जून में ब्लैकलिस्ट हो सकती है पाकिस्तान की इकॉनमी, होंगी ये मुश्किलें

नई दिल्ली। फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स की ओर से पाकिस्तान की इकॉनमी को ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने से उस पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। पाकिस्तान की ओर से टेरर फाइनैंसिंग को रोकने में असफल रहने पर टास्क फोर्स ने यह कदम उठाया है। टास्क फोर्स के इस कदम के बाद अब पाकिस्तान के सामने अन्य एजेंसियों की ओर से भी डाउनग्रेड किए जाने का खतरा मंडरा रहा है। यही नहीं यदि पाक के रवैये में सुधार नहीं हुआ तो टास्क फोर्स की ओर से उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

पाकिस्तान की इकॉनमी के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड बैंक, एशियन डिवेलपमेंट बैंक समेत मूडीज, स्टैंडर्ड ऐंड पूअर और फिच जैसी एजेंसियां पाकिस्तान को डाउनग्रेड कर सकती हैं। ऐसा होने पर पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट समेत पूरी इकॉनमी में गिरावट का दौर देखने को मिल सकता है। इससे सीधे तौर पर चीन को फायदा होगा और उसके सामने पाकिस्तान में निवेश के मौके पैदा होंगे।

पाकिस्तान सरकार के आंतरिक सूत्र ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, ग्रे लिस्ट में शामिल होने का अर्थ है कि पाकिस्तान के लिए इंटरनैशनल मार्केट से फंड हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खाकन अब्बासी के आर्थिक सलाहकार मिफ्ताह इस्माइल ने दावा किया कि इससे पाकिस्तान की इकॉनमी पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

शुक्रवार को एजेंसी की ओर से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने से पहले ही देश के प्रमुख अखबार डॉन ने लिखा था कि यदि ऐसा होता है तो यह पाकिस्तान की इमेज के लिए करारा झटका होगा। मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनैंसिंग के मसले पर रोक न लगाने वाले देशों की रेटिंग तैयार करने वाला फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स ग्रे और ब्लैक लिस्ट तैयार करता है। हालांकि यह संस्था किसी भी देश पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकती।