पुलिस कर्मियों को राहत, वेतन विसंगति दूर

ukpoliceराज्य ब्यूरो, देहरादून

सरकार ने लंबी मशक्कत के बाद आंदोलनकारी पुलिस कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। वेतन विसंगति को दूर करते हुए पुलिस कर्मचारियों को उच्चीकृत ग्रेड वेतन का लाभ 12 दिसंबर, 2011 से वास्तविक और एक जनवरी, 2006 से नोशनल (प्राकल्पिक) आधार पर देने का फैसला लिया गया है। इस बाबत बुधवार को शासनादेश भी जारी किया गया है। अलबत्ता, वर्ष 2006 से एरियर देने के मामले में सरकार ने खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया है।

पुलिस कर्मचारियों के आंदोलन में आखिरकार मुख्यमंत्री हरीश रावत के हस्तक्षेप ने आखिरकार असर दिखाया। बीते रोज पुलिस कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने के साथ ही वेतन विसंगति का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ने तलब किया था। बुधवार को मुख्यमंत्री से उक्त प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही वेतन विसंगति दूर करने का शासनादेश भी जारी कर दिया गया। इस आदेश से पुलिस महकमे में कार्यरत वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक उपनिरीक्षक (एम), सभी विंगों के हैड कांस्टेबल, कांस्टेबल, चालक, पीएसी, सहायक परिचालक, कर्मशाला सहायक, फायरमैन एवं लिडिंग फायर मैन, फायर सर्विस चालक पदधारकों को 12 दिसंबर, 2011 से उच्चीकृत वेतनमान, ग्रेड वेतन का लाभ एक जनवरी, 2006 से नोशनल आधार पर मंजूर किया गया है। इससे पुलिस कर्मचारियों को वर्ष 2006 से नोशनल इंक्रीमेंट मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

सचिवालय में पत्रकारों से मुखातिब मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के इस कदम का लाभ पुलिस कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में भी मिल सकेगा। इसके साथ शासन ने उक्त संबंध में 14 मार्च, 2012 को जारी शासनादेश निरस्त कर दिया है। संशोधित आदेश लागू होने से पुलिस कर्मचारियों को एक हजार से डेढ़ हजार रुपये का लाभ होगा। वर्ष 2006 से एरियर भुगतान की मांग को सरकार ने प्रदेश की खराब वित्तीय हालत का हवाला देते हुए मानने में असमर्थता जाहिर की। एरियर की मांग पर जोर देने के अंदेशे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर हर मुमकिन मदद की है। किसी अन्य मांग पर जोर देना आग से खेलने सरीखा है। इससे बचा जाना चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने आंदोलनकारी पुलिस कर्मचारियों की गिरफ्तारी की जानकारी होने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने कर्मचारियों के हितों के प्रति गंभीर है। मुख्य सचिव को कर्मचारी संगठनों और विभागाध्यक्षों के साथ हफ्ते में एक दिन वार्ता कर समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव गृह मनीषा पंवार एवं मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार मौजूद थे।

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