अखिलेश जी म से मुज़्ज़फरनगर और म से ही मथुरा होता है

आर.बी.एल.निगम

RBL Nigamअखिलेश जी  मरने वाले के परिवार को रूपए बाँटने से सदस्य वापस नहीं आ जाता। मथुरा से जब्त हुए ज़खीरे से स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश में जंगल राज फल फूल रहा है। पुलिस सतर्क विभाग पर प्रश्नचिन्ह लगाना गलत होगा, क्योंकि वहाँ चलती है माफिया की। जो मुज़्ज़फरनगर कांड में स्पष्ट हो गया था। जब एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी ने दंगाइयों पर कोई कार्यवाही न करने पर कहा “पहले मैं मुसलमान हूँ बाद में पुलिस अधिकारी”; यदि किसी हिन्दू अधिकारी ने ऐसी ही बात बोली होती, मुलायम सिंह उसकी पीठ थपथपाने की बजाय न जाने कितनी दफाएं लगवा कर उस अधिकारी का जीवन ही बर्बाद करवा देते। बरहाल वहां भी भरपूर हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था। और अब मथुरा से।

लाशों की राजनीति मे धृतराष्ट् का कानून

 6816-news-02-3मथुरा की घटना के साथ -साथ मुझे कुछ साल पहले की घटना याद आ गयी प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हक को पीट कर भीड ने मार दिया था और उनकी पत्नी परवीन आज़ाद ने मीडिया से रो रो कर ये कहा कि ….. जब तक मुख्यमंत्री नही आते हम सुपुर्दे ख़ाक नही होने देंगे…..फिर बहुत सारे वादे किये गये जिनमें तीन लोगो को नौकरी माँगी थी और बाद में कोर्ट के दख़लंदाज़ी से दो लोगो को ही मिली और परवीन को खुद क्लास टू की नौकरी पचास लाख नक़द पर मामला तय हुआ…..मैने खुद आज भी परवीन आज़ाद को दो सिपाहियों की सुरक्षा में चलते हुये देखा है यानी की सुरक्षा भी मिली है जिसका ख़र्च हमारी जेब से जाता है……क्यों !!!

अब सरकार ये बताये की मुकुल द्विवेदी जो एस.पी.रैंक के थे उनके लिये क्या घोषणा की गयी है …. …और क्या किसी ने मुकुल जी की पत्नी को किसी मीडिया में चिल्लाते या रो-रो कर किसी फ़रमाइश की बात सुनी है….मैने अभी तक उनका चेहरा भी नहीं देखा है……हाँ माँ ने ज़रूर कहा है कि मुझे मेरा बेटा वापिस दे दो….

क्या यहां पर परिस्थितियाँ भिन्न है या कुछ और भिन्नता है!!!!!

6816-news-02-2मथुरा में हुए मौत के तांडव का सरगना रामवृक्ष यादव है. करीब 5000 कथित सत्याग्रहियों का ये सरगना यूपी के गाजीपुर का रहने वाला है. यह पहले जयगुरुदेव का शिष्य हुआ करता था. गुरू की विरासत का दावा करने वाले रामवृक्ष की दाल जब नहीं गली तो वो उनसे अलग हो गया. यही नहीं उसने गुरू के आश्रम पर हमले की साजिश भी रची. अपनी मांगो को लेकर धरने के नाम पर वो मथुरा के जवाहर बाग में आया और धीरे-धीरे करीब 280 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर बैठा.

रामवृक्ष यादव पर जानलेवा हमले और धमकियों के आरोपों की फेहरिस्त के साथ ही उसकी ताकत भी बढ़ती गई. जो संस्था पिछले दो साल से सत्याग्रहियों के नाम से मथुरा में कब्जा जमाए बैठी थी, उनके पास से हथियारों का जखीरा बरामद हुआ. हैरान करने वाली बात ये है कि प्रशासन को पिछले दो साल में उनकी करतूतों की भनक तक न लगी. अपनी गुंडागर्दी और अपराध को वह एक संस्था के नाम पर अंजाम देता रहा. इस संस्था का नाम आजाद भारत विधिक वैचारिक सत्याग्रही है.

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इस संस्था का काम आजाद भारत में गुंडागर्दी, अवैध कब्जा और आसपास रहने वालों को सताना है. हैरान करने वाली बात ये कि इस संस्था ने दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के नाम पर मथुरा में अड्डा जमाया और दो साल तक जवाहरबाग में जमे रहे. मथुरा के इन सत्याग्रहियों ने एक दिन में जो सत्यानाश किया वो पुलिस के लिए हजम करना भारी पड़ रहा है. भयावह गोलीकांड में नुकसान को झेलने के बाद जब पुलिस ने इन सत्याग्रहियों के अड्डे को कब्जे में किया तो वहां से हथियारों का जखीरा बरामद हुआ.

हथियारों का जखीरा बरामद

– 315 बोर की 45 पिस्तौलें
– 12 बोर की 2 पिस्तौलें
– 315 बोर की 5 राइफलें
– राइफल के 80 जिंदा कारतूस
– 12 बोर के 80 कार्टिजेस
– 320 बोर के 5 खोखे

संस्था की हास्यास्पद मांगें

आजाद भारत विधिक वैचारिक सत्याग्रही संस्था की मांग है कि भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द किया जाए. इस समय की प्रचलित मुद्रा की जगह आजाद हिंद फौज करेंसी शुरू की जाए. एक रुपये में 60 लीटर डीजल और एक रुपये में ही 40 लीटर पेट्रोल की बिक्री शुरू की जाए. प्रणव मुखर्जी और नरेन्द्र मोदी को गैर भारतीय घोषित किया जाए. चूंकी इ संस्था के लोग सुभाष चन्द्र बोस के अनुयायी हैं, इसलिए उन्हें सेनानी का दर्जा दिया जाए. उनको पेंशन के साथ ही जवाहर बाग में स्थायी निवास दिया जाए.

ऐसे हुआ मौत का तांडव

6816-news-02-1दरअसल पूरा मामला मथुरा के जवाहरबाग में 280 एकड़ जमीन पर कब्जे से जुड़ा है. इस पर सत्याग्रही संस्था ने अवैध कब्जा कर लिया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका के बाद अदालत ने आदेश पारित किया और आदेश दिया कि जल्द से जल्द अतिक्रमण की गई जमीन को खाली करें. कोर्ट ने अपने आदेश को लागू करने के लिए पुलिस को निर्देश पारित किया. पुलिस अतिक्रमण हटाने गई थी, जिस पर सत्याग्रहियों ने हमला बोल दिया. इसमें दो पुलिस अफसरों सहित करीब 21 लोग मारे गए हैं.

भारतीय जनता  पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने मथुरा काण्ड को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव से काफी तीखे सवाल पूछे हैं। इस घटना में दो पुलिस अफसरों समेत करीब 18 लोगों की मौत हो गयी है। इस घटना के बाद एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। संबित पात्रा ने भी  एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव के ऊपर कई सवाल दागे –

पहले प्रश्न में उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि जवाहर बाग़ में कब्ज़ा करके बैठे इस भू माफिया को किसका राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था।

दूसरे सवाल में उन्होंने कहा कि मीडिया काफी तफ्शीश के साथ हर दिन इस पूरे मामले को उजागर कर रही है। मीडिया का श्पष्ट कहना है कि इस घटना का जो मास्टरमाइंड था वह किस प्रकार की करतूतों को अंजाम दे रहा था उससे सभी लोग भली भाँती परिचित थे, उसपर पहले भी 15 लोगों पर जानलेवा हमले करने का आरोप लगा था और जांच भी चल रही थी। इसके अलावा मथुरा और आस पास के लोग उस व्यक्ति और उस पूरे समूह के कार्यकलापों से परेशान थे। ऐसे में वह व्यक्ति ढाई-तीन साल तक मथुरा की गलियों में ढाई-तीन साल तक सीना चौड़ा करके घूमता रहा, यह सब कुछ प्लान करता रहा, प्रशासन और पुलिस शांत रही, यह ऐसे ही तो नहीं हो सकता है, सबकुछ जानते हुए उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई??

तीसरे प्रश्न में उन्होंने कहा – अभी हमारी प्रेस कांफ्रेंस के पहले हमने उत्तर प्रदेश के DGP की प्रेस कांफ्रेंस को सुना, उन्होंने बहुत ही श्पष्टता के साथ कहा कि जब पुलिस वहां पर पहुंची तो पहले से ही कुछ लोग बन्दूक लेकर पेड़ों के ऊपर बैठे हुए थे, पुलिस को देखते ही उन्होने ताबड़तोड़ गोलियां चलाना शुरू कर दिया जिसमें दो पुलिसकर्मी अपना जीवन खो बैठे। संबित पात्रा ने कहा कि ये तो बड़ा आश्चर्य का विषय है, इतना बड़ा पुलिस महकमा, पुलिस बिना तैयारी के वहां चली जाती है, पुलिस में किसी प्रकार का इंटेलिजेंस ही नहीं कि लोग पेड़ पर बन्दूक लेकर बैठे हुए हैं और गोली चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पुलिस में भर्ती होते हैं वो जनता की हिफाजत के लिए भर्ती होते हैं, वे मुस्तैदी के साथ काम करना चाहते हैं लेकिन अगर इंटेलिजेंस ही नहीं है कि पेड़ पर पहले से ही लोग बन्दूक लेकर बैठे हुए हैं तो हम उत्तर प्रदेश की सरकार और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछना चाहते हैं कि जाने से पहले पुलिस ने तैयारी क्यों नहीं की। ये इंटेलिजेंस कहाँ नदारद थी।

चौथे सवाल में संबित ने कहा – तमाम न्यूज चैनल्स दिखा रहे हैं कि किस प्रकार का असलहा और बारूद जवाहर बाग़ से  निकाला गया है, वहां पर बम, बारूद और बंदूकों का जमावड़ा था, यह कोई रातोंरात तो नहीं हो गया, जिस तादात में यह इकठ्ठे हुए हैं, ये खुद अपने आप में बयान करता है कि ये वर्षों का काम था, दो ढाई वर्ष में धीरे धीरे करके एक मिनी वार जोन, या एक मिनी युद्ध मैदान तैयार किया गया था, उसके अन्दर इतना असलहा, बम बारूद इत्यादि है, टीवी यह भी दिखा रही है कि आधुनिक हथियार भी वहां पर मौजूद था। प्रश्न यह है कि जब उत्तर प्रदेश के सेंटर यानी मथुरा में इतना बम बारूद इकठ्ठा हो रहा था यह छोटी बात नहीं है, मथुरा कोई छोटा शहर नहीं है, आखिर यह किसके बल पर हुआ, इतना असलहा ऐसे ही इकठ्ठा नहीं हो जाता है, संभव ही नहीं है बिना कि बिना पुलिस और प्रशासन की जानकारी के इतना असलहा वहां इकठ्ठा हो जाय, जब असलहा आता है तो कई चेक पोस्ट पर उनकी चेकिंग होती है, क्या उनकी कोई चेकिंग नहीं हुई? जिस लोगों ने यहाँ पर इतना असलहा और बम बारूद इकठ्ठा किया, उसने पूछताछ नहीं की गयी या भ्रष्टाचार के कारण हर चेकपोस्ट पर उन्हें छोड़ दिया गया। यह दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में प्रशासन की हालत क्या है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मथुरा जैसे महत्वपूर्ण शहर के बीचों बीच इतना बम बारूद इकठ्ठा हो जाता है और पुलिस जान नहीं पाती है। ये हमारा चौथा सवाल था अखिलेश यादव से कि आपका प्रशासन कहाँ नदारद था। जब बम बारूद इकठ्ठे हो रहे थे तो प्रशासन क्यों नहीं जागा।

संबित ने पांचवे सवाल में कहा – पुलिस का काम जनता की हिफाजत करना है, जब खुद पुलिस हताहत हो जाए, जब खुद पुलिस अपनी जान के लिए परेशान रहे तो जनता की हिफाजत कौन करेगा, मै NCRB का डेटा लेकर बैठा हूँ। उन्होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों में यानी जब से सपा की सरकार बनी है, पुलिस से किस प्रकार का वर्ताव किया गया है, वह भी सोचनीय है।

उन्होंने बताया कि दो दिन पहले आजमगढ़ पुलिस थाने में कुछ लोगों की भीड़ एक थाने पर पथराव करती है, जबरजस्ती थाने में घुस जाती है और पुलिस एन जिस व्यक्ति को बंद किया होता है उसे छुड़ा लेती है।

इसके अलावा 26 अप्रैल को बस्ती नामक पुलिस स्टेशन में एक सब-इंस्पेक्टर को गोली मार दी जाती है।

प्रतापगढ़ के कुंडा पुलिस स्टेशन में एक होमगार्ड को गोली मार दी जाती है।, पीलीभीत में हेडकांस्टेबल को गोली मार दी जाती है।

बदायूं में दो पुलिसकर्मी जब साउंड की आवाज कम कराने जाते हैं तो उनकी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है।

उन्होंने बताया कि NCRB का डेता बताता है कि जब से अखिलेश यादव की सरकार बनी है पुलिस पर इस प्रकार की वारदात बढ़ गयी हैं।

उन्होंने बताया कि 2014-15 में पुलिस वालों पर तीन सौ अटैक हुए। विगत चार वर्षों में 1054 बार पुलिस पर अटैक हुआ है।

उन्होंने कहा कि जिस राज्य में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है उस राज्य में जनता का क्या हाल होगा इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं। पुलिस की तैयारी पर भी कई प्रश्न उठते हैं, जिस पुलिस को तैयार रहना चाहिए, वह तैयार नहीं रहती, आज एसपी नहीं रहे हमारे बीच, लोग एसपी को मार दे रहे हैं, SHO मर जाते हैं। जब एसपी और SHO को ही DGP और मुख्यमंत्री नहीं बचा सकते तो आप आदमी को मुख्यमंत्री किस प्रकार से हिफाजत कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हम अखिलेश यादव से इन पाँचों प्रश्नों का उत्तर चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश को गुंडाराज बना दिया है।

संबित पात्रा ने कहा कि अखिलेश यादव को नैतिक रूप से इस घटना की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।