सीएम त्रिवेंद्र को नकारा साबित करने में लगे है social मीडिया पोस्ट

देहरादून (जयदीप भट्ट )। उत्तराखंड में आजकल सोशल मीडिया याने की फेसबुक पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बारे में तरह तरह के घोटाले, शराब पर सब्सिडी, झारखंड से रिश्वत , झांपु, नियुक्ति घोटाला, खनन में हाथ, नाकारा सीएम  आदि तरह तरह के लेख फेसबुक पोस्ट, फेसबुक लाइव वीडीयो प्रचंड रूप से प्रकाशित हो रहे हैं , उत्तराखंड के बुद्धिजीवी वर्ग में से जो राज्य के हितैषी है वह सीएम त्रिवेंद्र को नकारा साबित करने के लिए किसी से भी भिड़ने या असभ्य बात बोलने को तत्पर हैं। इसी शोशल मीडिया में कुछ ज्ञानी भी हैं जो त्रिवेंद्र को ईमानदार कहने में कोई कसर नही छोड़ रहे है लेकिन वे सीएम के खिलाफ झूठ नही बोलने का इनाम कुछ पहाड़ हितेषियों (इनमे से कुछ तो उत्तराखंडी हैं ही नहीं ) के द्वारा असभ्य व भद्दे कमेंट के रूप में बेमतलब सुन रहे हैं।

विगत दिनों एक और पोस्ट फेसबुक व अन्य शोशल मीडिया में वायरल हुई या की गई है कि उत्तराखंड में सीएम के रूप में राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी आएगा, तब ही विकास संभव होगा। इन हितेषियों को जानकारी ही नहीं है कि 09 मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर पाए तो अनिल बलूनी के पास कौन सी जादुई छड़ी है , जिसे घुमाते ही पहाड़ में डाक्टर चढ़ जाएंगे , स्कूल आवाद हो जाएंगे , पहाड़ के जंगलों से सुवर, बंदर और बाघ भाग जाएंगे। शायद नहीं ? एक बात तो साफ है कि पिछले सरकारों के मुख्यमंत्रियों में कोई कमी नही थी वे योग्य थे कुशल प्रशासक थे व पहाड़ का विकास भी चाहते थे लेकिन टांगखिंचाई जो अपने ही लोगों द्वारा की गयी उसके लिए सिर्फ समय अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में लगे रह गए होंगे, सीएम सीएम के खेल में हम उत्तराखंडियों पर पूर्व सीएम के रूप में खर्चे के बोझ डालते गए।
हो सकता इन बातों से राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अनिभिज्ञ हो , उन्हें इन सब फेसबुक पोस्टों आदि के बारे इन अफवाहों का तनिक भी अहसास न हो लेकिन सलाहकार व उनके मीडिया कोर्डिनेटर को इसकी जानकारी इन उत्तराखंड के दोनों विकास पुरुषों तक पंहुचानी चाहिए जिससे राज्य के आमजनमानस में गलत सन्देश न जाए।

सोशल मीडिया की इन दोनों पोस्टों पर एक बात तो साफ जाहिर है कि बीजेपी में कहीं न कहीं अति महत्वाकांक्षी नेता है जिन्हें राज्य के विकास से कही ज्यादा अपने विकास की है , यदि उत्तराखंड भाजपा में सब सही है तो फिर इन सब पोस्टों का संज्ञान मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा अनिल बलूनी कार्यालय क्यों नही ले रहा है , या जानबूझकर उत्तराखण्ड के पर्वतीय इलाकों में पिछड़ते नागरिकों को बरगलाने के लिए इस तरह के प्रपंच इन बीजेपी के नेताओं द्वारा रचे जा रहे है। इसकी जड़ में कुछ न कुछ तो गड़बड़ है क्योंकि इतनी असभ्यता व आरोप वाली पोस्टों पर कार्यवाही न होना शक की गुंजाइश अवश्य करता है। कमी दोनो की झलकती है सलाहकार दोनो के ही कमजोर प्रतीत होते हैं चूंकि सीएम कोई राह चलता नही की कोई भी कीचड़ उछाल दे और सलाहकार सुनिन्द सोए रहे या अनिल बलूनी कोई बुढ़ापे की दहलीज वाला नेता नही , जिसको अभी सीएम का मौका न मिले तो रिटायर हो जाएंगे , बलूनी के सलाहकार भी हकीकत से बलूनी को रूबरू नही करवा रहे है। ऐंसा प्रतीत होता है। जो भी हो पिसना उत्तराखंड की जनता को ही है क्योंकि यदि सीएम अस्थिर होगा तो विकास के कार्य अवश्य अवरुद्ध होंगे , नया सीएम भी एक और बोझ जनता पर डालने ही आएगा। जो भी दोनो के सलाहकारों को कम से कम महाभारत में पांडव व कौरवों के सलाहकारों से सीख लेनी चाहिए कि राज्य मोह में युवराज को गलत राय देकर शकुनि ने क्या गुल खिलाया या कृष्ण ने पांडव को सलाह देकर क्या कर दिया था।