सरकार की चेतावनी, बख्शे नहीं जाएंगे वित्तीय गड़बड़ी करने वाले

नई दिल्ली। मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि आर्थिक मामलों से जुड़ी गड़बडिय़ों के खिलाफ सरकार कड़ी कारवाई करेगी। सिस्टम सार्वजनिक पैसे की चोरी स्वीकार नहीं करेगा। न्यू इकनॉमी, न्यू रूल्स की यह अहम बात है।

सरकार ने साफ संदेश दिया है कि वित्तीय गड़बडिय़ों के मामलों में वह कड़ी कार्रवाई करेगी और इस संबंध में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेगी। खुद प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया है। बिजनस समिट में वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके कैबिनेट सहयोगी पीयूष गोयल ने भी यही बात कही।

नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे जूलर्स और कारोबारी विक्रम कोठारी से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड के मद्देनजर ये चेतावनियां दी गईं। पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा, मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि आर्थिक मामलों से जुड़ी गड़बडिय़ों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। सिस्टम सार्वजनिक पैसे की चोरी स्वीकार नहीं करेगा। न्यू इकनॉमी, न्यू रूल्स की यह अहम बात है।

वहीं वित्त मंत्री ने चेतावनी दी कि कड़ी सजा दी जाएगी। जेटली ने कहा, गड़बड़ी करने वालों को हमेशा याद रखना चाहिए कि इसका नतीजा उनके बिजनस के लिए केवल कमर्शल और सिविल डेथ ही नहीं होगा, बल्कि जरूरत पड़ी तो कानून को और सख्त किया जाएगा ताकि पता लगाया जा सके कि वे कहां हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कौन सा बड़ा से बड़ा कदम कानून के तहत उठाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग करने और टैक्स देनदारी से बचने के लिए शेल कंपनियां बनाने जैसी हरकतों से भारतीय कारोबारियों को बचना होगा। जेटली ने कहा, अगर आप सबसे तेजी से बढ़ती इकनॉमी होने का दावा कर रहे हों और डिवेलप्ड इकनॉमी बनने के लिए कदम बढ़ाने की चाहत रखते हों तो बिजनस की दुनिया में ऐसी हरकतों के लिए जगह कहां है?

जहां तक बैड लोन की बात है तो असल में कारोबारी विफलता के चलते ऐसा होने के मुकाबले जानबूझकर लोन नहीं चुकाने के मामले ज्यादा हैं। जेटली ने कहा, जिस तरह के बैंक फ्रॉड सामने आए हैं, उस तरह की घटनाएं अगर लगातार हों तो कारोबारी सहूलियत बढ़ाने की पूरी कोशिश पर पानी फिर जाएगा। अगर किसी बैंकिंग सिस्टम की कई शाखाओं में फ्रॉड हो रहा हो और एक भी कर्मचारी सवाल न करे तो क्या यह चिंता की बात नहीं है?

उन्होंने ऑडिट करने के सिस्टम और निगरानी क्षमता पर भी सवाल किए। जेटली ने कहा, अंतत: रेग्युलेटर्स ही नियम तय करते हैं। उनके पास एक तीसरी आंख होनी चाहिए, जो खुली हो और इस सेक्टर पर नजर रखे। दुर्भाग्य से भारत सिस्टम में हम राजनेता जवाबदेह हैं, न कि रेग्युलेटर।

मोदी ने कहा कि मई 2014 में जब उनकी सरकार बनी तो क्रोनी कैपिटलिज्म का बोलबाला था। उन्होंने कहा कि सरकार को बैलेंस शीट से जुड़ी जुड़वां समस्या विरासत में मिली थी, जिसमें बैंक बैड लोन से परेशान थे और कंपनियां लोन नहीं चुका पा रही थीं। मोदी ने कहा, हमने एक बड़ा रिफॉर्म इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के रूप में किया ताकि यह समस्या दूर हो सके।

वहीं जेटली ने कहा, नई दिल्ली में पॉलिटिकल करप्शन अगर खत्म नहीं हुआ है तो भी उसे तेजी से कम किया गया है। गोयल ने कहा कि पिछली सरकार का ग्रोथ मॉडल बैंकों की ओर से बिना सोचे-विचारे कर्ज देने पर आधारित था, जिससे तेज आर्थिक वृद्धि का झूठा अहसास पैदा हुआ।