तिरंगे का अपमान, सख्त कानून

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इन्द्रेश कुमार ने कहा कि राष्ट्र ध्वज तिरंगे का अपमान करने वालों के लिये देश में एक सख्त कानून बनना चाहिए। यहां सिटी पैलेस में ‘कश्मीर एवं धारा 370 की प्रासंगिकता एवं राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर आयोजित प्रबुद्ध जन गोष्ठी में इंद्रेश ने कहा कि जो लोग भारत से प्यार नहीं करते हैं, उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आजादी नहीं दिलाई जो एक ऐतिहासिक सत्य है। आजादी के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये थे, वे विभाजन के दस्तावेज थे। ब्रिटिश सरकार ने विभाजन के दस्तावेज पेश किये थे, ना कि स्वतंत्रता के। कांग्रेस ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के नेतृत्व में आजादी नहीं विभाजन दिया।

कांग्रेस ने देश को आजादी दिलाई इससे बड़ा कोई असत्य नहीं है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि उस समय के राजनेताओं ने भी विभाजन को स्वतंत्रता बताया था। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश के संविधान में धारा 370 जैसी अस्थाई धारा नहीं है। जम्मू कश्मीर को अलग संविधान, नागरिकता, झंडा देकर अलगाववाद का बीज बो दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाहर लाल नेहरू ने देश का विभाजन किया जबकि सरदार पटेल ने देश को जोड़ा था। कश्मीर की स्वतंत्रता के लिये कश्मीर के लोगों को मुध्य धारा में लाने की आवश्यकता है, वहां आतंकवाद को खत्म कर युवाओं को शिक्षित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि चीन की भारत को एक छोटे युद्ध के लिये धमकी के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि हम चीन को युद्ध से नहीं संवाद से जवाब देंगे। भारत ने कूटनीतिक रूप से इतना दबाव बनाया कि बिना युद्ध के चीन को डोकलम से पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारत चीन का खाद्यान्न, औषधि और कच्चे माल का सबसे बडा आपूर्तिकर्ता है और यदि इनकी आपूर्ति को रोक दिया जाये तो पांच साल बाद चीनी लोगों पर इसका प्रभाव दिखाई देने लग जायेगा। पाकिस्तान में बढ़ रहे आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि यह पाकिस्तान को तय करना या तो उसे चीन निगल जाये या उसके टुकडे़ होकर भारत में शामिल हो जाये।अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मंदिर बनेगा और सम्पत्ति राम लला की है। बस इस पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय आना बाकी है।