, चंपावत, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी,टिहरी, रुद्रप्रयाग, यूएसनगर और उत्तरकाशी के बीते पांच वर्ष के रिकार्ड में विसंगतियां हैं।

इन जिलों से रिकार्ड मांगा गया है। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, यदि राशन ढुलाई का हिसाब समय पर साफ न हुआ तो केंद्र सरकार भविष्य में इस मद में कटौती कर सकती है। केंद्र सरकार वर्ष 2015-16 में रिकार्ड नहीं मिलने पर एमडीएम का बजट कम भी कर चुकी है। 

तीन रुपये का चावल और ढुलाई छह रुपये

  • मिड डे मील के तहत सरकार कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए रियायती दर पर चावल मुहैया कराती है।
  • इस चावल को एफसीआई के गोदाम से डीएसओ के गोदाम और यहां से डीलर की दुकान तक पहुंचाने के लिए ढुलाई दी जाती है।
  • ढुलाई के लिए केंद्र ने 75 रुपये प्रति कुंतल का मानक तय किया है।
  • पर्वतीय राज्य होने की वजह से उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में ढुलान की दर 127 से 613 रुपये प्रति कुंतल तक है।
  • उत्तरकाशी में 300 रुपये प्रति कुंतल की दर के चावल को गोदाम से स्कूल तक पहुंचाने में 613.56 रुपये प्रति कुंतल का खर्च आता है।
  • टिहरी में यह खर्च 390, बागेश्वर में 372 व चमोली में 321 रुपये हो जाता है।
  • मैदानी जिलों की बात करें तो यूएसनगर में 42.10, हरिद्वार में 76.68 व देहरादून में 127.22 रुपये प्रति कुंतल खर्च आता है।

जेडी-एमडीएम परमेंद्र कुमार बिष्ट बताते हैं पर्वतीय राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में ये दरें तय की थीं।